पश्चिम बंगाल 12वीं बोर्ड में 3 लाख छात्रों की कमी! जानें क्या है वजह
पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद (WBCHSE) ने 12वीं कक्षा का रिजल्ट बुधवार को जारी कर दिया है, लेकिन इस साल का रिजल्ट एक खास वजह से चर्चा में है. दरअसल इस बार 12वीं बोर्ड परीक्षा में लगभग 3 लाख नियमित छात्रों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. यह गिरावट केवल आंकड़ों की नहीं बल्कि एक विशेष नीतिगत बदलाव का नतीजा है. 2025 में सिर्फ 4.73 लाख छात्रों ने दी परीक्षा WBCHSE के अनुसार इस साल कुल 4,73,919 नियमित छात्र परीक्षा में शामिल हुए, जबकि पिछले साल यह संख्या 7,55,324 थी. यानी 2,81,405 छात्रों की कमी देखी गई है. परिषद के अध्यक्ष चिरंजीब भट्टाचार्य ने बताया कि यह गिरावट 2017 में की गई उम्र संबंधित पॉलिसी में बदलाव के कारण है. यह भी पढ़ें- Operation Sindoor: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद बढ़ी फाइटर पायलट बनने की चाहत, जानें कैसे बनें भारतीय वायुसेना के योद्धा क्यों घट गई छात्रों की संख्या? भट्टाचार्य ने बताया कि वर्ष 2017 में कक्षा 5 में प्रवेश के लिए न्यूनतम उम्र 10 साल निर्धारित की गई थी. उस साल के कई छात्र इस उम्र के मानदंड को पूरा नहीं कर पाए थे और उन्हें रोक लिया गया था. यही बैच 2023 में जब 10वीं की परीक्षा में पहुंचा तब भी कई छात्र उम्र की बाध्यता के कारण आगे नहीं बढ़ सके. इसी कारण 12वीं में भी बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो सके. WBCHSE अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि 2023 की माध्यमिक परीक्षा में छात्रों की संख्या में गिरावट आई थी और उसी का असर अब 2025 की उच्च माध्यमिक परीक्षा में दिखा है. यह भी पढ़ें- शक्ति दुबे से लेकर हर्षिता गोयल तक, ये हैं UPSC में टॉप करने वालीं पांच लड़कियां अब बदलने वाला है एग्जाम सिस्टम भट्टाचार्य ने रिजल्ट जारी करते हुए यह भी बड़ा ऐलान किया कि 2025 अंतिम साल होगा जब WBCHSE हर साल 12वीं की बोर्ड परीक्षा लेगा. आने वाले सत्र से परीक्षाएं सेमेस्टर सिस्टम में होंगी. यह भी पढे़ं- बिहार में निकली फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के पदों पर भर्ती, जानें कौन कर सकता है अप्लाई

पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद (WBCHSE) ने 12वीं कक्षा का रिजल्ट बुधवार को जारी कर दिया है, लेकिन इस साल का रिजल्ट एक खास वजह से चर्चा में है. दरअसल इस बार 12वीं बोर्ड परीक्षा में लगभग 3 लाख नियमित छात्रों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. यह गिरावट केवल आंकड़ों की नहीं बल्कि एक विशेष नीतिगत बदलाव का नतीजा है.
2025 में सिर्फ 4.73 लाख छात्रों ने दी परीक्षा
WBCHSE के अनुसार इस साल कुल 4,73,919 नियमित छात्र परीक्षा में शामिल हुए, जबकि पिछले साल यह संख्या 7,55,324 थी. यानी 2,81,405 छात्रों की कमी देखी गई है. परिषद के अध्यक्ष चिरंजीब भट्टाचार्य ने बताया कि यह गिरावट 2017 में की गई उम्र संबंधित पॉलिसी में बदलाव के कारण है.
क्यों घट गई छात्रों की संख्या?
भट्टाचार्य ने बताया कि वर्ष 2017 में कक्षा 5 में प्रवेश के लिए न्यूनतम उम्र 10 साल निर्धारित की गई थी. उस साल के कई छात्र इस उम्र के मानदंड को पूरा नहीं कर पाए थे और उन्हें रोक लिया गया था. यही बैच 2023 में जब 10वीं की परीक्षा में पहुंचा तब भी कई छात्र उम्र की बाध्यता के कारण आगे नहीं बढ़ सके. इसी कारण 12वीं में भी बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो सके.
WBCHSE अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि 2023 की माध्यमिक परीक्षा में छात्रों की संख्या में गिरावट आई थी और उसी का असर अब 2025 की उच्च माध्यमिक परीक्षा में दिखा है.
यह भी पढ़ें-
शक्ति दुबे से लेकर हर्षिता गोयल तक, ये हैं UPSC में टॉप करने वालीं पांच लड़कियां
अब बदलने वाला है एग्जाम सिस्टम
भट्टाचार्य ने रिजल्ट जारी करते हुए यह भी बड़ा ऐलान किया कि 2025 अंतिम साल होगा जब WBCHSE हर साल 12वीं की बोर्ड परीक्षा लेगा. आने वाले सत्र से परीक्षाएं सेमेस्टर सिस्टम में होंगी.
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