पत्नी के व्यभिचार पर गुजारा भत्ता देने से इनकार कर सकता है पति- केरल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

Kerala High Court on Alimony: केरल हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है. अगर पत्नी अपने साथी के साथ लगातार व्यभिचार (Living in adultery) कर रही है, इसका पर्याप्त सबूत है तो पति उसे गुजारा भत्ता देने से इनकार कर सकता है. ऐसा कोर्ट ने कहा है कि अधिकांश व्यभिचार के कार्य गुप्त रूप से होते हैं और इसलिए प्रत्यक्ष प्रमाण खोजना मुश्किल होता है. परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से व्यभिचार स्थापित किया जा सकता है. केरल हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि धोखे का एक प्रसंग पत्नी को गुजारा भत्ता मांगने से अयोग्य ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगातार व्यभिचार करने का प्रमाण होना आवश्यक है. मामला क्या है? इस मामले में 12 सितंबर 2003 को इस जोड़े की शादी हुई थी. ऐसे में शादी के कुछ सालों बाद उन्हें वैवाहिक समस्याएं आने लगीं. इसलिए पति ने आगे बढ़कर मुवट्टुपुझा के पारिवारिक कोर्ट में ओ.पी.क्र.918/2019 के तहत तलाक के लिए आवेदन किया. कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया और तलाक मंजूर कर लिया गया. दरअसल, पत्नी ने उसी अदालत में एक और मुकदमा (एम.सी. क्र. 135/2020) दायर किया, जिसमें आपराधिक दंड की धारा 125 का उपयोग करके 25,000 रुपये प्रति माह मुआवजे का दावा किया गया था. पति ने इसके खिलाफ तर्क दिया कि उसकी पूर्व पत्नी व्यभिचार में रह रही थी, जिसके कारण वह आपराधिक दंड की धारा 125 की उपधारा (4) के तहत मुआवजे के लिए अयोग्य हो गई. सबूत और कोर्ट की स्वीकार्यता पति के तर्क को सही मानते हुए कोर्ट ने परिस्थितिजन्य सबूतों को महत्व दिया. पत्नी ने एक साल से प्रेम संबंध स्वीकार किया, गवाह ने उसे पार्किंग में अन्य पुरुष के साथ देखा और कॉल रिकॉर्ड व टॉवर लोकेशन भी प्रस्तुत किए गए. हाई कोर्ट ने इन सबूतों को मान्यता देते हुए पति के पक्ष में फैसला सुनाया. यह भी पढ़ें - अजित पवार के निधन पर ममता बनर्जी ने जो लिखा, उससे मच गई हलचल, बोलीं- 'शॉक्ड, प्लेन क्रैश की...'

Jan 28, 2026 - 15:30
 0
पत्नी के व्यभिचार पर गुजारा भत्ता देने से इनकार कर सकता है पति- केरल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

Kerala High Court on Alimony: केरल हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है. अगर पत्नी अपने साथी के साथ लगातार व्यभिचार (Living in adultery) कर रही है, इसका पर्याप्त सबूत है तो पति उसे गुजारा भत्ता देने से इनकार कर सकता है. ऐसा कोर्ट ने कहा है कि अधिकांश व्यभिचार के कार्य गुप्त रूप से होते हैं और इसलिए प्रत्यक्ष प्रमाण खोजना मुश्किल होता है. परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से व्यभिचार स्थापित किया जा सकता है.

केरल हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि धोखे का एक प्रसंग पत्नी को गुजारा भत्ता मांगने से अयोग्य ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगातार व्यभिचार करने का प्रमाण होना आवश्यक है.

मामला क्या है?

इस मामले में 12 सितंबर 2003 को इस जोड़े की शादी हुई थी. ऐसे में शादी के कुछ सालों बाद उन्हें वैवाहिक समस्याएं आने लगीं. इसलिए पति ने आगे बढ़कर मुवट्टुपुझा के पारिवारिक कोर्ट में ओ.पी.क्र.918/2019 के तहत तलाक के लिए आवेदन किया. कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया और तलाक मंजूर कर लिया गया.

दरअसल, पत्नी ने उसी अदालत में एक और मुकदमा (एम.सी. क्र. 135/2020) दायर किया, जिसमें आपराधिक दंड की धारा 125 का उपयोग करके 25,000 रुपये प्रति माह मुआवजे का दावा किया गया था. पति ने इसके खिलाफ तर्क दिया कि उसकी पूर्व पत्नी व्यभिचार में रह रही थी, जिसके कारण वह आपराधिक दंड की धारा 125 की उपधारा (4) के तहत मुआवजे के लिए अयोग्य हो गई.

सबूत और कोर्ट की स्वीकार्यता

पति के तर्क को सही मानते हुए कोर्ट ने परिस्थितिजन्य सबूतों को महत्व दिया. पत्नी ने एक साल से प्रेम संबंध स्वीकार किया, गवाह ने उसे पार्किंग में अन्य पुरुष के साथ देखा और कॉल रिकॉर्ड व टॉवर लोकेशन भी प्रस्तुत किए गए. हाई कोर्ट ने इन सबूतों को मान्यता देते हुए पति के पक्ष में फैसला सुनाया.

यह भी पढ़ें -

अजित पवार के निधन पर ममता बनर्जी ने जो लिखा, उससे मच गई हलचल, बोलीं- 'शॉक्ड, प्लेन क्रैश की...'

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow