... तो इसलिए हमास वाली तरकीब का किया था आरोपियों ने हथियार छुपाने के लिए इस्तेमाल, 90 के दशक में था ट्रेंड

भारत में किसी जगह को अगर सबसे सुरक्षित माना जाता है, तो वो अस्पताल है, लेकिन फरीदाबाद-सहनपुर आतंकी मॉड्यूल के आरोपियों के ठिकानों की तहकीकात और डॉक्टर आदिल अहमद राथर की पूछताछ में कुछ अलग मामला ही सामने आया है.  जानकारी मिली है कि जानबूझकर अस्पताल के लॉकर में AK-56 जैसा घातक हथियार छुपाया गया था, ताकि किसी को शक न हो. यह साजिश बिल्कुल हमास संगठन की साजिश से मिलती है. 1990 के दशक में हमास इन्हीं तरीके से हथियार छुपाया करता रहा है.  एजेंसी ने क्या बताया? एजेंसियों के सूत्रो के मुताबिक, आदिल अहमद राथर ने जिस तरह से AK-56 को अस्पताल के लॉकर में छुपाया था. यह तरीका आज के दौर में हमास जैसे आतंकी संगठन गाजा पट्टी में करते है. जहां न सिर्फ अस्पताल में शरण लेते है, बल्कि अस्पताल में ही विस्फोटक, हथियार और रॉकेट तक छुपाने का काम करते हैं. 90 के दशक का ट्रेंडइसके अलावा 90 के दशक में जब कश्मीर के आतंकवाद और अलगाववाद अपने चरम पर था, तब हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी भी अस्पतालों में डॉक्टरों की मदद से अपने हथियारों के जखीरे को अस्पताल में छुपाते थे.  ऐसे में मॉड्यूल के पकड़े जाने के बाद एजेंसियो ने जम्मू कश्मीर के कई अस्पतालो में तलाशी अभियान भी चलाया था. घाटी के गांदरबल और कुपवाड़ा जिले के कई सरकारी अस्पतालों और उनके स्टाफ के लॉकर्स की तलाशी ली गई थी. राहत की बात रही कि कहीं पर भी जम्मू कश्मीर पुलिस या किसी अन्य एजेंसी को किसी और संदिग्ध के पास से कोई भी हथियार किसी अन्य अस्पताल में नहीं मिले. अदील अहमद राथर के अलावा डॉक्टर मुज़म्मिल के पास से भी AK-74 रिफ़ाइल (क्रिंकोव) और पिस्टल बरामद हुई थी. अदील और मुजम्मिल ने पूछताछ में कबूला था की उसके पास हथियार मौलवी इरफान ने अंसार गजवात उल हिन्द के आतंकी की मदद से पहुचाए थे.  

Nov 21, 2025 - 19:30
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... तो इसलिए हमास वाली तरकीब का किया था आरोपियों ने हथियार छुपाने के लिए इस्तेमाल, 90 के दशक में था ट्रेंड

भारत में किसी जगह को अगर सबसे सुरक्षित माना जाता है, तो वो अस्पताल है, लेकिन फरीदाबाद-सहनपुर आतंकी मॉड्यूल के आरोपियों के ठिकानों की तहकीकात और डॉक्टर आदिल अहमद राथर की पूछताछ में कुछ अलग मामला ही सामने आया है. 

जानकारी मिली है कि जानबूझकर अस्पताल के लॉकर में AK-56 जैसा घातक हथियार छुपाया गया था, ताकि किसी को शक न हो. यह साजिश बिल्कुल हमास संगठन की साजिश से मिलती है. 1990 के दशक में हमास इन्हीं तरीके से हथियार छुपाया करता रहा है. 

एजेंसी ने क्या बताया?

एजेंसियों के सूत्रो के मुताबिक, आदिल अहमद राथर ने जिस तरह से AK-56 को अस्पताल के लॉकर में छुपाया था. यह तरीका आज के दौर में हमास जैसे आतंकी संगठन गाजा पट्टी में करते है. जहां न सिर्फ अस्पताल में शरण लेते है, बल्कि अस्पताल में ही विस्फोटक, हथियार और रॉकेट तक छुपाने का काम करते हैं.

90 के दशक का ट्रेंड
इसके अलावा 90 के दशक में जब कश्मीर के आतंकवाद और अलगाववाद अपने चरम पर था, तब हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी भी अस्पतालों में डॉक्टरों की मदद से अपने हथियारों के जखीरे को अस्पताल में छुपाते थे. 

ऐसे में मॉड्यूल के पकड़े जाने के बाद एजेंसियो ने जम्मू कश्मीर के कई अस्पतालो में तलाशी अभियान भी चलाया था. घाटी के गांदरबल और कुपवाड़ा जिले के कई सरकारी अस्पतालों और उनके स्टाफ के लॉकर्स की तलाशी ली गई थी. राहत की बात रही कि कहीं पर भी जम्मू कश्मीर पुलिस या किसी अन्य एजेंसी को किसी और संदिग्ध के पास से कोई भी हथियार किसी अन्य अस्पताल में नहीं मिले.

अदील अहमद राथर के अलावा डॉक्टर मुज़म्मिल के पास से भी AK-74 रिफ़ाइल (क्रिंकोव) और पिस्टल बरामद हुई थी. अदील और मुजम्मिल ने पूछताछ में कबूला था की उसके पास हथियार मौलवी इरफान ने अंसार गजवात उल हिन्द के आतंकी की मदद से पहुचाए थे.

 

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