तेल 100 डॉलर के करीब और दिल्ली आ रहे Putin, क्या मोदी निकाल पाएंगे राहत का रास्ता?
Brics Summit 2026: Putin के दिल्ली पहुंचने से पहले रूस की कुंडली में एक बड़ा बदलाव हो चुका होगा. 8 सितंबर तक रूस पर शनि का कठोर प्रभाव था. इसके बाद बुध ने कमान संभाल ली है. यह शांति का सीधा संकेत नहीं है. यह युद्ध का मैदान छोड़कर मेज पर अपने फायदे की लड़ाई लड़ने का समय है. इसके ठीक तीन दिन बाद 11 सितंबर को प्रधानमंत्री Narendra Modi और रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin आमने-सामने बैठेंगे. मुख्य BRICS Summit 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगा. लेकिन असली कहानी सम्मेलन शुरू होने से पहले ही लिखी जा सकती है. सवाल है कि नौ महीने के भीतर दूसरी बार भारत आ रहे Putin इस बार दिल्ली को क्या देकर जाएंगे? सस्ते तेल का भरोसा, नई payment व्यवस्था या फिर केवल दोस्ती का एक और बयान? रूस और Putin की कुंडली इस सवाल का एक दिलचस्प जवाब देती है. Putin की इतनी जल्दी दूसरी भारत यात्रा क्यों अहम है? Putin पिछली बार 4 और 5 दिसंबर 2025 को भारत आए थे. Ukraine War शुरू होने के बाद वह उनकी पहली भारत यात्रा थी. प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं एयरपोर्ट पहुंचकर उनका स्वागत किया था. अब नौ महीने से कुछ अधिक समय के भीतर Putin फिर दिल्ली आ रहे हैं. इस बार हालात पहले से अधिक कठिन हैं. मध्य पूर्व में तनाव के कारण Brent crude 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुका है. महंगे तेल ने रुपये पर दबाव बढ़ाया और 9 सितंबर को भारतीय मुद्रा 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से नीचे चली गई. इसलिए Putin की यात्रा केवल BRICS की तस्वीरों तक सीमित नहीं है. इसका संबंध भारत के आयात बिल, पेट्रोल-डीजल की कीमत और आने वाले महीनों की महंगाई से भी है. 8 सितंबर को रूस की कुंडली में क्या बदला? रूस की उपलब्ध राष्ट्रीय कुंडली 12 जून 1990, दोपहर 1:41 बजे, मॉस्को के समय पर आधारित है. इसमें कन्या लग्न और मकर राशि बनती है. 8 सितंबर तक रूस पर गुरु की महादशा, शनि की अंतर्दशा और शनि की प्रत्यंतर दशा चल रही थी. अब शनि की जगह बुध की प्रत्यंतर दशा शुरू हुई है. सामान्य ज्योतिष में इसे केवल शनि गया, बुध आया कह देना आसान है. लेकिन रूस की कुंडली में यह बदलाव इससे कहीं बड़ा है. शनि पंचम और षष्ठ भाव का स्वामी है. वह अपनी मकर राशि में चंद्रमा और राहु के साथ बैठा है. षष्ठ भाव युद्ध, शत्रु, प्रतिबंध और संघर्ष दिखाता है. पंचम भाव रणनीति से जुड़ा है. शनि, राहु और चंद्रमा का यह मेल ऐसी लड़ाई का संकेत देता है जो जल्दी समाप्त नहीं होती. फैसले लंबी रणनीति के तहत लिए जाते हैं. दबाव बढ़ने पर भी सत्ता पीछे हटने से बचती है. अब सक्रिय हुआ बुध रूस के लग्न और दशम भाव का स्वामी है. लग्न देश की दिशा बताता है. दशम भाव सरकार, प्रतिष्ठा और सत्ता के फैसले दिखाता है. बुध जन्मकुंडली में वृषभ के नवम भाव में सूर्य के साथ बैठा है. नवम भाव विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय समझौते और दूरगामी रिश्तों का है. सूर्य सरकार और नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करता है. यानी रूस की दशा युद्ध समाप्त होने का वादा नहीं करती. वह तरीका बदलने का संकेत देती है. बंदूक का दबाव बना रह सकता है, लेकिन उसके साथ व्यापार, दस्तावेज, भुगतान और कूटनीति की चाल तेज होगी. BRICS Summit इसी बदलाव के चार दिन बाद हो रहा है. यह संयोग साधारण नहीं है. Putin की कुंडली में क्या चल रहा है? Putin की कुंडली 7 अक्टूबर 1952, सुबह 9:30 बजे, सेंट पीटर्सबर्ग की है. इसमें तुला लग्न और वृषभ राशि बनती है. फिलहाल Putin पर बुध की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा और शुक्र की ही प्रत्यंतर दशा चल रही है. यह चरण 8 अक्टूबर तक रहेगा. उनकी कुंडली में बुध नवम और द्वादश भाव का स्वामी होकर कन्या राशि के द्वादश भाव में मजबूत स्थिति में है. उसके साथ सूर्य और शनि भी हैं. द्वादश भाव विदेश, गोपनीय बातचीत, प्रतिबंध, खर्च और पर्दे के पीछे तैयार की जाने वाली रणनीति से जुड़ा है. मजबूत बुध बताता है कि Putin विदेशी मंच पर शब्दों का चयन बेहद सावधानी से करेंगे. वह जो सार्वजनिक रूप से कहेंगे, उससे अधिक महत्वपूर्ण वह हो सकता है जो बैठक के कमरे में तय होगा. शुक्र Putin के तुला लग्न का स्वामी है और अपनी ही राशि में बैठा है. वह उनकी negotiating position को मजबूत करता है. लेकिन शुक्र अष्टम भाव का स्वामी भी है. अष्टम भाव छिपी शर्तों, अचानक बदलाव और ऐसे समझौतों से जुड़ा है जिनकी पूरी तस्वीर शुरुआत में सामने नहीं आती. यही संकेत बताता है कि Putin भारत को कोई आकर्षक प्रस्ताव दे सकते हैं, लेकिन उसके साथ ऐसी शर्तें भी हो सकती हैं जिन्हें साझा बयान में जगह न मिले. बंद कमरे में क्या मांग सकता है रूस? भारत रूस से बेहतर तेल discount और निर्बाध आपूर्ति चाहेगा. रूस बदले में लंबे समय का खरीद भरोसा, आसान भुगतान और भारतीय बाजार तक अधिक पहुंच मांग सकता है. रक्षा क्षेत्र में Su-57 fighter jet, technology transfer और परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं पर चर्चा की संभावना बताई जा रही है. अमेरिकी प्रतिबंध और रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर बढ़ता दबाव भी बातचीत का हिस्सा बन सकता है. रूस ने BRICS Summit से पहले यह भी साफ किया है कि वह औपचारिक रूप से de-dollarisation की मुहिम नहीं चला रहा. हालांकि वह उन सभी भुगतान तरीकों के लिए तैयार है जो दोनों पक्षों को स्वीकार हों. इसका अर्थ है कि सम्मेलन में अचानक किसी BRICS Currency की घोषणा से अधिक संभावना रुपये-रूबल settlement, digital payments और बैंकों के बीच नया रास्ता बनाने की है. यही बुध का क्षेत्र है. मुद्रा, बैंक, हिसाब और दस्तावेज. भारत की कुंडली क्या कहती है? भारत की 15 अगस्त 1947 की वृषभ लग्न कुंडली में तीसरा भाव बहुत मजबूत है. सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र और शनि कर्क राशि के तीसरे भाव में हैं. मेदिनी ज्योतिष में तीसरा भाव पड़ोसी देशों, संचार, समझौते और सरकार की रणनीतिक पहल दिखाता है. भारत बात करेगा. रास्ता भी निकालेगा. लेकिन वृषभ लग्न बिना ठोस आर्थिक लाभ के जल्द फैसल
Brics Summit 2026: Putin के दिल्ली पहुंचने से पहले रूस की कुंडली में एक बड़ा बदलाव हो चुका होगा. 8 सितंबर तक रूस पर शनि का कठोर प्रभाव था. इसके बाद बुध ने कमान संभाल ली है.
यह शांति का सीधा संकेत नहीं है. यह युद्ध का मैदान छोड़कर मेज पर अपने फायदे की लड़ाई लड़ने का समय है.
इसके ठीक तीन दिन बाद 11 सितंबर को प्रधानमंत्री Narendra Modi और रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin आमने-सामने बैठेंगे. मुख्य BRICS Summit 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगा. लेकिन असली कहानी सम्मेलन शुरू होने से पहले ही लिखी जा सकती है.
सवाल है कि नौ महीने के भीतर दूसरी बार भारत आ रहे Putin इस बार दिल्ली को क्या देकर जाएंगे? सस्ते तेल का भरोसा, नई payment व्यवस्था या फिर केवल दोस्ती का एक और बयान?
रूस और Putin की कुंडली इस सवाल का एक दिलचस्प जवाब देती है.
Putin की इतनी जल्दी दूसरी भारत यात्रा क्यों अहम है?
Putin पिछली बार 4 और 5 दिसंबर 2025 को भारत आए थे. Ukraine War शुरू होने के बाद वह उनकी पहली भारत यात्रा थी. प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं एयरपोर्ट पहुंचकर उनका स्वागत किया था.
अब नौ महीने से कुछ अधिक समय के भीतर Putin फिर दिल्ली आ रहे हैं. इस बार हालात पहले से अधिक कठिन हैं.
मध्य पूर्व में तनाव के कारण Brent crude 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुका है. महंगे तेल ने रुपये पर दबाव बढ़ाया और 9 सितंबर को भारतीय मुद्रा 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से नीचे चली गई.
इसलिए Putin की यात्रा केवल BRICS की तस्वीरों तक सीमित नहीं है. इसका संबंध भारत के आयात बिल, पेट्रोल-डीजल की कीमत और आने वाले महीनों की महंगाई से भी है.
8 सितंबर को रूस की कुंडली में क्या बदला?
रूस की उपलब्ध राष्ट्रीय कुंडली 12 जून 1990, दोपहर 1:41 बजे, मॉस्को के समय पर आधारित है. इसमें कन्या लग्न और मकर राशि बनती है.
8 सितंबर तक रूस पर गुरु की महादशा, शनि की अंतर्दशा और शनि की प्रत्यंतर दशा चल रही थी. अब शनि की जगह बुध की प्रत्यंतर दशा शुरू हुई है.
सामान्य ज्योतिष में इसे केवल शनि गया, बुध आया कह देना आसान है. लेकिन रूस की कुंडली में यह बदलाव इससे कहीं बड़ा है.
शनि पंचम और षष्ठ भाव का स्वामी है. वह अपनी मकर राशि में चंद्रमा और राहु के साथ बैठा है. षष्ठ भाव युद्ध, शत्रु, प्रतिबंध और संघर्ष दिखाता है. पंचम भाव रणनीति से जुड़ा है. शनि, राहु और चंद्रमा का यह मेल ऐसी लड़ाई का संकेत देता है जो जल्दी समाप्त नहीं होती. फैसले लंबी रणनीति के तहत लिए जाते हैं. दबाव बढ़ने पर भी सत्ता पीछे हटने से बचती है.
अब सक्रिय हुआ बुध रूस के लग्न और दशम भाव का स्वामी है. लग्न देश की दिशा बताता है. दशम भाव सरकार, प्रतिष्ठा और सत्ता के फैसले दिखाता है.
बुध जन्मकुंडली में वृषभ के नवम भाव में सूर्य के साथ बैठा है. नवम भाव विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय समझौते और दूरगामी रिश्तों का है. सूर्य सरकार और नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करता है.
यानी रूस की दशा युद्ध समाप्त होने का वादा नहीं करती. वह तरीका बदलने का संकेत देती है. बंदूक का दबाव बना रह सकता है, लेकिन उसके साथ व्यापार, दस्तावेज, भुगतान और कूटनीति की चाल तेज होगी.
BRICS Summit इसी बदलाव के चार दिन बाद हो रहा है. यह संयोग साधारण नहीं है.
Putin की कुंडली में क्या चल रहा है?
Putin की कुंडली 7 अक्टूबर 1952, सुबह 9:30 बजे, सेंट पीटर्सबर्ग की है. इसमें तुला लग्न और वृषभ राशि बनती है.
फिलहाल Putin पर बुध की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा और शुक्र की ही प्रत्यंतर दशा चल रही है. यह चरण 8 अक्टूबर तक रहेगा.
उनकी कुंडली में बुध नवम और द्वादश भाव का स्वामी होकर कन्या राशि के द्वादश भाव में मजबूत स्थिति में है. उसके साथ सूर्य और शनि भी हैं.
द्वादश भाव विदेश, गोपनीय बातचीत, प्रतिबंध, खर्च और पर्दे के पीछे तैयार की जाने वाली रणनीति से जुड़ा है. मजबूत बुध बताता है कि Putin विदेशी मंच पर शब्दों का चयन बेहद सावधानी से करेंगे. वह जो सार्वजनिक रूप से कहेंगे, उससे अधिक महत्वपूर्ण वह हो सकता है जो बैठक के कमरे में तय होगा.
शुक्र Putin के तुला लग्न का स्वामी है और अपनी ही राशि में बैठा है. वह उनकी negotiating position को मजबूत करता है. लेकिन शुक्र अष्टम भाव का स्वामी भी है. अष्टम भाव छिपी शर्तों, अचानक बदलाव और ऐसे समझौतों से जुड़ा है जिनकी पूरी तस्वीर शुरुआत में सामने नहीं आती.
यही संकेत बताता है कि Putin भारत को कोई आकर्षक प्रस्ताव दे सकते हैं, लेकिन उसके साथ ऐसी शर्तें भी हो सकती हैं जिन्हें साझा बयान में जगह न मिले.
बंद कमरे में क्या मांग सकता है रूस?
भारत रूस से बेहतर तेल discount और निर्बाध आपूर्ति चाहेगा. रूस बदले में लंबे समय का खरीद भरोसा, आसान भुगतान और भारतीय बाजार तक अधिक पहुंच मांग सकता है.
रक्षा क्षेत्र में Su-57 fighter jet, technology transfer और परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं पर चर्चा की संभावना बताई जा रही है. अमेरिकी प्रतिबंध और रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर बढ़ता दबाव भी बातचीत का हिस्सा बन सकता है.
रूस ने BRICS Summit से पहले यह भी साफ किया है कि वह औपचारिक रूप से de-dollarisation की मुहिम नहीं चला रहा. हालांकि वह उन सभी भुगतान तरीकों के लिए तैयार है जो दोनों पक्षों को स्वीकार हों.
इसका अर्थ है कि सम्मेलन में अचानक किसी BRICS Currency की घोषणा से अधिक संभावना रुपये-रूबल settlement, digital payments और बैंकों के बीच नया रास्ता बनाने की है.
यही बुध का क्षेत्र है. मुद्रा, बैंक, हिसाब और दस्तावेज.
भारत की कुंडली क्या कहती है?
भारत की 15 अगस्त 1947 की वृषभ लग्न कुंडली में तीसरा भाव बहुत मजबूत है. सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र और शनि कर्क राशि के तीसरे भाव में हैं.
मेदिनी ज्योतिष में तीसरा भाव पड़ोसी देशों, संचार, समझौते और सरकार की रणनीतिक पहल दिखाता है. भारत बात करेगा. रास्ता भी निकालेगा. लेकिन वृषभ लग्न बिना ठोस आर्थिक लाभ के जल्द फैसला नहीं करता.
भारत का मंगल दूसरे भाव में है. दूसरा भाव राष्ट्रीय खजाने और आर्थिक संसाधनों का होता है. इसलिए दिल्ली की प्राथमिकता केवल Putin के साथ राजनीतिक निकटता दिखाना नहीं होगी. भारत यह देखेगा कि सौदे से विदेशी मुद्रा की बचत कितनी होगी और ऊर्जा सुरक्षा को कितना लाभ मिलेगा.
यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी एक तरफ Putin से युद्ध समाप्त करने की अपील कर सकते हैं और दूसरी तरफ रूसी तेल खरीद जारी रखने के पक्ष में खड़े रह सकते हैं. विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले ही कह चुके हैं कि भारत के रूसी तेल खरीदना बंद कर देने से युद्ध समाप्त नहीं होगा.
11 सितंबर का पंचांग क्या संकेत देता है?
नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार 11 सितंबर शुक्रवार है. चंद्रमा सुबह सिंह से निकलकर कन्या राशि और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश करेगा.
कन्या राशि का स्वामी बुध है. उसी समय रूस की कुंडली में बुध की प्रत्यंतर दशा शुरू हो चुकी होगी और Putin की बुध महादशा भी चल रही होगी.
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र को करार, साझेदारी और पहले से बने संबंध को औपचारिक रूप देने से जोड़ा जाता है. इसलिए दिन की ग्रहस्थिति किसी पुराने साझेदार के साथ नई शर्तें तय करने के अनुकूल मानी जा सकती है.
लेकिन यहां एक सावधानी जरूरी है. मुलाकात का आधिकारिक समय सामने आए बिना सटीक event chart नहीं बनाया जा सकता. दिल्ली में राहुकाल सुबह 11:30 से दोपहर 1:04 बजे तक रहेगा. बैठक इसी अवधि में हुई तो घोषणा और उसके वास्तविक परिणाम में अंतर देखने को मिल सकता है.
End of War या नया आर्थिक सौदा?
SCO Summit में मोदी ने Putin से endless war को end of war की ओर ले जाने की बात कही थी. इसके बाद 8 सितंबर को Donald Trump और Putin की फोन पर बातचीत हुई. शांति की बात आगे बढ़ी, लेकिन युद्धविराम का कोई ठोस फैसला नहीं हुआ.
कुंडलियां भी तुरंत युद्ध समाप्त होने का संकेत नहीं देतीं. रूस का मजबूत शनि अपनी रणनीतिक स्थिति छोड़ने के लिए तैयार नहीं है. लेकिन बुध का नया चरण बातचीत को तेज कर सकता है.
इसलिए 11 सितंबर की असली खबर यह नहीं होगी कि मोदी और Putin ने कितनी गर्मजोशी से हाथ मिलाया. नजर साझा बयान के उन शब्दों पर रखनी होगी जिनमें energy supply, long-term contract, local currency, banking channel या peace initiative का उल्लेख हो.
अगर इनमें से किसी पर ठोस घोषणा होती है तो माना जा सकता है कि रूस की बदली दशा ने मैदान की लड़ाई को सौदेबाजी की मेज तक पहुंचाना शुरू कर दिया है.
और यदि केवल दोस्ती की तस्वीरें सामने आती हैं, तो समझना होगा कि Putin ने अपने असली पत्ते अभी नहीं खोले हैं.
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