छोटे बच्चों के गले में खाना अटके तो क्या करें, जानें कब होती है डॉक्टर की जरूरत
दूध से सॉलिड फूड की तरफ बढ़ना बच्चों की ग्रोथ का एक बहुत जरूरी पड़ाव होता है. लेकिन यही समय कई बार माता-पिता के लिए सबसे ज्यादा तनाव भरा भी होता है. जैसे ही बच्चा खाना खाते समय खांसता है, अजीब आवाज निकालता है या मुंह बनाता है तो पेरेंट्स को लगता है कि कहीं बच्चा चोक तो नहीं हो गया है. इसे लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर बार खांसी या उबकाई आना चोकिंग नहीं होता है. कई बार यह सिर्फ डेटिंग होती है जो शरीर की एक नॉर्मल और सुरक्षा देने वाली प्रतिक्रिया होती है. इस बारे में एक्सपर्ट्स बताते हैं कि गैगिंग और चोकिंग में फर्क समझना बहुत जरूरी है. सही पहचान से पेरेंट्स बेवजह की घबराहट से बच सकते हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत सही स्टेप्स भी उठा सकते हैं. क्या होती है गैगिंग?गैगिंग शरीर का नेचुरल डिफेंस मेकैनिज्म होता है. जब बच्चा सॉलिड फूड लेना सीख रहा होता है तो यह रिफ्लेक्स खाने को गले में नीचे जाने से पहले ही बाहर की ओर धकेलने में मदद करता है. गैगिंग के दौरान बच्चों में जोर से खांसना, आवाज के साथ उबकाई आना, आंखों से पानी आना, चेहरा लाल होना और जीभ बाहर बाहर की ओर आना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. डॉक्टर के अनुसार भले ही यह लक्षण डरावने लगें, लेकिन ज्यादातर मामलों में बच्चा खुद ही इसे संभाल लेता है. ऐसे समय में माता-पिता को घबराकर बच्चों के मुंह में उंगली नहीं डालनी चाहिए, क्योंकि इससे खाना और अंदर जा सकता है. क्या होती है चोकिंग?चोकिंग एक गंभीर कंडीशन है. यह तब होती है, जब कोई चीज बच्चों की सांस की नली को ब्लॉक कर देती है और वह ठीक से सांस नहीं ले पता है. चोकिंग के लक्षण आमतौर पर गैगिंग से अलग होते हैं. चोकिंग के लक्षणों में बच्चा रो या खास नहीं पाता, सांस लेने में दिक्कत होती है, स्किन नीली या पीली पड़ने लगती है, आवाज नहीं निकलती है और घबराहट भरा चेहरा हो जाता है. ऐसे में अगर बच्चा आवाज नहीं निकल पा रहा है या सांस नहीं ले पा रहा है तो यह मेडिकल इमरजेंसी हो सकती हैं. अगर बच्चा चोक कर जाए तो क्या करें?अगर 1 साल से कम उम्र का बच्चा चोक जाए तो बच्चे को अपने हाथ पर उल्टा लेटाएं. इसके बाद सिर को और गर्दन को सपोर्ट दें. वहीं कंधों के बीच पांच बार हल्के बैक ब्लो दें. अगर चीज बाहर न निकले तो बच्चे को पलटकर पांच चेस्ट थ्रस्ट दें और जरूरत पड़ने पर इन स्टेप्स को दोहराएं और तुरंत डॉक्टर को चेक कराएं. साथ ही डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि पेरेंट्स को बच्चों के लिए सीपीआर और चोकिंग फर्स्ट एड की ट्रेनिंग जरूर लेनी चाहिए. वहीं खाने के दौरान बच्चों में चोकिंग का खतरा कम करने के लिए बच्चों को हमेशा सीधा बैठाकर खिलाए, खाना खाते समय निगरानी रखें, साबुत अंगूर, नट्स, हार्ड कैंडी या मीट जैसी चीजें बच्चे को छोटे और नरम टुकड़ों में दें. बच्चे की उम्र के अनुसार खाने का टेक्सचर रखें वहीं लेटे हुए बच्चे को कभी भी खाना न खिलाएं. डॉक्टर के अनुसार जब बच्चा सॉलि़ड फूड शुरू करता है, तो वह चबाना, खाना मुंह में घूमना और सुरक्षित तरीके से निगलना सीख रहा होता है. इस दौरान गैगिंग आम होती है. इसे लेकर डॉक्टरों का कहना है कि सही जानकारी होने पर पेरेंट्स नॉर्मल रह सकते हैं. वहींं किसी भी पेरेंट्स के लिए चोकिंग के लक्षण पहचाना जीवन बचाने वाला कदम भी साबित हो सकता है. ये भी पढ़ें-क्या होती है वैजिनोप्लास्टी, जिसे कराने जा रहीं अनाया बांगर?
दूध से सॉलिड फूड की तरफ बढ़ना बच्चों की ग्रोथ का एक बहुत जरूरी पड़ाव होता है. लेकिन यही समय कई बार माता-पिता के लिए सबसे ज्यादा तनाव भरा भी होता है. जैसे ही बच्चा खाना खाते समय खांसता है, अजीब आवाज निकालता है या मुंह बनाता है तो पेरेंट्स को लगता है कि कहीं बच्चा चोक तो नहीं हो गया है. इसे लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर बार खांसी या उबकाई आना चोकिंग नहीं होता है.
कई बार यह सिर्फ डेटिंग होती है जो शरीर की एक नॉर्मल और सुरक्षा देने वाली प्रतिक्रिया होती है. इस बारे में एक्सपर्ट्स बताते हैं कि गैगिंग और चोकिंग में फर्क समझना बहुत जरूरी है. सही पहचान से पेरेंट्स बेवजह की घबराहट से बच सकते हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत सही स्टेप्स भी उठा सकते हैं.
क्या होती है गैगिंग?
गैगिंग शरीर का नेचुरल डिफेंस मेकैनिज्म होता है. जब बच्चा सॉलिड फूड लेना सीख रहा होता है तो यह रिफ्लेक्स खाने को गले में नीचे जाने से पहले ही बाहर की ओर धकेलने में मदद करता है. गैगिंग के दौरान बच्चों में जोर से खांसना, आवाज के साथ उबकाई आना, आंखों से पानी आना, चेहरा लाल होना और जीभ बाहर बाहर की ओर आना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. डॉक्टर के अनुसार भले ही यह लक्षण डरावने लगें, लेकिन ज्यादातर मामलों में बच्चा खुद ही इसे संभाल लेता है. ऐसे समय में माता-पिता को घबराकर बच्चों के मुंह में उंगली नहीं डालनी चाहिए, क्योंकि इससे खाना और अंदर जा सकता है.
क्या होती है चोकिंग?
चोकिंग एक गंभीर कंडीशन है. यह तब होती है, जब कोई चीज बच्चों की सांस की नली को ब्लॉक कर देती है और वह ठीक से सांस नहीं ले पता है. चोकिंग के लक्षण आमतौर पर गैगिंग से अलग होते हैं. चोकिंग के लक्षणों में बच्चा रो या खास नहीं पाता, सांस लेने में दिक्कत होती है, स्किन नीली या पीली पड़ने लगती है, आवाज नहीं निकलती है और घबराहट भरा चेहरा हो जाता है. ऐसे में अगर बच्चा आवाज नहीं निकल पा रहा है या सांस नहीं ले पा रहा है तो यह मेडिकल इमरजेंसी हो सकती हैं.
अगर बच्चा चोक कर जाए तो क्या करें?
अगर 1 साल से कम उम्र का बच्चा चोक जाए तो बच्चे को अपने हाथ पर उल्टा लेटाएं. इसके बाद सिर को और गर्दन को सपोर्ट दें. वहीं कंधों के बीच पांच बार हल्के बैक ब्लो दें. अगर चीज बाहर न निकले तो बच्चे को पलटकर पांच चेस्ट थ्रस्ट दें और जरूरत पड़ने पर इन स्टेप्स को दोहराएं और तुरंत डॉक्टर को चेक कराएं. साथ ही डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि पेरेंट्स को बच्चों के लिए सीपीआर और चोकिंग फर्स्ट एड की ट्रेनिंग जरूर लेनी चाहिए. वहीं खाने के दौरान बच्चों में चोकिंग का खतरा कम करने के लिए बच्चों को हमेशा सीधा बैठाकर खिलाए, खाना खाते समय निगरानी रखें, साबुत अंगूर, नट्स, हार्ड कैंडी या मीट जैसी चीजें बच्चे को छोटे और नरम टुकड़ों में दें. बच्चे की उम्र के अनुसार खाने का टेक्सचर रखें वहीं लेटे हुए बच्चे को कभी भी खाना न खिलाएं. डॉक्टर के अनुसार जब बच्चा सॉलि़ड फूड शुरू करता है, तो वह चबाना, खाना मुंह में घूमना और सुरक्षित तरीके से निगलना सीख रहा होता है. इस दौरान गैगिंग आम होती है. इसे लेकर डॉक्टरों का कहना है कि सही जानकारी होने पर पेरेंट्स नॉर्मल रह सकते हैं. वहींं किसी भी पेरेंट्स के लिए चोकिंग के लक्षण पहचाना जीवन बचाने वाला कदम भी साबित हो सकता है.
ये भी पढ़ें-क्या होती है वैजिनोप्लास्टी, जिसे कराने जा रहीं अनाया बांगर?
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