कौन हैं पाकिस्तान को धूल चटा देने वालीं क्रांति गौड़? जानिए उनकी एजुकेशन
भारत की नई सनसनी बन चुकीं गेंदबाज क्रांति गौड़ ने पाकिस्तान के खिलाफ महिला वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन कर सबका दिल जीत लिया है. इस युवा खिलाड़ी ने अपनी धारदार गेंदबाजी से पाकिस्तान को पस्त कर दिया. उन्होंने सिर्फ 20 रन देकर 3 विकेट झटके और भारत को 88 रनों की बड़ी जीत दिलाई. आइए जानते हैं उनकी एजुकेशन और कैसे वह यहां तक पहुंचीं... क्रांति गौड़ मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के पास स्थित घुवारा गांव की रहने वाली हैं. यह वही इलाका है जो अपने मंदिरों के लिए प्रसिद्ध खजुराहो के करीब है. गांव की सड़कों से वर्ल्ड कप के मैदान तक पहुंचने का सफर क्रांति के लिए किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा. वह छह भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं. उनके पिता पुलिस विभाग में कांस्टेबल थे, लेकिन आर्थिक तंगी और पारिवारिक मुश्किलों के बीच क्रांति का क्रिकेट खेलना आसान नहीं था. एजुकेशन छूट गई, पर सपना नहीं क्रांति की पढ़ाई क्लास 8 के बाद ही रुक गई, क्योंकि घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी. उनके पिता की नौकरी चली गई थी, और उस वक्त उनकी मां ने अपनी ज्वेलरी बेचकर बेटी का क्रिकेट सपना जिंदा रखा. कोच ने बनाया दिशा और दिया सहारा रिपोर्ट्स के अनुसार क्रांति की जिंदगी में बड़ा मोड़ आया जब उनके पिता उन्हें कोच राजीव बिल्थारे के पास लेकर गए. राजीव जो छतरपुर जिला क्रिकेट संघ के सचिव भी हैं, ने पहली ही नजर में क्रांति की गेंदबाजी देखकर कहा था इस लड़की में कुछ अलग बात है. राजीव ने न केवल उनकी कोचिंग फ्री में कराई, बल्कि उन्हें जूते, बैट और रहने की जगह भी दी. डब्ल्यूपीएल ने बदली जिंदगी क्रांति गौड़ की किस्मत का पन्ना महिला प्रीमियर लीग (WPL) में पलटा. कुछ समय तक वह मुंबई इंडियंस टीम के लिए नेट बॉलर रहीं. उनकी प्रतिभा देखकर यूपी वारियर्स ने उन्हें 10 लाख रुपये के बेस प्राइस पर अपनी टीम में शामिल कर लिया. यह भी पढ़ें: C-DAC में निकली 100 से ज्यादा पदों पर भर्ती, बिना परीक्षा होगा सिलेक्शन; तगड़ी मिलेगी सैलरी
भारत की नई सनसनी बन चुकीं गेंदबाज क्रांति गौड़ ने पाकिस्तान के खिलाफ महिला वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन कर सबका दिल जीत लिया है. इस युवा खिलाड़ी ने अपनी धारदार गेंदबाजी से पाकिस्तान को पस्त कर दिया. उन्होंने सिर्फ 20 रन देकर 3 विकेट झटके और भारत को 88 रनों की बड़ी जीत दिलाई. आइए जानते हैं उनकी एजुकेशन और कैसे वह यहां तक पहुंचीं...
क्रांति गौड़ मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के पास स्थित घुवारा गांव की रहने वाली हैं. यह वही इलाका है जो अपने मंदिरों के लिए प्रसिद्ध खजुराहो के करीब है. गांव की सड़कों से वर्ल्ड कप के मैदान तक पहुंचने का सफर क्रांति के लिए किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा. वह छह भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं. उनके पिता पुलिस विभाग में कांस्टेबल थे, लेकिन आर्थिक तंगी और पारिवारिक मुश्किलों के बीच क्रांति का क्रिकेट खेलना आसान नहीं था.
एजुकेशन छूट गई, पर सपना नहीं
क्रांति की पढ़ाई क्लास 8 के बाद ही रुक गई, क्योंकि घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी. उनके पिता की नौकरी चली गई थी, और उस वक्त उनकी मां ने अपनी ज्वेलरी बेचकर बेटी का क्रिकेट सपना जिंदा रखा.
कोच ने बनाया दिशा और दिया सहारा
रिपोर्ट्स के अनुसार क्रांति की जिंदगी में बड़ा मोड़ आया जब उनके पिता उन्हें कोच राजीव बिल्थारे के पास लेकर गए. राजीव जो छतरपुर जिला क्रिकेट संघ के सचिव भी हैं, ने पहली ही नजर में क्रांति की गेंदबाजी देखकर कहा था इस लड़की में कुछ अलग बात है. राजीव ने न केवल उनकी कोचिंग फ्री में कराई, बल्कि उन्हें जूते, बैट और रहने की जगह भी दी.
डब्ल्यूपीएल ने बदली जिंदगी
क्रांति गौड़ की किस्मत का पन्ना महिला प्रीमियर लीग (WPL) में पलटा. कुछ समय तक वह मुंबई इंडियंस टीम के लिए नेट बॉलर रहीं. उनकी प्रतिभा देखकर यूपी वारियर्स ने उन्हें 10 लाख रुपये के बेस प्राइस पर अपनी टीम में शामिल कर लिया.
यह भी पढ़ें: C-DAC में निकली 100 से ज्यादा पदों पर भर्ती, बिना परीक्षा होगा सिलेक्शन; तगड़ी मिलेगी सैलरी
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