किस स्तर के अधिकारी को बनाया जाता है पुलिस ऑब्जर्वर, कितना मिलता है एक्स्ट्रा पैसा?

चुनाव का समय आते ही प्रशासन की जिम्मेदारियां कई गुना बढ़ जाती हैं. हर वोट सुरक्षित पड़े, माहौल शांत रहे और किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो. इसके लिए चुनाव आयोग कई खास इंतजाम करता है. इन्हीं इंतजामों में एक अहम भूमिका होती है पुलिस ऑब्जर्वर की. हाल ही में पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में मतदान से ठीक 48 घंटे पहले पुलिस ऑब्जर्वर को बदले जाने की खबर ने इस पद को फिर चर्चा में ला दिया. तृणमूल कांग्रेस ने स्थानीय पुलिस अधिकारी पर पक्षपात के आरोप लगाए थे, जिसके बाद चुनाव आयोग ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ऑब्जर्वर बदलने का फैसला लिया. इस घटना के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा कि आखिर पुलिस ऑब्जर्वर होता कौन है, किस स्तर का अधिकारी इस जिम्मेदारी के लिए चुना जाता है और क्या उसे इसके लिए अलग से पैसा मिलता है. दरअसल, पुलिस ऑब्जर्वर भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS का वरिष्ठ अधिकारी होता है, जिसे चुनाव आयोग किसी खास विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र में तैनात करता है. उसका मुख्य काम होता है उस क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती, कानून व्यवस्था की स्थिति और चुनाव से जुड़े सुरक्षा इंतजामों पर नजर रखना. वह सिविल प्रशासन और पुलिस प्रशासन के बीच तालमेल बनाकर काम करता है ताकि मतदान पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण हो सके. यह अधिकारी सीधे चुनाव आयोग को रिपोर्ट करता है, इसलिए वह स्थानीय दबाव से मुक्त रहकर काम कर सकता है. किसे बनाया जाता है पुलिस ऑब्जर्वर? आमतौर पर एसपी यानी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस स्तर या उससे ऊपर के रैंक के IPS अधिकारियों को पुलिस ऑब्जर्वर बनाया जाता है. कई बार संवेदनशील इलाकों में डीआईजी या आईजी रैंक के अधिकारी भी इस भूमिका में तैनात किए जाते हैं. चुनाव आयोग ऐसे अफसरों को चुनता है जिनकी छवि साफ हो और जिनका पिछला रिकॉर्ड निष्पक्ष काम का रहा हो. यही वजह है कि इस पद पर अनुभवी और भरोसेमंद अधिकारियों की तैनाती की जाती है. क्या होती है जिम्मेदारी? पुलिस ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी सिर्फ पुलिस बल की निगरानी तक सीमित नहीं होती. उसे संवेदनशील बूथों की पहचान करनी होती है, केंद्रीय सुरक्षा बल की तैनाती पर नजर रखनी होती है, शिकायत मिलने पर तुरंत रिपोर्ट तैयार करनी होती है और चुनाव आयोग को नियमित जानकारी देनी होती है. मतदान के दिन वह खास तौर पर कानून व्यवस्था पर नजर रखता है. अगर कहीं गड़बड़ी की आशंका हो, तो वह तुरंत कार्रवाई की सिफारिश भी कर सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चुनाव ड्यूटी पर तैनात किए जाने पर अधिकारी को चुनाव भत्ता दिया जाता है. इसमें एक माह की बेसिक पे के साथ-साथ यात्रा भत्ता, ठहरने की सुविधा या उसका खर्च और अन्य जरूरी सुविधाएं शामिल होती हैं. यह भी पढ़ें- CBSE Class 12th Result 2026: CBSE बोर्ड कब जारी करेगा 12वीं के नतीजे? इन तरीकों से चेक कर सकेंगे रिजल्ट

Apr 23, 2026 - 09:30
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किस स्तर के अधिकारी को बनाया जाता है पुलिस ऑब्जर्वर, कितना मिलता है एक्स्ट्रा पैसा?

चुनाव का समय आते ही प्रशासन की जिम्मेदारियां कई गुना बढ़ जाती हैं. हर वोट सुरक्षित पड़े, माहौल शांत रहे और किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो. इसके लिए चुनाव आयोग कई खास इंतजाम करता है. इन्हीं इंतजामों में एक अहम भूमिका होती है पुलिस ऑब्जर्वर की. हाल ही में पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में मतदान से ठीक 48 घंटे पहले पुलिस ऑब्जर्वर को बदले जाने की खबर ने इस पद को फिर चर्चा में ला दिया.

तृणमूल कांग्रेस ने स्थानीय पुलिस अधिकारी पर पक्षपात के आरोप लगाए थे, जिसके बाद चुनाव आयोग ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ऑब्जर्वर बदलने का फैसला लिया. इस घटना के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा कि आखिर पुलिस ऑब्जर्वर होता कौन है, किस स्तर का अधिकारी इस जिम्मेदारी के लिए चुना जाता है और क्या उसे इसके लिए अलग से पैसा मिलता है.

दरअसल, पुलिस ऑब्जर्वर भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS का वरिष्ठ अधिकारी होता है, जिसे चुनाव आयोग किसी खास विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र में तैनात करता है. उसका मुख्य काम होता है उस क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती, कानून व्यवस्था की स्थिति और चुनाव से जुड़े सुरक्षा इंतजामों पर नजर रखना. वह सिविल प्रशासन और पुलिस प्रशासन के बीच तालमेल बनाकर काम करता है ताकि मतदान पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण हो सके. यह अधिकारी सीधे चुनाव आयोग को रिपोर्ट करता है, इसलिए वह स्थानीय दबाव से मुक्त रहकर काम कर सकता है.

किसे बनाया जाता है पुलिस ऑब्जर्वर?

आमतौर पर एसपी यानी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस स्तर या उससे ऊपर के रैंक के IPS अधिकारियों को पुलिस ऑब्जर्वर बनाया जाता है. कई बार संवेदनशील इलाकों में डीआईजी या आईजी रैंक के अधिकारी भी इस भूमिका में तैनात किए जाते हैं. चुनाव आयोग ऐसे अफसरों को चुनता है जिनकी छवि साफ हो और जिनका पिछला रिकॉर्ड निष्पक्ष काम का रहा हो. यही वजह है कि इस पद पर अनुभवी और भरोसेमंद अधिकारियों की तैनाती की जाती है.

क्या होती है जिम्मेदारी?

पुलिस ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी सिर्फ पुलिस बल की निगरानी तक सीमित नहीं होती. उसे संवेदनशील बूथों की पहचान करनी होती है, केंद्रीय सुरक्षा बल की तैनाती पर नजर रखनी होती है, शिकायत मिलने पर तुरंत रिपोर्ट तैयार करनी होती है और चुनाव आयोग को नियमित जानकारी देनी होती है. मतदान के दिन वह खास तौर पर कानून व्यवस्था पर नजर रखता है. अगर कहीं गड़बड़ी की आशंका हो, तो वह तुरंत कार्रवाई की सिफारिश भी कर सकता है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चुनाव ड्यूटी पर तैनात किए जाने पर अधिकारी को चुनाव भत्ता दिया जाता है. इसमें एक माह की बेसिक पे के साथ-साथ यात्रा भत्ता, ठहरने की सुविधा या उसका खर्च और अन्य जरूरी सुविधाएं शामिल होती हैं.

यह भी पढ़ें- CBSE Class 12th Result 2026: CBSE बोर्ड कब जारी करेगा 12वीं के नतीजे? इन तरीकों से चेक कर सकेंगे रिजल्ट

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