कितने दिन में बदल देना चाहिए बर्तन धोने वाला झाबा, जानें इससे किन बीमारियों का खतरा?

हम सभी अपने घर की साफ-सफाई को लेकर काफी अलर्ट रहते हैं. खासतौर पर रसोईघर, जहां रोजाना खाना बनता है और पूरा परिवार उसी पर निर्भर करता है. बर्तन साफ करने से लेकर किचन स्लैब, गैस चूल्हा और मसाले रखने के डिब्बों तक हर जगह हम स्पंज या झाबे का यूज करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो चीज बर्तनों को साफ करती है, वही अगर खुद गंदी हो जाए तो क्या होगा. अक्सर लोग महीनों तक एक ही झाबे या स्पंज का इस्तेमाल करते रहते हैं, बिना यह जाने कि यह आदत उनकी सेहत के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है. देखने में छोटा-सा स्पंज असल में बैक्टीरिया का घर बन सकता है और अनजाने में कई बीमारियों को न्योता दे सकता है. तो आइए जानते हैं कि बर्तन धोने वाला झाबा कितने दिन में बदल देना चाहिए इससे किन बीमारियों का खतरा होता है. बर्तन धोने वाला झाबा क्यों बन जाता है बैक्टीरिया का अड्डा? बर्तन धोने वाला स्पंज या झाबा ज्यादातर समय गीला रहता है. दिन में 2-3 बार इस्तेमाल होने की वजह से उसे सूखने का मौका ही नहीं मिलता, स्पंज के छोटे-छोटे छिद्रों में खाने के कण फंस जाते हैं. नमी और गंदगी बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे सही माहौल बनाती है.समय के साथ इसमें खतरनाक कीटाणु तेजी से बढ़ने लगते हैं. यही कारण है कि गंदा स्पंज टॉयलेट सीट से भी ज्यादा बैक्टीरिया वाला हो सकता है. शोधों के अनुसार, पुराने और गंदे किचन स्पंज में E. coli और Salmonella जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए जा सकते हैं. ये बैक्टीरिया शरीर में फूड पॉइजनिंग, दस्त और उल्टी, पेट में तेज दर्द, आंतों में संक्रमण समस्याएं पैदा कर सकते हैं. जब आप उसी स्पंज से बर्तन धोते हैं, तो बैक्टीरिया बर्तनों के जरिए खाने में पहुंच सकते हैं. अगर स्पंज को लंबे समय तक नहीं बदला जाए, तो उसमें फफूंद लगने लगती है, अजीब और तेज बदबू आने लगती है, बर्तन साफ होने की बजाय और ज्यादा गंदे हो सकते हैं.  कितने दिन में बदल देना चाहिए बर्तन धोने वाला झाबा? विशेषज्ञों की मानें तो हर 7 से 10 दिन में स्पंज या झाबा बदल देना चाहिए. अगर रोज बहुत ज्यादा बर्तन धोते हैं, तो 7 दिन में जरूर बदलें. कम यूज होने पर भी 2 हफ्ते से ज्यादा न रखें. पुराना स्पंज साफ दिखे, फिर भी उसमें बैक्टीरिया हो सकते हैं, इसलिए सिर्फ देखने पर भरोसा न करें.  गंदे स्पंज से होने वाली बीमारियां लंबे समय तक एक ही झाबे का इस्तेमाल करने से फूड पॉइजनिंग, पेट का संक्रमण, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्शन, स्किन एलर्जी और चकत्ते, फंगल इंफेक्शन बीमारियां हो सकती हैं. बैक्टीरिया हाथों के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे पूरा परिवार बीमार पड़ सकता है. अगर आपके किचन में स्पंज से बदबू आना, रंग का बदल जाना, झाबे का फट जाना, बहुत ज्यादा नरम या चिपचिपा हो जाना ये लक्षण दिखें, तो तुरंत बदल दें.  स्पंज को साफ रखने के आसान तरीके अगर आप स्पंज का रोज यूज करते हैं, तो उसे कीटाणुमुक्त करना जरूरी है. इसलिए हर 2-3 दिन में स्पंज को गर्म पानी और सिरके में 5-10 मिनट भिगो दें. गीले स्पंज को 1 मिनट के लिए माइक्रोवेव में रखें, इससे बैक्टीरिया मर जाते हैं. स्पंज को अच्छी तरह निचोड़ कर सूखी जगह पर रखें. वहीं स्पंज से बेहतर ऑप्शन सिलिकॉन ब्रश और स्टील स्क्रब है. ये ज्यादा समय तक चलते हैं और इन्हें साफ करना भी आसान होता है.  यह भी पढ़ें: Zakir Khan Health: किन लोगों को होती है जाकिर खान वाली बीमारी, कैसे दिखते हैं इसके लक्षण? Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Jan 30, 2026 - 09:30
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कितने दिन में बदल देना चाहिए बर्तन धोने वाला झाबा, जानें इससे किन बीमारियों का खतरा?

हम सभी अपने घर की साफ-सफाई को लेकर काफी अलर्ट रहते हैं. खासतौर पर रसोईघर, जहां रोजाना खाना बनता है और पूरा परिवार उसी पर निर्भर करता है. बर्तन साफ करने से लेकर किचन स्लैब, गैस चूल्हा और मसाले रखने के डिब्बों तक हर जगह हम स्पंज या झाबे का यूज करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो चीज बर्तनों को साफ करती है, वही अगर खुद गंदी हो जाए तो क्या होगा. अक्सर लोग महीनों तक एक ही झाबे या स्पंज का इस्तेमाल करते रहते हैं, बिना यह जाने कि यह आदत उनकी सेहत के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है. देखने में छोटा-सा स्पंज असल में बैक्टीरिया का घर बन सकता है और अनजाने में कई बीमारियों को न्योता दे सकता है. तो आइए जानते हैं कि बर्तन धोने वाला झाबा कितने दिन में बदल देना चाहिए इससे किन बीमारियों का खतरा होता है.

बर्तन धोने वाला झाबा क्यों बन जाता है बैक्टीरिया का अड्डा?

बर्तन धोने वाला स्पंज या झाबा ज्यादातर समय गीला रहता है. दिन में 2-3 बार इस्तेमाल होने की वजह से उसे सूखने का मौका ही नहीं मिलता, स्पंज के छोटे-छोटे छिद्रों में खाने के कण फंस जाते हैं. नमी और गंदगी बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे सही माहौल बनाती है.समय के साथ इसमें खतरनाक कीटाणु तेजी से बढ़ने लगते हैं. यही कारण है कि गंदा स्पंज टॉयलेट सीट से भी ज्यादा बैक्टीरिया वाला हो सकता है. शोधों के अनुसार, पुराने और गंदे किचन स्पंज में E. coli और Salmonella जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए जा सकते हैं.

ये बैक्टीरिया शरीर में फूड पॉइजनिंग, दस्त और उल्टी, पेट में तेज दर्द, आंतों में संक्रमण समस्याएं पैदा कर सकते हैं. जब आप उसी स्पंज से बर्तन धोते हैं, तो बैक्टीरिया बर्तनों के जरिए खाने में पहुंच सकते हैं. अगर स्पंज को लंबे समय तक नहीं बदला जाए, तो उसमें फफूंद लगने लगती है, अजीब और तेज बदबू आने लगती है, बर्तन साफ होने की बजाय और ज्यादा गंदे हो सकते हैं. 

कितने दिन में बदल देना चाहिए बर्तन धोने वाला झाबा?

विशेषज्ञों की मानें तो हर 7 से 10 दिन में स्पंज या झाबा बदल देना चाहिए. अगर रोज बहुत ज्यादा बर्तन धोते हैं, तो 7 दिन में जरूर बदलें. कम यूज होने पर भी 2 हफ्ते से ज्यादा न रखें. पुराना स्पंज साफ दिखे, फिर भी उसमें बैक्टीरिया हो सकते हैं, इसलिए सिर्फ देखने पर भरोसा न करें. 

गंदे स्पंज से होने वाली बीमारियां

लंबे समय तक एक ही झाबे का इस्तेमाल करने से फूड पॉइजनिंग, पेट का संक्रमण, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्शन, स्किन एलर्जी और चकत्ते, फंगल इंफेक्शन बीमारियां हो सकती हैं. बैक्टीरिया हाथों के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे पूरा परिवार बीमार पड़ सकता है. अगर आपके किचन में स्पंज से बदबू आना, रंग का बदल जाना, झाबे का फट जाना, बहुत ज्यादा नरम या चिपचिपा हो जाना ये लक्षण दिखें, तो तुरंत बदल दें. 

स्पंज को साफ रखने के आसान तरीके

अगर आप स्पंज का रोज यूज करते हैं, तो उसे कीटाणुमुक्त करना जरूरी है. इसलिए हर 2-3 दिन में स्पंज को गर्म पानी और सिरके में 5-10 मिनट भिगो दें. गीले स्पंज को 1 मिनट के लिए माइक्रोवेव में रखें, इससे बैक्टीरिया मर जाते हैं. स्पंज को अच्छी तरह निचोड़ कर सूखी जगह पर रखें. वहीं स्पंज से बेहतर ऑप्शन सिलिकॉन ब्रश और स्टील स्क्रब है. ये ज्यादा समय तक चलते हैं और इन्हें साफ करना भी आसान होता है. 

यह भी पढ़ें: Zakir Khan Health: किन लोगों को होती है जाकिर खान वाली बीमारी, कैसे दिखते हैं इसके लक्षण?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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