ऑटो चलाकर पिता ने पढ़ाया, दिव्यांग बेटे ने IIT Madras पहुंच रचा इतिहास
हमारे आसपास कई ऐसी कहानियां होती हैं, जिसमें कुछ लोग अपनी कमजोरी को ही अपनी ताकत बना लेते हैं. ऐसी ही एक कहानी जे संतोष की भी है. 90 प्रतिशत स्पाइनल मस्कुलर डिसेबिलिटी और जन्म से सेरेब्रल पाल्सी के साथ जन्मे 17 साल के संतोष ने कुछ ऐसा कर दिखाया, जो लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गया. संतोष ने IIT मद्रास के बीएस एप्लीकेशन प्रोग्राम में एडमिशन लेकर इतिहास रच दिया है. खास बात यह है कि पिछले साल संतोष स्कूल की उस ट्रिप में नहीं जा सके, जहां उनकी पूरी क्लास आईआईटी मद्रास घूमने गई थी. अब एक साल बाद वही आईआईटी मद्रास उनकी मंजिल बन गया है. उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह एक साधारण ऑटो चालक की चालक के बेटे हैं और अपनी कमजोरी को उन्होंने अपने सपनों के बीच नहीं आने दिया. पढ़ाई के जज्बे ने बढ़ाया आगे आईआईटी मद्रास में एडमिशन लेने वाले संतोष ने बताया कि वह ऐसा कोर्स करना चाहते थे, जिसकी पढ़ाई घर से संभव हो. उनके लिए इंजीनियरिंग कोर्स मुश्किल था, क्योंकि उसमें नियमित रूप से कॉलेज में उपस्थित रहना पड़ता है. जबकि कॉरेस्पोंडेंस कोर्स में खर्च ज्यादा आता है. इसी दौरान पिछले साल एनजीओ टीएन वॉलंटियर्स के लोग उनके स्कूल पहुंचे और उन्हें आईआईटी मद्रास के इस बीएस प्रोग्राम के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद संतोष ने इस कोर्स में एडमिशन लेने की तैयारी शुरू की. पहली कोशिश में नहीं मिली थी सफलता ्र IIT मद्रास में दाखिले की पहली कोशिश में वह क्वालीफायर पास नहीं कर पाए थे. इसके बाद दूसरी तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं था. इसके बावजूद उन्होंने दोबारा प्रयास किया और इस बार क्वालीफायर परीक्षा पास कर ली. संतोष अब डिग्री पूरी करने के बाद आईटी सेक्टर में काम करना चाहते हैं. अब इसी महीने के तीसरे सप्ताह में वह इस 4 साल के कोर्स की पढ़ाई शुरू कर देंगे. खास बात यह है कि संतोष के पिता ऑटो ड्राइवर हैं और उन्होंने ऐसा कोर्स चुना, जिससे वह काफी हद तक घर से रहकर इसे पूरा कर सकते हैं. Dreams don’t always follow an easy path — but determination can take you where you aspire to be. As reported in The Times of India, 17-year-old J Santhosh, who has 90% spinal muscular disability and cerebral palsy since birth, has secured admission to IIT Madras’ four-year BS… pic.twitter.com/y89tCIqJRL — IIT Madras (@iitmadras) September 2, 2026 ये भी पढ़ें-यूपी में Special TET का रास्ता साफ, टीईटी में फेल शिक्षकों को मिलेगा मौका आईआईटी मद्रास में भी संतोष की उपलब्धि को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए, उसकी मेहनत और दृढ़ता की सराहना की. संस्थान के अनुसार, संतोष ने टीएन वॉलिंटियर्स के जरिए प्रोग्राम के बारे में जाना और अपनी जरूरत के अनुसार ऐसे कोर्स को चुना जिसकी पढ़ाई बड़े स्तर पर घर से की जा सकती है. क्या है IIT Madras फॉर ऑल पहल? Anaivarukkum IITM यानी आईआईटी मद्रास फॉर ऑल आईआईटी मद्रास की एक आउटरीच और एजुकेशनल पहल है. इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों समेत अलग-अलग वर्गों के स्टूडेंट तक हायर एजुकेशन और एसटीईएम लर्निंग की पहुंच बनाना है. इस पहल के तहत संतोष जैसे छात्रों को भी आईआईटी मद्रास के बीएस प्रोग्राम से जोड़ने का अवसर मिल रहा है. उनके लिए ऑनलाइन पढ़ाई के साथ जरूरी जगह पर इन पर्सन एक्टिविटी की व्यवस्था की गई है. वहीं आपको बता दें कि इस कोर्स में संतोष की पहले साल की फीस एनजीओ की ओर से दी जाएगी. ये भी पढ़ें-यूपी प्राथमिक शिक्षक भर्ती का सिलेबस जारी, जानें कैसा होगा परीक्षा पैटर्न?
हमारे आसपास कई ऐसी कहानियां होती हैं, जिसमें कुछ लोग अपनी कमजोरी को ही अपनी ताकत बना लेते हैं. ऐसी ही एक कहानी जे संतोष की भी है. 90 प्रतिशत स्पाइनल मस्कुलर डिसेबिलिटी और जन्म से सेरेब्रल पाल्सी के साथ जन्मे 17 साल के संतोष ने कुछ ऐसा कर दिखाया, जो लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गया. संतोष ने IIT मद्रास के बीएस एप्लीकेशन प्रोग्राम में एडमिशन लेकर इतिहास रच दिया है.
खास बात यह है कि पिछले साल संतोष स्कूल की उस ट्रिप में नहीं जा सके, जहां उनकी पूरी क्लास आईआईटी मद्रास घूमने गई थी. अब एक साल बाद वही आईआईटी मद्रास उनकी मंजिल बन गया है. उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह एक साधारण ऑटो चालक की चालक के बेटे हैं और अपनी कमजोरी को उन्होंने अपने सपनों के बीच नहीं आने दिया.
पढ़ाई के जज्बे ने बढ़ाया आगे
आईआईटी मद्रास में एडमिशन लेने वाले संतोष ने बताया कि वह ऐसा कोर्स करना चाहते थे, जिसकी पढ़ाई घर से संभव हो. उनके लिए इंजीनियरिंग कोर्स मुश्किल था, क्योंकि उसमें नियमित रूप से कॉलेज में उपस्थित रहना पड़ता है. जबकि कॉरेस्पोंडेंस कोर्स में खर्च ज्यादा आता है. इसी दौरान पिछले साल एनजीओ टीएन वॉलंटियर्स के लोग उनके स्कूल पहुंचे और उन्हें आईआईटी मद्रास के इस बीएस प्रोग्राम के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद संतोष ने इस कोर्स में एडमिशन लेने की तैयारी शुरू की.
पहली कोशिश में नहीं मिली थी सफलता ्र
IIT मद्रास में दाखिले की पहली कोशिश में वह क्वालीफायर पास नहीं कर पाए थे. इसके बाद दूसरी तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं था. इसके बावजूद उन्होंने दोबारा प्रयास किया और इस बार क्वालीफायर परीक्षा पास कर ली. संतोष अब डिग्री पूरी करने के बाद आईटी सेक्टर में काम करना चाहते हैं. अब इसी महीने के तीसरे सप्ताह में वह इस 4 साल के कोर्स की पढ़ाई शुरू कर देंगे. खास बात यह है कि संतोष के पिता ऑटो ड्राइवर हैं और उन्होंने ऐसा कोर्स चुना, जिससे वह काफी हद तक घर से रहकर इसे पूरा कर सकते हैं.
Dreams don’t always follow an easy path — but determination can take you where you aspire to be.
As reported in The Times of India, 17-year-old J Santhosh, who has 90% spinal muscular disability and cerebral palsy since birth, has secured admission to IIT Madras’ four-year BS… pic.twitter.com/y89tCIqJRL — IIT Madras (@iitmadras) September 2, 2026
ये भी पढ़ें-यूपी में Special TET का रास्ता साफ, टीईटी में फेल शिक्षकों को मिलेगा मौका
आईआईटी मद्रास में भी संतोष की उपलब्धि को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए, उसकी मेहनत और दृढ़ता की सराहना की. संस्थान के अनुसार, संतोष ने टीएन वॉलिंटियर्स के जरिए प्रोग्राम के बारे में जाना और अपनी जरूरत के अनुसार ऐसे कोर्स को चुना जिसकी पढ़ाई बड़े स्तर पर घर से की जा सकती है.
क्या है IIT Madras फॉर ऑल पहल?
Anaivarukkum IITM यानी आईआईटी मद्रास फॉर ऑल आईआईटी मद्रास की एक आउटरीच और एजुकेशनल पहल है. इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों समेत अलग-अलग वर्गों के स्टूडेंट तक हायर एजुकेशन और एसटीईएम लर्निंग की पहुंच बनाना है. इस पहल के तहत संतोष जैसे छात्रों को भी आईआईटी मद्रास के बीएस प्रोग्राम से जोड़ने का अवसर मिल रहा है. उनके लिए ऑनलाइन पढ़ाई के साथ जरूरी जगह पर इन पर्सन एक्टिविटी की व्यवस्था की गई है. वहीं आपको बता दें कि इस कोर्स में संतोष की पहले साल की फीस एनजीओ की ओर से दी जाएगी.
ये भी पढ़ें-यूपी प्राथमिक शिक्षक भर्ती का सिलेबस जारी, जानें कैसा होगा परीक्षा पैटर्न?
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