ईरान वॉर: हार्मुज 'ब्लॉकहेड' के बीच $115 के पार पहुंचा क्रूड ऑयल, भारत में बढ़ सकती है महंगाई
Iran war hormuz crisis: अमेरिका से युद्ध के बीच ईरान की ओर से तेल आपूर्ति के ब्लॉकेज की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतें अचानक उछलकर $115 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस भू-राजनीतिक तनाव ने न केवल सप्लाई चेन के टूटने का डर पैदा कर दिया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने महंगाई का नया संकट भी खड़ा कर दिया है. भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि कच्चे तेल के दाम बढ़ने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों और परिवहन लागत में भारी बढ़ोत्तरी की आशंका बढ़ जाती है. ये भी पढ़ें: ईरान वॉर से 'अकाल' जैसी स्थिति का खतरा, भुखमरी की कगार पर 4.5 करोड़ लोग, वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट ने डराया ईरान पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिशवॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट्स में बताया गया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने की कोशिश की है. उन्होंने इसके लिए ईरान के बंदरगाहों की चल रही नाकाबंदी को बढ़ाने के लिए अपने सहयोगियों को निर्देश दिए हैं. इन रिपोर्ट्स के बाद ही ये खबरें सामने आई हैं. तो वहीं ईरान ने भी कहा है कि वो अमेरिकी नाकाबंदी के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले यातायात को बाधित करना जारी रखेगा. तेल की कीमतों में दिखा भारी उतार चढ़ावबता दें कि जब से ईरान और यूएस के बीच युद्ध शुरू हुआ है, तभी से तेल की कीमतों में लगातार उतार- चढ़ाव देखने को मिला है. इस युद्ध की वजह से होर्मुज पर होने वाली जहाजों की आवाजाही काफी प्रभावित हो रही है, जिसके चलते दुनियाभर में क्रूड ऑयल की कमी देखने को मिल रही है. तो वहीं भारत में भी घरेलू गैस और पेट्रोल- डीजल की कीमतों में इजाफा देखने को मिला. इसके अलावा गैस की किल्लत का भी लोगों को सामना करना पड़ा है. ये भी पढ़ें: RBI ने दी खुशखबरी, बिल भरने की टेंशन खत्म, क्रेडिट कार्ड पर आया नया नियम, अब नहीं लगेगा जुर्माना!
Iran war hormuz crisis: अमेरिका से युद्ध के बीच ईरान की ओर से तेल आपूर्ति के ब्लॉकेज की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतें अचानक उछलकर $115 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस भू-राजनीतिक तनाव ने न केवल सप्लाई चेन के टूटने का डर पैदा कर दिया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने महंगाई का नया संकट भी खड़ा कर दिया है.
भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि कच्चे तेल के दाम बढ़ने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों और परिवहन लागत में भारी बढ़ोत्तरी की आशंका बढ़ जाती है.
ये भी पढ़ें: ईरान वॉर से 'अकाल' जैसी स्थिति का खतरा, भुखमरी की कगार पर 4.5 करोड़ लोग, वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट ने डराया
ईरान पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट्स में बताया गया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने की कोशिश की है. उन्होंने इसके लिए ईरान के बंदरगाहों की चल रही नाकाबंदी को बढ़ाने के लिए अपने सहयोगियों को निर्देश दिए हैं. इन रिपोर्ट्स के बाद ही ये खबरें सामने आई हैं. तो वहीं ईरान ने भी कहा है कि वो अमेरिकी नाकाबंदी के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले यातायात को बाधित करना जारी रखेगा.
तेल की कीमतों में दिखा भारी उतार चढ़ाव
बता दें कि जब से ईरान और यूएस के बीच युद्ध शुरू हुआ है, तभी से तेल की कीमतों में लगातार उतार- चढ़ाव देखने को मिला है. इस युद्ध की वजह से होर्मुज पर होने वाली जहाजों की आवाजाही काफी प्रभावित हो रही है, जिसके चलते दुनियाभर में क्रूड ऑयल की कमी देखने को मिल रही है. तो वहीं भारत में भी घरेलू गैस और पेट्रोल- डीजल की कीमतों में इजाफा देखने को मिला. इसके अलावा गैस की किल्लत का भी लोगों को सामना करना पड़ा है.
ये भी पढ़ें: RBI ने दी खुशखबरी, बिल भरने की टेंशन खत्म, क्रेडिट कार्ड पर आया नया नियम, अब नहीं लगेगा जुर्माना!
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