‘आपकी वर्दी का रंग बदल सकता है, लेकिन...’, आर्म्ड फोर्स वेटर्न्स डे पर बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार (14 जनवरी, 2026) को 10वें आर्म्ड फोर्स वेटरन्स डे पर भारतीय सुरक्षा बलों के सेवानिवृत और वीरगति को प्राप्त हो चुके जवानों और अधिकारियों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि आज वेटरन्स डे के अवसर पर मैं वीरगति को प्राप्त हो चुके अपने सैनिकों के प्रति, देश सेवा में संलग्न रहे अपने वेटरन्स के प्रति और अपने सैनिकों के प्रति कृतज्ञ राष्ट्र की तरफ से आभार व्यक्त करता हूं. उन्होंने कहा कि आप सभी केवल सेवा से निवृत हुए एक सैनिक भर नहीं हैं, आप हमारी राष्ट्रीय चेतना के जीवंत स्तंभ, हमारे सामूहिक साहस के प्रतीक और हमारी भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं. उन्होंने कहा कि 20 साल की उम्र के आसपास जब आप लोगों ने यह तय किया होगा कि आपको भारतीय सुरक्षा बलों का हिस्सा बनना है, तो आपने केवल एक पेशा नहीं चुना था, बल्कि एक सैनिक के रूप में आपने एक संकल्प लिया था, जहां व्यक्ति स्वयं को पूर्णतः राष्ट्र के लिए समर्पित कर देता है. आपने वह व्रत निभाया, जिसमें आपने स्वयं से ऊपर इस भारत राष्ट्र को प्राथमिकता दी. उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री के रूप में आप सबके साथ और आप सबके लिए काम करना मेरे जीवन के सबसे सुखद क्षणों में से एक है. यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे अपने सैनिकों के जीवन में आ रही चुनौतियों को बेहद नजदीक से देखने का और उनके समाधान का अवसर मिला है. सैनिक के दिल में देशभक्ति की भावना नहीं बदल सकती- सिंह नई दिल्ली स्थित मानेक शॉ सेंटर ऑडिटोरियम में अपना संबोधन देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘किसी भी सैनिक के लिए रिटायरमेंट सिर्फ एक शब्द होता है. असल मायने में कोई सैनिक कभी रिटायर नहीं होता. आप सब जब सेवा से निवृत हुए तो क्या आपकी सेवा समाप्त हो गई? बिल्कुल नहीं. आपकी वर्दी का रंग बदल सकता है, आपके काम करने की जगह बदल सकती है, आपके आसपास रहने वाले लोग बदल सकते हैं, लेकिन आपके दिल में देशभक्ति और सेवा की भावना वैसी की वैसी ही बनी रहती है. एक वेटरन के रूप में आप राष्ट्र निर्माण के हर मोर्चे पर अपना योगदान देते हैं. आप अपने अनुशासन, नेतृत्व और सामर्थ्य जैसे गुणों से समाज को दिशा दिखाते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘पूरा देश हर क्षेत्र में आपके योगदान को देख रहा है, महसूस कर रहा है. हमारी सरकार का भी यह मानना है कि हमारे सैनिक और वेटरन्स देश के मजबूत स्तम्भ हैं. उनकी देखभाल करना हमारा नैतिक और भावनात्मक कर्तव्य है. हमारी सरकार ने भी अपने वेटरन्स के लिए बीते वर्षों में कई ठोस फैसले लिए हैं और आने वाले समय में भी यह सिलसिला रुकेगा नहीं.’ हमारे वेटरन्स विभिन्न क्षेत्रों में आज अग्रणी भूमिका निभा रहे- रक्षा मंत्री रक्षा मंत्री ने कहा, ‘आज हम सब देख रहे हैं कि देश के कोने-कोने में हमारे वेटरन्स विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं. कई वेटरन्स शिक्षा के क्षेत्र में विशेष रूप से मिलिट्री स्कूलों में युवा पीढ़ी को संवार रहे हैं. कई कृषि के क्षेत्र में नई तकनीकों का इस्लेमाल करके किसानों की आय बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं. कई वेटरन्स आपदा प्रबंधन में अपने अनुभव का उपयोग करते हुए बाढ़, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत और बचाव अभियानों में भागीदारी करते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब 2015 में अपनी श्रीलंका यात्रा पर गए थे तो उन्होंने IPKF मेमोरियल पर अपनी तरफ से भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी. अब हम नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल पर भी IPKF के शांति सैनिकों के योगदान को सम्मानित कर रहे हैं. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ऑपरेशन पवन में भाग लेने वाले शांति सैनिकों के योगदान को न सिर्फ खुले मन से स्वीकार कर रही है, बल्कि उनके योगदान को हर स्तर पर पहचान देने की प्रक्रिया भी चल रही है.’ IPKF सैनिकों के प्रति रक्षा मंत्री ने जताया आभार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘आज जब सारा देश अपने पूर्व सैनिकों के योगदान का स्मरण करते हुए उनके प्रति आभार की अभिव्यक्ति कर रहा है. मैं आज से लगभग 40 साल पहले इंडियन पीस किपींग फोर्स (IPKF) के रूप में श्रीलंका में शांति स्थापना के लिए चलाए गए सैन्य अभियान में भाग लेने वाले सभी पूर्व सैनिकों का भी स्मरण करना चाहता हूं. श्रीलंका में भारतीय सेनाओं को भेजने का जो निर्णय तत्कालीन सरकार ने लिया था, उस पर बहस की गुंजाइश है, मगर ऑपरेशन पवन में भाग लेने वाले IPKF सैनिकों की जो उपेक्षा की गई, उसे किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता. भारतीय सेना ने जो बलिदान और संघर्ष उस दौरान किया, उसका जो सम्मान किया जाना चाहिए था.’ सैनिकों के प्रति हमारे संस्कारों का स्वभाविक विस्तार- राजनाथ सिंह उन्होंने कहा, ‘यह हमारे लिए गर्व की बात है कि भारत में सैनिकों के प्रति आदर किसी आदेश या निर्देश से नहीं आया, बल्कि यह हमारे संस्कारों का स्वाभाविक विस्तार है. देश के किसी भी कोने में, जब कोई सैनिक दिखाई देता है, तो बच्चे से लेकर बूढ़े तक, हर व्यक्ति उनके प्रति सम्मान व्यक्त करता है और यह देखकर विशेष संतोष होता है कि हमारी युवा पीढ़ी इस भावना को पूरी गंभीरता और खुले दिल से आगे बढ़ा रही है. हमारे सैनिकों के साथ हमारा बंधन हृदय का है, विश्वास का है, सम्मान का है और एक साझा भविष्य के सपनों का है.’ यह भी पढ़ेंः 'हमारे पास कुछ नहीं, फाइल्स ममता बनर्जी ले गईं', I-PAC रेड मामले में हाईकोर्ट में बोली ED
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार (14 जनवरी, 2026) को 10वें आर्म्ड फोर्स वेटरन्स डे पर भारतीय सुरक्षा बलों के सेवानिवृत और वीरगति को प्राप्त हो चुके जवानों और अधिकारियों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि आज वेटरन्स डे के अवसर पर मैं वीरगति को प्राप्त हो चुके अपने सैनिकों के प्रति, देश सेवा में संलग्न रहे अपने वेटरन्स के प्रति और अपने सैनिकों के प्रति कृतज्ञ राष्ट्र की तरफ से आभार व्यक्त करता हूं. उन्होंने कहा कि आप सभी केवल सेवा से निवृत हुए एक सैनिक भर नहीं हैं, आप हमारी राष्ट्रीय चेतना के जीवंत स्तंभ, हमारे सामूहिक साहस के प्रतीक और हमारी भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं.
उन्होंने कहा कि 20 साल की उम्र के आसपास जब आप लोगों ने यह तय किया होगा कि आपको भारतीय सुरक्षा बलों का हिस्सा बनना है, तो आपने केवल एक पेशा नहीं चुना था, बल्कि एक सैनिक के रूप में आपने एक संकल्प लिया था, जहां व्यक्ति स्वयं को पूर्णतः राष्ट्र के लिए समर्पित कर देता है. आपने वह व्रत निभाया, जिसमें आपने स्वयं से ऊपर इस भारत राष्ट्र को प्राथमिकता दी.
उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री के रूप में आप सबके साथ और आप सबके लिए काम करना मेरे जीवन के सबसे सुखद क्षणों में से एक है. यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे अपने सैनिकों के जीवन में आ रही चुनौतियों को बेहद नजदीक से देखने का और उनके समाधान का अवसर मिला है.
सैनिक के दिल में देशभक्ति की भावना नहीं बदल सकती- सिंह
नई दिल्ली स्थित मानेक शॉ सेंटर ऑडिटोरियम में अपना संबोधन देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘किसी भी सैनिक के लिए रिटायरमेंट सिर्फ एक शब्द होता है. असल मायने में कोई सैनिक कभी रिटायर नहीं होता. आप सब जब सेवा से निवृत हुए तो क्या आपकी सेवा समाप्त हो गई? बिल्कुल नहीं. आपकी वर्दी का रंग बदल सकता है, आपके काम करने की जगह बदल सकती है, आपके आसपास रहने वाले लोग बदल सकते हैं, लेकिन आपके दिल में देशभक्ति और सेवा की भावना वैसी की वैसी ही बनी रहती है. एक वेटरन के रूप में आप राष्ट्र निर्माण के हर मोर्चे पर अपना योगदान देते हैं. आप अपने अनुशासन, नेतृत्व और सामर्थ्य जैसे गुणों से समाज को दिशा दिखाते हैं.’
उन्होंने कहा, ‘पूरा देश हर क्षेत्र में आपके योगदान को देख रहा है, महसूस कर रहा है. हमारी सरकार का भी यह मानना है कि हमारे सैनिक और वेटरन्स देश के मजबूत स्तम्भ हैं. उनकी देखभाल करना हमारा नैतिक और भावनात्मक कर्तव्य है. हमारी सरकार ने भी अपने वेटरन्स के लिए बीते वर्षों में कई ठोस फैसले लिए हैं और आने वाले समय में भी यह सिलसिला रुकेगा नहीं.’
हमारे वेटरन्स विभिन्न क्षेत्रों में आज अग्रणी भूमिका निभा रहे- रक्षा मंत्री
रक्षा मंत्री ने कहा, ‘आज हम सब देख रहे हैं कि देश के कोने-कोने में हमारे वेटरन्स विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं. कई वेटरन्स शिक्षा के क्षेत्र में विशेष रूप से मिलिट्री स्कूलों में युवा पीढ़ी को संवार रहे हैं. कई कृषि के क्षेत्र में नई तकनीकों का इस्लेमाल करके किसानों की आय बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं. कई वेटरन्स आपदा प्रबंधन में अपने अनुभव का उपयोग करते हुए बाढ़, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत और बचाव अभियानों में भागीदारी करते हैं.’
उन्होंने कहा, ‘हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब 2015 में अपनी श्रीलंका यात्रा पर गए थे तो उन्होंने IPKF मेमोरियल पर अपनी तरफ से भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी. अब हम नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल पर भी IPKF के शांति सैनिकों के योगदान को सम्मानित कर रहे हैं. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ऑपरेशन पवन में भाग लेने वाले शांति सैनिकों के योगदान को न सिर्फ खुले मन से स्वीकार कर रही है, बल्कि उनके योगदान को हर स्तर पर पहचान देने की प्रक्रिया भी चल रही है.’
IPKF सैनिकों के प्रति रक्षा मंत्री ने जताया आभार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘आज जब सारा देश अपने पूर्व सैनिकों के योगदान का स्मरण करते हुए उनके प्रति आभार की अभिव्यक्ति कर रहा है. मैं आज से लगभग 40 साल पहले इंडियन पीस किपींग फोर्स (IPKF) के रूप में श्रीलंका में शांति स्थापना के लिए चलाए गए सैन्य अभियान में भाग लेने वाले सभी पूर्व सैनिकों का भी स्मरण करना चाहता हूं. श्रीलंका में भारतीय सेनाओं को भेजने का जो निर्णय तत्कालीन सरकार ने लिया था, उस पर बहस की गुंजाइश है, मगर ऑपरेशन पवन में भाग लेने वाले IPKF सैनिकों की जो उपेक्षा की गई, उसे किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता. भारतीय सेना ने जो बलिदान और संघर्ष उस दौरान किया, उसका जो सम्मान किया जाना चाहिए था.’
सैनिकों के प्रति हमारे संस्कारों का स्वभाविक विस्तार- राजनाथ सिंह
उन्होंने कहा, ‘यह हमारे लिए गर्व की बात है कि भारत में सैनिकों के प्रति आदर किसी आदेश या निर्देश से नहीं आया, बल्कि यह हमारे संस्कारों का स्वाभाविक विस्तार है. देश के किसी भी कोने में, जब कोई सैनिक दिखाई देता है, तो बच्चे से लेकर बूढ़े तक, हर व्यक्ति उनके प्रति सम्मान व्यक्त करता है और यह देखकर विशेष संतोष होता है कि हमारी युवा पीढ़ी इस भावना को पूरी गंभीरता और खुले दिल से आगे बढ़ा रही है. हमारे सैनिकों के साथ हमारा बंधन हृदय का है, विश्वास का है, सम्मान का है और एक साझा भविष्य के सपनों का है.’
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