आपकी कुंडली में शुक्र मजबूत है या कमजोर? फोन से 2 मिनट में ऐसे करें चेक
Shukra in Kundli: कुंडली में शुक्र को प्रेम, विवाह, आकर्षण, कला, सुंदरता, सुख-सुविधा और भौतिक सुखों से जोड़कर देखा जाता है. यही कारण है कि लोग अक्सर जानना चाहते हैं कि उनकी जन्म कुंडली में शुक्र मजबूत है या कमजोर. लेकिन केवल यह देखकर फैसला नहीं किया जा सकता कि शुक्र किस राशि में है. कई बार नीच राशि में बैठा शुक्र भी दूसरे ग्रहों से सहारा पाकर बेहतर फल देने की स्थिति में आ सकता है. वहीं उच्च राशि का शुक्र भी पीड़ित हो तो उसके परिणाम बदल सकते हैं. अच्छी बात यह है कि अपनी कुंडली की कुछ सामान्य चीजें आप फोन पर दो मिनट में खुद भी देख सकते हैं. सबसे पहले फोन में अपनी जन्म कुंडली खोलें किसी भी भरोसेमंद वैदिक कुंडली ऐप या वेबसाइट पर जन्म तारीख, सही समय और जन्म स्थान डालकर Birth Chart या Lagna Kundli खोलें. अब कुंडली में शुक्र, Shukra या Venus खोजें. इसके बाद ये 5 बातें देखें. 1. शुक्र किस राशि में है? शुक्र की ताकत पहचानने का पहला संकेत उसकी राशि है. मीन राशि में शुक्र उच्च का माना जाता है. वृषभ और तुला शुक्र की अपनी राशियां हैं. कन्या राशि में शुक्र नीच का माना जाता है. ज्योतिष में मीन राशि के 27 अंश पर शुक्र का परम उच्च और कन्या के 27 अंश पर परम नीच बिंदु माना जाता है. इसलिए फोन में शुक्र के सामने केवल राशि ही नहीं, उसकी degree भी देखें. यहां एक जरूरी बात है. कुंडली में Venus in Virgo दिखाई देने का मतलब यह नहीं कि शुक्र से जुड़ी हर चीज खराब हो जाएगी. नीचभंग, दूसरे ग्रहों की दृष्टि, भाव और नवांश इसकी स्थिति बदल सकते हैं. 2. शुक्र किस भाव में बैठा है? इसके बाद देखें कि शुक्र कुंडली के किस भाव में है. यहीं सबसे ज्यादा गलती होती है. सोशल मीडिया पर अक्सर कहा जाता है कि छठे, आठवें या बारहवें भाव में ग्रह है तो वह कमजोर है. ज्योतिष में इतनी सीधी गणना नहीं होती. भाव यह बताता है कि शुक्र का प्रभाव जीवन के किस क्षेत्र में ज्यादा दिखाई देगा, लेकिन ग्रह वास्तव में कितना बलवान है, यह उसकी राशि, भावेशत्व, दृष्टि और दूसरी स्थितियों को मिलाकर देखा जाता है. खास बात यह है कि शुक्र को चौथे भाव की दिशा में दिग्बल मिलता है. इसलिए केवल घर नंबर देखकर Strong या Weak लिख देना अधूरा विश्लेषण है. 3. शुक्र के साथ कौन-सा ग्रह बैठा है? अब उसी खाने में देखें जिसमें शुक्र है. क्या उसके साथ सूर्य, शनि, मंगल, राहु, केतु, बुध या कोई दूसरा ग्रह भी है? इसे युति कहा जाता है. किस ग्रह के साथ शुक्र बैठा है, दोनों ग्रहों के बीच कितने अंश का अंतर है और वे किस भाव-राशि में हैं, इससे परिणाम बदल सकते हैं. इसलिए केवल यह कहना कि शुक्र के साथ राहु है, इसलिए शुक्र खराब है या बुध के साथ शुक्र है इसलिए बहुत अच्छा है पर्याप्त नहीं है. Degree जितनी करीब होगी, युति का असर आम तौर पर उतना महत्वपूर्ण माना जाता है. 4. शुक्र पर किस ग्रह की दृष्टि है? अब देखें कि शुक्र पर दूसरे ग्रहों की दृष्टि पड़ रही है या नहीं. यह थोड़ा advanced हिस्सा है, इसलिए अगर आपके ऐप में Aspects या Drishti का विकल्प है तो वहां से इसे आसानी से देखा जा सकता है. यहां भी केवल शुभ ग्रह की दृष्टि अच्छी और पाप ग्रह की दृष्टि खराब वाला फार्मूला हर कुंडली पर लागू नहीं किया जा सकता. ग्रह का भावेशत्व और लग्न भी देखना पड़ता है. यही कारण है कि एक ही राशि और भाव में शुक्र होने के बावजूद दो लोगों को बिल्कुल अलग परिणाम मिल सकते हैं. 5. शुक्र वक्री या अस्त है तो तुरंत कमजोर न मानें यह सबसे जरूरी चेक है. अगर कुंडली में शुक्र के साथ R, Retro या Vakri लिखा है तो इसका अर्थ है कि जन्म के समय शुक्र वक्री था. वक्री शुक्र को सीधे कमजोर कहना ज्योतिषीय रूप से सही नहीं है. षड्बल की गणना में ग्रह की गति से मिलने वाला चेष्टा बल भी देखा जाता है और वक्री ग्रह को इसमें अधिक बल मिल सकता है. इसका अर्थ यह नहीं कि उसके सभी फल अच्छे हो जाएंगे, लेकिन वक्री, कमजोर वाला नियम सही नहीं है. इसी तरह शुक्र सूर्य के बहुत करीब हो तो उसके अस्त होने की स्थिति भी अलग से देखी जाती है. 2 मिनट का शुक्र चेक फोन पर अपनी कुंडली खोलकर बस ये सवाल पूछें- शुक्र किस राशि में है? किस भाव में है? कितने अंश पर है? उसके साथ कौन-से ग्रह हैं? उस पर किसकी दृष्टि है? क्या शुक्र वक्री या अस्त है? इन छह सवालों के बाद आपको शुक्र की स्थिति का शुरुआती अंदाजा मिल जाएगा. सिर्फ उच्च शुक्र देखकर खुश और नीच शुक्र देखकर परेशान न हों, कुंडली पढ़ने का सबसे बड़ा नियम यही है कि किसी एक ग्रह की एक स्थिति को देखकर फैसला न करें. मीन का उच्च शुक्र पहली नजर में मजबूत दिखाई दे सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय के लिए भाव, भावेशत्व, युति, दृष्टि, नवांश और षड्बल भी देखना चाहिए. इसी तरह कन्या का नीच शुक्र अपने आप यह साबित नहीं करता कि विवाह, प्रेम या धन से जुड़ी समस्याएं जरूर आएंगी. अगर बिल्कुल तकनीकी तरीके से शुक्र की शक्ति जाननी हो तो षड्बल सबसे उपयोगी अगला चरण है. इसमें स्थान बल, दिग्बल, काल बल, चेष्टा बल, नैसर्गिक बल और दृष्टि बल जैसे कई कारकों को जोड़कर ग्रह की शक्ति देखी जाती है. इसलिए कुंडली में शुक्र को समझने का सही सवाल यह नहीं है कि मेरा शुक्र किस राशि में है? बल्कि यह है कि मेरी पूरी कुंडली में शुक्र किस स्थिति में काम कर रहा है? फिर भी यदि समझ न आए या भ्रम की स्थिति बने तो योग्य ज्योतिषाचार्य की मदद लें. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
Shukra in Kundli: कुंडली में शुक्र को प्रेम, विवाह, आकर्षण, कला, सुंदरता, सुख-सुविधा और भौतिक सुखों से जोड़कर देखा जाता है. यही कारण है कि लोग अक्सर जानना चाहते हैं कि उनकी जन्म कुंडली में शुक्र मजबूत है या कमजोर.
लेकिन केवल यह देखकर फैसला नहीं किया जा सकता कि शुक्र किस राशि में है. कई बार नीच राशि में बैठा शुक्र भी दूसरे ग्रहों से सहारा पाकर बेहतर फल देने की स्थिति में आ सकता है. वहीं उच्च राशि का शुक्र भी पीड़ित हो तो उसके परिणाम बदल सकते हैं.
अच्छी बात यह है कि अपनी कुंडली की कुछ सामान्य चीजें आप फोन पर दो मिनट में खुद भी देख सकते हैं.
सबसे पहले फोन में अपनी जन्म कुंडली खोलें
किसी भी भरोसेमंद वैदिक कुंडली ऐप या वेबसाइट पर जन्म तारीख, सही समय और जन्म स्थान डालकर Birth Chart या Lagna Kundli खोलें.
अब कुंडली में शुक्र, Shukra या Venus खोजें. इसके बाद ये 5 बातें देखें.
1. शुक्र किस राशि में है?
शुक्र की ताकत पहचानने का पहला संकेत उसकी राशि है.
- मीन राशि में शुक्र उच्च का माना जाता है.
- वृषभ और तुला शुक्र की अपनी राशियां हैं.
- कन्या राशि में शुक्र नीच का माना जाता है.
ज्योतिष में मीन राशि के 27 अंश पर शुक्र का परम उच्च और कन्या के 27 अंश पर परम नीच बिंदु माना जाता है. इसलिए फोन में शुक्र के सामने केवल राशि ही नहीं, उसकी degree भी देखें.
यहां एक जरूरी बात है. कुंडली में Venus in Virgo दिखाई देने का मतलब यह नहीं कि शुक्र से जुड़ी हर चीज खराब हो जाएगी. नीचभंग, दूसरे ग्रहों की दृष्टि, भाव और नवांश इसकी स्थिति बदल सकते हैं.
2. शुक्र किस भाव में बैठा है?
इसके बाद देखें कि शुक्र कुंडली के किस भाव में है. यहीं सबसे ज्यादा गलती होती है. सोशल मीडिया पर अक्सर कहा जाता है कि छठे, आठवें या बारहवें भाव में ग्रह है तो वह कमजोर है. ज्योतिष में इतनी सीधी गणना नहीं होती.
भाव यह बताता है कि शुक्र का प्रभाव जीवन के किस क्षेत्र में ज्यादा दिखाई देगा, लेकिन ग्रह वास्तव में कितना बलवान है, यह उसकी राशि, भावेशत्व, दृष्टि और दूसरी स्थितियों को मिलाकर देखा जाता है.
खास बात यह है कि शुक्र को चौथे भाव की दिशा में दिग्बल मिलता है. इसलिए केवल घर नंबर देखकर Strong या Weak लिख देना अधूरा विश्लेषण है.
3. शुक्र के साथ कौन-सा ग्रह बैठा है?
अब उसी खाने में देखें जिसमें शुक्र है. क्या उसके साथ सूर्य, शनि, मंगल, राहु, केतु, बुध या कोई दूसरा ग्रह भी है? इसे युति कहा जाता है. किस ग्रह के साथ शुक्र बैठा है, दोनों ग्रहों के बीच कितने अंश का अंतर है और वे किस भाव-राशि में हैं, इससे परिणाम बदल सकते हैं.
इसलिए केवल यह कहना कि शुक्र के साथ राहु है, इसलिए शुक्र खराब है या बुध के साथ शुक्र है इसलिए बहुत अच्छा है पर्याप्त नहीं है. Degree जितनी करीब होगी, युति का असर आम तौर पर उतना महत्वपूर्ण माना जाता है.
4. शुक्र पर किस ग्रह की दृष्टि है?
अब देखें कि शुक्र पर दूसरे ग्रहों की दृष्टि पड़ रही है या नहीं. यह थोड़ा advanced हिस्सा है, इसलिए अगर आपके ऐप में Aspects या Drishti का विकल्प है तो वहां से इसे आसानी से देखा जा सकता है.
यहां भी केवल शुभ ग्रह की दृष्टि अच्छी और पाप ग्रह की दृष्टि खराब वाला फार्मूला हर कुंडली पर लागू नहीं किया जा सकता. ग्रह का भावेशत्व और लग्न भी देखना पड़ता है. यही कारण है कि एक ही राशि और भाव में शुक्र होने के बावजूद दो लोगों को बिल्कुल अलग परिणाम मिल सकते हैं.
5. शुक्र वक्री या अस्त है तो तुरंत कमजोर न मानें
यह सबसे जरूरी चेक है. अगर कुंडली में शुक्र के साथ R, Retro या Vakri लिखा है तो इसका अर्थ है कि जन्म के समय शुक्र वक्री था. वक्री शुक्र को सीधे कमजोर कहना ज्योतिषीय रूप से सही नहीं है.
षड्बल की गणना में ग्रह की गति से मिलने वाला चेष्टा बल भी देखा जाता है और वक्री ग्रह को इसमें अधिक बल मिल सकता है. इसका अर्थ यह नहीं कि उसके सभी फल अच्छे हो जाएंगे, लेकिन वक्री, कमजोर वाला नियम सही नहीं है.
इसी तरह शुक्र सूर्य के बहुत करीब हो तो उसके अस्त होने की स्थिति भी अलग से देखी जाती है.
2 मिनट का शुक्र चेक
फोन पर अपनी कुंडली खोलकर बस ये सवाल पूछें-
- शुक्र किस राशि में है?
- किस भाव में है?
- कितने अंश पर है?
- उसके साथ कौन-से ग्रह हैं?
- उस पर किसकी दृष्टि है?
- क्या शुक्र वक्री या अस्त है?
इन छह सवालों के बाद आपको शुक्र की स्थिति का शुरुआती अंदाजा मिल जाएगा. सिर्फ उच्च शुक्र देखकर खुश और नीच शुक्र देखकर परेशान न हों, कुंडली पढ़ने का सबसे बड़ा नियम यही है कि किसी एक ग्रह की एक स्थिति को देखकर फैसला न करें.
मीन का उच्च शुक्र पहली नजर में मजबूत दिखाई दे सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय के लिए भाव, भावेशत्व, युति, दृष्टि, नवांश और षड्बल भी देखना चाहिए. इसी तरह कन्या का नीच शुक्र अपने आप यह साबित नहीं करता कि विवाह, प्रेम या धन से जुड़ी समस्याएं जरूर आएंगी.
अगर बिल्कुल तकनीकी तरीके से शुक्र की शक्ति जाननी हो तो षड्बल सबसे उपयोगी अगला चरण है. इसमें स्थान बल, दिग्बल, काल बल, चेष्टा बल, नैसर्गिक बल और दृष्टि बल जैसे कई कारकों को जोड़कर ग्रह की शक्ति देखी जाती है.
इसलिए कुंडली में शुक्र को समझने का सही सवाल यह नहीं है कि मेरा शुक्र किस राशि में है? बल्कि यह है कि मेरी पूरी कुंडली में शुक्र किस स्थिति में काम कर रहा है? फिर भी यदि समझ न आए या भ्रम की स्थिति बने तो योग्य ज्योतिषाचार्य की मदद लें.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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