अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस: दोषी की फांसी पर SC की रोक, गुजरात सरकार को जारी नोटिस
2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले के दोषी अहमद बावा उर्फ अबुबकर बरेलवी की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. कोर्ट ने अबुबकर की याचिका पर गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया है. बरेलवी ने गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उसकी सजा और दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया था. इस साल 7 जुलाई को गुजरात हाई कोर्ट ने इस मामले में 38 दोषियों की मौत की सजा की पुष्टि की थी. फांसी की सज़ा पाने वाले दोषियों में से एक अबुबकर की याचिका गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए लगी. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने मामले की सुनवाई की. सुनवाई के दौरान अबुबकर बरेलवी के वकील ने कहा कि उसकी दोषसिद्धि सिर्फ साज़िश के आरोपों पर आधारित है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को विचार के लिए स्वीकार करते हुए गुजरात सरकार को नोटिस जारी कर दिया. इसके साथ ही कोर्ट ने बरेलवी को दी गई मौत की सजा पर रोक लगा दी. 56 लोगों की मौत का है मामला 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में सीरियल धमाके हुए थे. 70 मिनट के भीतर अलग-अलग इलाकों में हुए 21 धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. इस मामले में पुलिस ने कई लोगों को आरोपी बनाया. लंबी सुनवाई के बाद गुजरात की विशेष कोर्ट ने 49 आरोपियों को दोषी ठहराया. फरवरी 2022 में दिए फैसले में विशेष अदालत ने 38 दोषियों को मौत की सजा सुनाई, जबकि 11 को उम्रकैद की सजा दी गई. इस सजा को आरोपियों ने गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी. जुलाई 2026 में हाई कोर्ट ने विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखा. यानी हाई कोर्ट ने 38 दोषियों की मौत की सजा और 11 दोषियों को दी गई उम्रकैद की सजा की पुष्टि की. दूसरे दोषियों का सुप्रीम कोर्ट आना बाकी अब बरेलवी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. फिलहाल दूसरे दोषियों की अपील पर सुनवाई नहीं हुई. बरेलवी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद गुजरात सरकार को अपना पक्ष रखना होगा. यह तय है कि दूसरे आरोपियों के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ऐसा ही अंतरिम आदेश देगा. यानी 38 लोगों की फांसी और 11 लोगों की उम्रकैद बरकरार रहेगी या नहीं या सज़ा में कुछ बदलाव होगा, यह सब कुछ सुप्रीम कोर्ट की विस्तृत सुनवाई के बाद तय होगा.
2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले के दोषी अहमद बावा उर्फ अबुबकर बरेलवी की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. कोर्ट ने अबुबकर की याचिका पर गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया है. बरेलवी ने गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उसकी सजा और दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया था.
इस साल 7 जुलाई को गुजरात हाई कोर्ट ने इस मामले में 38 दोषियों की मौत की सजा की पुष्टि की थी. फांसी की सज़ा पाने वाले दोषियों में से एक अबुबकर की याचिका गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए लगी. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने मामले की सुनवाई की.
सुनवाई के दौरान अबुबकर बरेलवी के वकील ने कहा कि उसकी दोषसिद्धि सिर्फ साज़िश के आरोपों पर आधारित है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को विचार के लिए स्वीकार करते हुए गुजरात सरकार को नोटिस जारी कर दिया. इसके साथ ही कोर्ट ने बरेलवी को दी गई मौत की सजा पर रोक लगा दी.
56 लोगों की मौत का है मामला
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में सीरियल धमाके हुए थे. 70 मिनट के भीतर अलग-अलग इलाकों में हुए 21 धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. इस मामले में पुलिस ने कई लोगों को आरोपी बनाया. लंबी सुनवाई के बाद गुजरात की विशेष कोर्ट ने 49 आरोपियों को दोषी ठहराया.
फरवरी 2022 में दिए फैसले में विशेष अदालत ने 38 दोषियों को मौत की सजा सुनाई, जबकि 11 को उम्रकैद की सजा दी गई. इस सजा को आरोपियों ने गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी. जुलाई 2026 में हाई कोर्ट ने विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखा. यानी हाई कोर्ट ने 38 दोषियों की मौत की सजा और 11 दोषियों को दी गई उम्रकैद की सजा की पुष्टि की.
दूसरे दोषियों का सुप्रीम कोर्ट आना बाकी
अब बरेलवी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. फिलहाल दूसरे दोषियों की अपील पर सुनवाई नहीं हुई. बरेलवी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद गुजरात सरकार को अपना पक्ष रखना होगा. यह तय है कि दूसरे आरोपियों के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ऐसा ही अंतरिम आदेश देगा. यानी 38 लोगों की फांसी और 11 लोगों की उम्रकैद बरकरार रहेगी या नहीं या सज़ा में कुछ बदलाव होगा, यह सब कुछ सुप्रीम कोर्ट की विस्तृत सुनवाई के बाद तय होगा.
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