हैदराबाद मेट्रो टेकओवर का फैसला, कैबिनेट की मंजूरी के बावजूद क्यों फंसा प्रोजेक्ट?

तेलंगाना राज्य कैबिनेट ने हैदराबाद मेट्रो रेल को एल एंड टी (L&T) कंपनी से सरकारी नियंत्रण में लेने का एक बार फिर निर्णय लिया है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इस प्रक्रिया में आ रही रुकावटें सरकार की चुनौतियां बढ़ा रही हैं. यह मामला सिर्फ एक प्रशासनिक फैसले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है, जहां तेजी से होने वाली घोषणाओं और धीमी गति से चल रहे कामकाज के बीच एक विरोधाभास देखने को मिल रहा है. चार महीने पहले 15,000 करोड़ रुपये की लागत से मेट्रो को खरीदने की जो आडंबरपूर्ण घोषणा की गई थी, उसके बाद से इस मामले में 'एक कदम आगे, दो कदम पीछे' वाली स्थिति बनी हुई है.इस पूरे टेकओवर प्रक्रिया को लेकर सबसे बड़ा झटका तब लगा जब यह खुलासा हुआ कि इस सौदे को अंजाम देने के लिए टेंडर के जरिए चुनी गई सलाहकार कंपनी 'आईडीबीआई कैपिटल' के पास मेट्रो या रेलवे तकनीक के तकनीकी मूल्यांकन का कोई ठोस अनुभव नहीं है. एक ऐसी संस्था को इस जिम्मेदारी से सौंपा जाना, जिसके पास इस विषद विशेषज्ञता नहीं है, यह अधिकारियों की लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण माना जा रहा है. इस स्थिति से जूझते हुए अब प्रशासन को एक बार फिर से एक नए और अनुभवी सलाहकार की तलाश शुरू करनी पड़ी है, जिसमें कम से कम छह महीने का समय लगने की संभावना है. इसका सीधा मतलब है कि मुख्यमंत्री का तीन महीने में काम पूरा करने का दावा अब तक एक खाली वादा साबित हो रहा है.इसके अलावा, एल एंड टी कंपनी के साथ हुए कई महत्वपूर्ण अनुबंधों और कानूनी जटिलताओं को देखते हुए बिना गहराई से अध्ययन किए टेकओवर करना भविष्य में कानूनी जंग का कारण बन सकता है. वित्त विभाग के अधिकारियों ने भी अपनी चिंता जताई है कि राज्य की वर्तमान आर्थिक स्थिति को देखते हुए 15,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था करना एक बहुत ही मुश्किल काम होगा. कुछ सूत्रों के अनुसार, इस प्लान में एल एंड टी को लीज पर दी गई 200 एकड़ जमीन और शॉपिंग मॉल से जुड़े हितों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जो भविष्य में और जटिलताएं पैदा कर सकता है. पिछले दो वर्षों से नए मेट्रो रेल निर्माण कार्यों में सरकारी उदासीनता के कारण नगरवासियों को भयंकर ट्रैफिक जाम और सार्वजनिक सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है. अब यह देखना योग्य है कि क्या सरकार इन सभी बाधाओं को पार कर अपने वादे को पूरा कर पाएगी या यह मुद्दा भी सिर्फ राजनीतिक दावपेंच बनकर रह जाएगा.

Feb 24, 2026 - 00:30
 0
हैदराबाद मेट्रो टेकओवर का फैसला, कैबिनेट की मंजूरी के बावजूद क्यों फंसा प्रोजेक्ट?

तेलंगाना राज्य कैबिनेट ने हैदराबाद मेट्रो रेल को एल एंड टी (L&T) कंपनी से सरकारी नियंत्रण में लेने का एक बार फिर निर्णय लिया है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इस प्रक्रिया में आ रही रुकावटें सरकार की चुनौतियां बढ़ा रही हैं. यह मामला सिर्फ एक प्रशासनिक फैसले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है, जहां तेजी से होने वाली घोषणाओं और धीमी गति से चल रहे कामकाज के बीच एक विरोधाभास देखने को मिल रहा है. चार महीने पहले 15,000 करोड़ रुपये की लागत से मेट्रो को खरीदने की जो आडंबरपूर्ण घोषणा की गई थी, उसके बाद से इस मामले में 'एक कदम आगे, दो कदम पीछे' वाली स्थिति बनी हुई है.

इस पूरे टेकओवर प्रक्रिया को लेकर सबसे बड़ा झटका तब लगा जब यह खुलासा हुआ कि इस सौदे को अंजाम देने के लिए टेंडर के जरिए चुनी गई सलाहकार कंपनी 'आईडीबीआई कैपिटल' के पास मेट्रो या रेलवे तकनीक के तकनीकी मूल्यांकन का कोई ठोस अनुभव नहीं है. एक ऐसी संस्था को इस जिम्मेदारी से सौंपा जाना, जिसके पास इस विषद विशेषज्ञता नहीं है, यह अधिकारियों की लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण माना जा रहा है. इस स्थिति से जूझते हुए अब प्रशासन को एक बार फिर से एक नए और अनुभवी सलाहकार की तलाश शुरू करनी पड़ी है, जिसमें कम से कम छह महीने का समय लगने की संभावना है. इसका सीधा मतलब है कि मुख्यमंत्री का तीन महीने में काम पूरा करने का दावा अब तक एक खाली वादा साबित हो रहा है.

इसके अलावा, एल एंड टी कंपनी के साथ हुए कई महत्वपूर्ण अनुबंधों और कानूनी जटिलताओं को देखते हुए बिना गहराई से अध्ययन किए टेकओवर करना भविष्य में कानूनी जंग का कारण बन सकता है. वित्त विभाग के अधिकारियों ने भी अपनी चिंता जताई है कि राज्य की वर्तमान आर्थिक स्थिति को देखते हुए 15,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था करना एक बहुत ही मुश्किल काम होगा. कुछ सूत्रों के अनुसार, इस प्लान में एल एंड टी को लीज पर दी गई 200 एकड़ जमीन और शॉपिंग मॉल से जुड़े हितों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जो भविष्य में और जटिलताएं पैदा कर सकता है. पिछले दो वर्षों से नए मेट्रो रेल निर्माण कार्यों में सरकारी उदासीनता के कारण नगरवासियों को भयंकर ट्रैफिक जाम और सार्वजनिक सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है. अब यह देखना योग्य है कि क्या सरकार इन सभी बाधाओं को पार कर अपने वादे को पूरा कर पाएगी या यह मुद्दा भी सिर्फ राजनीतिक दावपेंच बनकर रह जाएगा.

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow