हार्मोनल संतुलन के लिए वरदान है योग! जानें कैसे उज्जाई प्राणायाम बदल सकता है आपकी सेहत

Thyroid Health Tips: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बिगड़ती जीवनशैली के कारण थायराइड एक बेहद सामान्य लेकिन गंभीर समस्या बन गई है. पुरुषों की तुलना में महिलाएं इस बीमारी से ज्यादा प्रभावित होती हैं. थायराइड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म और ऊर्जा के स्तर को नियंत्रित करती है, लेकिन जब यह असंतुलित होती है तो वजन बढ़ना, थकान और तनाव जैसी समस्याएं घेर लेती हैं. पतंजलि आयुर्वेद का दावा है कि योग और प्राकृतिक उपचार के जरिए इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है. हार्मोनल संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ विशेष योगासन अत्यंत प्रभावशाली माने गए हैं: उज्जाई प्राणायाम: यह थायराइड के लिए सबसे कारगर अभ्यास है. इसमें गले को सिकोड़कर सांस ली जाती है, जिससे थायराइड ग्रंथि पर सीधा प्रभाव       पड़ता है.सर्वांगासन और हलासन: इन आसनों को करने से गले के हिस्से में रक्त का संचार बढ़ता है और ग्रंथि की कार्यक्षमता में सुधार होता है.सिंहासन: गले की मांसपेशियों को सक्रिय करने और तनाव दूर करने के लिए सिंहासन का अभ्यास बहुत उपयोगी है.मत्स्यासन: यह आसन गर्दन में खिंचाव पैदा करता है, जो थायराइड हार्मोन के स्राव को संतुलित करने में मदद करता है. आयुर्वेद और खान-पान का महत्व योग के साथ-साथ सही खान-पान और प्राकृतिक औषधियां रिकवरी की रफ्तार बढ़ा देती हैं. पतंजलि आयुर्वेद के मुताबिक, त्रिकटु चूर्ण और कांचनार गुग्गुल जैसी जड़ी-बूटियां थायराइड के उपचार में सहायक होती हैं. इसके अलावा धनिया के बीज का पानी पीना एक बेहतरीन घरेलू उपाय है. रात भर एक गिलास पानी में दो चम्मच सूखा धनिया भिगोकर रखें और सुबह इसे उबालकर छान लें. यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है. जीवनशैली में बदलाव है जरूरी थायराइड केवल एक शारीरिक बीमारी नहीं, बल्कि जीवनशैली का विकार भी है. पर्याप्त नींद लेना, प्रोसेस्ड फूड और अत्यधिक चीनी से परहेज करना और नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना अनिवार्य है. प्राकृतिक चिकित्सा और योग का नियमित अभ्यास न केवल हार्मोन को संतुलित करता है, बल्कि व्यक्ति को मानसिक शांति भी प्रदान करता है.

Dec 31, 2025 - 13:30
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हार्मोनल संतुलन के लिए वरदान है योग! जानें कैसे उज्जाई प्राणायाम बदल सकता है आपकी सेहत

Thyroid Health Tips: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बिगड़ती जीवनशैली के कारण थायराइड एक बेहद सामान्य लेकिन गंभीर समस्या बन गई है. पुरुषों की तुलना में महिलाएं इस बीमारी से ज्यादा प्रभावित होती हैं. थायराइड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म और ऊर्जा के स्तर को नियंत्रित करती है, लेकिन जब यह असंतुलित होती है तो वजन बढ़ना, थकान और तनाव जैसी समस्याएं घेर लेती हैं.

पतंजलि आयुर्वेद का दावा है कि योग और प्राकृतिक उपचार के जरिए इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है. हार्मोनल संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ विशेष योगासन अत्यंत प्रभावशाली माने गए हैं:

उज्जाई प्राणायाम: यह थायराइड के लिए सबसे कारगर अभ्यास है. इसमें गले को सिकोड़कर सांस ली जाती है, जिससे थायराइड ग्रंथि पर सीधा प्रभाव       पड़ता है.
सर्वांगासन और हलासन: इन आसनों को करने से गले के हिस्से में रक्त का संचार बढ़ता है और ग्रंथि की कार्यक्षमता में सुधार होता है.
सिंहासन: गले की मांसपेशियों को सक्रिय करने और तनाव दूर करने के लिए सिंहासन का अभ्यास बहुत उपयोगी है.
मत्स्यासन: यह आसन गर्दन में खिंचाव पैदा करता है, जो थायराइड हार्मोन के स्राव को संतुलित करने में मदद करता है.

आयुर्वेद और खान-पान का महत्व

योग के साथ-साथ सही खान-पान और प्राकृतिक औषधियां रिकवरी की रफ्तार बढ़ा देती हैं. पतंजलि आयुर्वेद के मुताबिक, त्रिकटु चूर्ण और कांचनार गुग्गुल जैसी जड़ी-बूटियां थायराइड के उपचार में सहायक होती हैं.

इसके अलावा धनिया के बीज का पानी पीना एक बेहतरीन घरेलू उपाय है. रात भर एक गिलास पानी में दो चम्मच सूखा धनिया भिगोकर रखें और सुबह इसे उबालकर छान लें. यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है.

जीवनशैली में बदलाव है जरूरी

थायराइड केवल एक शारीरिक बीमारी नहीं, बल्कि जीवनशैली का विकार भी है. पर्याप्त नींद लेना, प्रोसेस्ड फूड और अत्यधिक चीनी से परहेज करना और नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना अनिवार्य है. प्राकृतिक चिकित्सा और योग का नियमित अभ्यास न केवल हार्मोन को संतुलित करता है, बल्कि व्यक्ति को मानसिक शांति भी प्रदान करता है.

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