‘हर हर महादेव’ के साथ तेज प्रताप यादव का बदला अंदाज़! बताया भोलेनाथ को खुश करने का तरीका? देखें वीडियो

Tej Pratap Yadav Viral Video: बिहार की राजनीति अपने अलग अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले तेज प्रताप यादव एक बार फिर धार्मिक प्रवचन देते दिखाई दिए. इस बार चुनावी नारे की जगह “हर हर महादेव” के उद्घोष के साथ उन्होंने शिवभक्तों को भगवान भोलेनाथ की नियमित पूजा करने का सही तरीका बताया है.  उन्होंने कहा कि, रोजाना सुबह स्नान के बाद निर्मल मन से भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करने की अपील की. उन्होंने कहा कि, भक्ति दिखावे से नहीं, बल्कि भावना से होनी चाहिए. एक सच्चे भाव से चढ़ाया गया एक बेलपत्र भी महादेव को प्रसन्न कर सकता है.  Daily Puja Tips: पूजा में कौन सी सामग्री दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं कौन सी नहीं, जानें बेलपत्र, जल और दूध का महत्व तेज प्रताप ने वीडियो में परंपरागत पूजा सामग्री का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, शुद्ध जल, दुध और बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित करना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि पवित्रता और समर्पण का प्रतीक भी है. क्योंकि बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है.  उनका तर्क है कि, नियमित रूप से बेलपत्र अर्पित करने से व्यक्ति के अंदर सकारात्मक ऊर्जा और अनुशासन आता है. कहने का मतलब साफ है कि, मन में द्वेष रखने की बजाए प्रेम भाव से भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए.  हर सुबह एक बिलपत्र अर्पित करो, भोलेनाथ हर दुख हर लेंगे। : तेज प्रताप यादव, नेता, जेजेडी pic.twitter.com/Uvxv9CPPzo — छपरा जिला ???????? (@ChapraZila) February 26, 2026 आस्था और सोशल मीडिया का संगम तेजप्रताप यादव ने धार्मिक अपील के साथ यह भी बताया कि, वह सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो शेयर कर रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग मार्गदर्शन पा सकें. यहां एक दिलचस्प पहलू उभरता है कि, भक्ति का संदेश और डिजिटल पहुंच, दोनों साथ-साथ में हो रहा है. राजनीति में धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है, लेकिन इंस्टाग्राम रील्स के दौर में इसका प्रस्तुतीकरण अलग अंदाज ले चुका है.  तेज प्रताप का संदेश स्पष्ट है कि, रोज एक बेलपत्र चढ़ाइए मन साफ रखें और प्रेम भावना से शिव का स्मरण करें. लेकिन राजनीति में हर सार्वजनिक बयान कई स्तरों पर पढ़ा जाता है. आस्था व्यक्तिगत है, पर जब उसे सार्वजनिक मंच से व्यक्त किया जाता है, तो उसके मायने बदल जाते हैं. अब यह जनता पर है कि,वह इसे आध्यात्मिक प्रेरणा मानेया सियासी शैली का अहम हिस्सा? Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

Feb 27, 2026 - 14:30
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‘हर हर महादेव’ के साथ तेज प्रताप यादव का बदला अंदाज़! बताया भोलेनाथ को खुश करने का तरीका? देखें वीडियो
Tej Pratap Yadav Viral Video: बिहार की राजनीति अपने अलग अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले तेज प्रताप यादव एक बार फिर धार्मिक प्रवचन देते दिखाई दिए. इस बार चुनावी नारे की जगह “हर हर महादेव” के उद्घोष के साथ उन्होंने शिवभक्तों को भगवान भोलेनाथ की नियमित पूजा करने का सही तरीका बताया है. 

उन्होंने कहा कि, रोजाना सुबह स्नान के बाद निर्मल मन से भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करने की अपील की. उन्होंने कहा कि, भक्ति दिखावे से नहीं, बल्कि भावना से होनी चाहिए. एक सच्चे भाव से चढ़ाया गया एक बेलपत्र भी महादेव को प्रसन्न कर सकता है. 

Daily Puja Tips: पूजा में कौन सी सामग्री दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं कौन सी नहीं, जानें

बेलपत्र, जल और दूध का महत्व

तेज प्रताप ने वीडियो में परंपरागत पूजा सामग्री का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, शुद्ध जल, दुध और बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित करना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि पवित्रता और समर्पण का प्रतीक भी है. क्योंकि बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है. 

उनका तर्क है कि, नियमित रूप से बेलपत्र अर्पित करने से व्यक्ति के अंदर सकारात्मक ऊर्जा और अनुशासन आता है. कहने का मतलब साफ है कि, मन में द्वेष रखने की बजाए प्रेम भाव से भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए. 

आस्था और सोशल मीडिया का संगम

तेजप्रताप यादव ने धार्मिक अपील के साथ यह भी बताया कि, वह सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो शेयर कर रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग मार्गदर्शन पा सकें.

यहां एक दिलचस्प पहलू उभरता है कि, भक्ति का संदेश और डिजिटल पहुंच, दोनों साथ-साथ में हो रहा है. राजनीति में धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है, लेकिन इंस्टाग्राम रील्स के दौर में इसका प्रस्तुतीकरण अलग अंदाज ले चुका है. 

तेज प्रताप का संदेश स्पष्ट है कि, रोज एक बेलपत्र चढ़ाइए मन साफ रखें और प्रेम भावना से शिव का स्मरण करें. लेकिन राजनीति में हर सार्वजनिक बयान कई स्तरों पर पढ़ा जाता है. आस्था व्यक्तिगत है, पर जब उसे सार्वजनिक मंच से व्यक्त किया जाता है, तो उसके मायने बदल जाते हैं.

अब यह जनता पर है कि,वह इसे आध्यात्मिक प्रेरणा मानेया सियासी शैली का अहम हिस्सा?

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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