सुप्रीम कोर्ट में सबसे पीछे की कुर्सी पर बैठी हैं ममता बनर्जी, कर रहीं खुद SIR के खिलाफ मुकदमा लड़ने की मांग
पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया के खिलाफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं. उन्होंने अपना पक्ष खुद रखने की इजाजत मांगी है. हालांकि, फिलहाल वह कोर्टरूम में सबसे पीछे की सीट पर बैठी हैं. उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख होने के नाते वह सुप्रीम कोर्ट के शिष्टाचार और प्रक्रिया से पूरी तरह वाकिफ हैं और स्थापित नियमों और प्रथाओं के अनुसार ही आचरण करने का वचन देती हैं. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचौली की बेंच मामले पर सुनवाई करेगी. ममता बनर्जी कोर्टरूम में सबसे पीछे की कुर्सी पर बैठी हैं. ममता बनर्जी ने याचिका में मांग की है कि साल 2002 की मतदाता सूची के जरिए मैप्ड किसी मतदाता को लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी श्रेणी के तहत नई लिस्ट से न हटाया जाए. उन्हें त्रुटियों को सुधारने का मौका मिले. याचिका के अनुसार लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी श्रेणी में लगभग 70 लाख नामों को असंगति या वर्तनी के अंतर के चलते नोटिस हुआ है. उन्हें उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर सुधारा जाए. ममता बनर्जी ने मांग की है कि चुनाव आयोग यह साफ करे कि मतदाताओं को लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी श्रेणी में क्यों रखा गया है और उनकी सुनवाई का कार्यक्रम क्या है. उन्होंने कहा कि जिन माइक्रो ऑब्ज़र्वरों की नियुक्ति बिना वैधानिक अधिकार के हुई है, उन्हें वापस लिया जाए. उन्हें ERO के काम में हस्तक्षेप से रोका जाए. ममता बनर्जी ने कहा कि माइक्रो ऑब्जर्वरों को किसी भी वैधानिक शक्ति के प्रयोग से रोका जाए. अब तक उनकी तरफ से उठाए गए सभी कदमों को अवैध घोषित किया जाए. जमीनी जांच के मामलों में तय प्रक्रिया का पालन हो. उन्होंने यह भी मांग की है कि आधार कार्ड, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, पंचायत निवास प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर, सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना का डेटा, भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र और राज्य सरकार से जारी अन्य दस्तावेज स्वीकार किए जाएं. ममता बनर्जी ने कहा कि सभी प्रक्रियाओं की जानकारी चुनाव अधिकारियों को आधिकारिक माध्यमों से मिले. यह व्हाट्सऐप जैसे अनौपचारिक तरीकों से न हो.
पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया के खिलाफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं. उन्होंने अपना पक्ष खुद रखने की इजाजत मांगी है. हालांकि, फिलहाल वह कोर्टरूम में सबसे पीछे की सीट पर बैठी हैं. उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख होने के नाते वह सुप्रीम कोर्ट के शिष्टाचार और प्रक्रिया से पूरी तरह वाकिफ हैं और स्थापित नियमों और प्रथाओं के अनुसार ही आचरण करने का वचन देती हैं.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचौली की बेंच मामले पर सुनवाई करेगी. ममता बनर्जी कोर्टरूम में सबसे पीछे की कुर्सी पर बैठी हैं. ममता बनर्जी ने याचिका में मांग की है कि साल 2002 की मतदाता सूची के जरिए मैप्ड किसी मतदाता को लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी श्रेणी के तहत नई लिस्ट से न हटाया जाए. उन्हें त्रुटियों को सुधारने का मौका मिले. याचिका के अनुसार लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी श्रेणी में लगभग 70 लाख नामों को असंगति या वर्तनी के अंतर के चलते नोटिस हुआ है. उन्हें उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर सुधारा जाए.
ममता बनर्जी ने मांग की है कि चुनाव आयोग यह साफ करे कि मतदाताओं को लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी श्रेणी में क्यों रखा गया है और उनकी सुनवाई का कार्यक्रम क्या है. उन्होंने कहा कि जिन माइक्रो ऑब्ज़र्वरों की नियुक्ति बिना वैधानिक अधिकार के हुई है, उन्हें वापस लिया जाए. उन्हें ERO के काम में हस्तक्षेप से रोका जाए.
ममता बनर्जी ने कहा कि माइक्रो ऑब्जर्वरों को किसी भी वैधानिक शक्ति के प्रयोग से रोका जाए. अब तक उनकी तरफ से उठाए गए सभी कदमों को अवैध घोषित किया जाए. जमीनी जांच के मामलों में तय प्रक्रिया का पालन हो. उन्होंने यह भी मांग की है कि आधार कार्ड, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, पंचायत निवास प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर, सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना का डेटा, भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र और राज्य सरकार से जारी अन्य दस्तावेज स्वीकार किए जाएं.
ममता बनर्जी ने कहा कि सभी प्रक्रियाओं की जानकारी चुनाव अधिकारियों को आधिकारिक माध्यमों से मिले. यह व्हाट्सऐप जैसे अनौपचारिक तरीकों से न हो.
What's Your Reaction?