राहुल गांधी के छात्रों की गूंज पर शशि थरूर बोले, 'इस तरह का...'
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राहुल गांधी के छात्रों से जुड़े अभियान ‘छात्रों की गूंज’ को लेकर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर छात्रों और युवाओं के बीच दिखाई दे रहे उत्साह का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसा जोश किसी भी देश को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है. थरूर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह ऐसा उत्साह है जो देशों को आगे ले जाता है. उन्होंने कहा कि यह ऐसी पीढ़ी है जो अपनी आवाज के साथ-साथ अपना नेतृत्व भी तलाश रही है. This is the kind of enthusiasm that moves nations. A generation finding its voice — and its leader. @incindia @RahulGandhi https://t.co/B61ehRt98q — Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) September 20, 2026 युवाओं की आवाज पर दिया जोर शशि थरूर की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राहुल गांधी लगातार छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को अपने राजनीतिक कार्यक्रमों में उठा रहे हैं. ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत राहुल गांधी ने छात्रों के साथ संवाद किया और पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था तथा युवाओं से जुड़े दूसरे मुद्दों पर बातचीत की है. थरूर ने इससे पहले भी कहा था कि राजनीतिक दलों को नई पीढ़ी की आवाज सुननी चाहिए. उनके मुताबिक, युवाओं को केवल कार्यक्रमों और रैलियों में भीड़ के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें राजनीति में अपनी भूमिका निभाने का अवसर भी मिलना चाहिए. पहले ‘छात्रों की गूंज’ पर की थी टिप्पणी अगस्त में थरूर ने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को लेकर कहा था कि इसे छात्रों से वैसा समर्थन नहीं मिला, जैसा उस समय हुए कुछ दूसरे छात्र प्रदर्शनों को मिला था. उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या स्थापित राजनीतिक दल युवाओं और खासकर Gen Z की सोच और मुद्दों को ठीक से समझ पा रहे हैं. इस बयान के बाद थरूर ने सफाई देते हुए कहा था कि उनकी बात को कांग्रेस या पार्टी नेतृत्व पर हमले के रूप में पेश किया गया. उन्होंने कहा था कि उनका जोर राजनीतिक दलों के सामने मौजूद चुनौती पर था कि वे नई पीढ़ी को राजनीति में जगह कैसे देते हैं. युवाओं और राजनीति के बीच बढ़ती चर्चा थरूर की ताजा टिप्पणी में युवाओं के उत्साह और उनकी राजनीतिक भूमिका पर जोर दिखाई देता है. उन्होंने नई पीढ़ी को अपनी आवाज और नेतृत्व तलाशने वाली पीढ़ी के रूप में बताया है. राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को भी इसी व्यापक बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसमें छात्र अपनी शिक्षा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में लाने की कोशिश कर रहे हैं. राहुल गांधी के कार्यक्रम में विवाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का 19 सितंबर 2026 को इंदौर में हुआ ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम कई वजहों से चर्चा में रहा. कार्यक्रम से पहले आयोजन स्थल और प्रशासनिक नियमों को लेकर विवाद हुआ, जबकि कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित मिमिक्री को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधा. इसके अलावा कार्यक्रम की अनुमति से जुड़ी पुलिस की 31 शर्तों में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की जांच करने वाले वर्मा आयोग का संदर्भ दिए जाने पर भी कांग्रेस ने आपत्ति जताई. कार्यक्रम के दौरान मंच पर एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री की. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में राहुल गांधी इस प्रस्तुति के दौरान हंसते हुए दिखाई दिए. वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा. बीजेपी नेताओं का आरोप है कि प्रस्तुति में प्रधानमंत्री और उनकी दिवंगत मां को लेकर आपत्तिजनक संदर्भ दिए गए.
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राहुल गांधी के छात्रों से जुड़े अभियान ‘छात्रों की गूंज’ को लेकर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर छात्रों और युवाओं के बीच दिखाई दे रहे उत्साह का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसा जोश किसी भी देश को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है.
थरूर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह ऐसा उत्साह है जो देशों को आगे ले जाता है. उन्होंने कहा कि यह ऐसी पीढ़ी है जो अपनी आवाज के साथ-साथ अपना नेतृत्व भी तलाश रही है.
This is the kind of enthusiasm that moves nations. A generation finding its voice — and its leader. @incindia @RahulGandhi https://t.co/B61ehRt98q — Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) September 20, 2026
युवाओं की आवाज पर दिया जोर
शशि थरूर की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राहुल गांधी लगातार छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को अपने राजनीतिक कार्यक्रमों में उठा रहे हैं. ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत राहुल गांधी ने छात्रों के साथ संवाद किया और पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था तथा युवाओं से जुड़े दूसरे मुद्दों पर बातचीत की है. थरूर ने इससे पहले भी कहा था कि राजनीतिक दलों को नई पीढ़ी की आवाज सुननी चाहिए. उनके मुताबिक, युवाओं को केवल कार्यक्रमों और रैलियों में भीड़ के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें राजनीति में अपनी भूमिका निभाने का अवसर भी मिलना चाहिए.
पहले ‘छात्रों की गूंज’ पर की थी टिप्पणी
अगस्त में थरूर ने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को लेकर कहा था कि इसे छात्रों से वैसा समर्थन नहीं मिला, जैसा उस समय हुए कुछ दूसरे छात्र प्रदर्शनों को मिला था. उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या स्थापित राजनीतिक दल युवाओं और खासकर Gen Z की सोच और मुद्दों को ठीक से समझ पा रहे हैं. इस बयान के बाद थरूर ने सफाई देते हुए कहा था कि उनकी बात को कांग्रेस या पार्टी नेतृत्व पर हमले के रूप में पेश किया गया. उन्होंने कहा था कि उनका जोर राजनीतिक दलों के सामने मौजूद चुनौती पर था कि वे नई पीढ़ी को राजनीति में जगह कैसे देते हैं.
युवाओं और राजनीति के बीच बढ़ती चर्चा
थरूर की ताजा टिप्पणी में युवाओं के उत्साह और उनकी राजनीतिक भूमिका पर जोर दिखाई देता है. उन्होंने नई पीढ़ी को अपनी आवाज और नेतृत्व तलाशने वाली पीढ़ी के रूप में बताया है. राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को भी इसी व्यापक बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसमें छात्र अपनी शिक्षा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में लाने की कोशिश कर रहे हैं.
राहुल गांधी के कार्यक्रम में विवाद
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का 19 सितंबर 2026 को इंदौर में हुआ ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम कई वजहों से चर्चा में रहा. कार्यक्रम से पहले आयोजन स्थल और प्रशासनिक नियमों को लेकर विवाद हुआ, जबकि कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित मिमिक्री को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधा. इसके अलावा कार्यक्रम की अनुमति से जुड़ी पुलिस की 31 शर्तों में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की जांच करने वाले वर्मा आयोग का संदर्भ दिए जाने पर भी कांग्रेस ने आपत्ति जताई.
कार्यक्रम के दौरान मंच पर एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री की. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में राहुल गांधी इस प्रस्तुति के दौरान हंसते हुए दिखाई दिए. वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा. बीजेपी नेताओं का आरोप है कि प्रस्तुति में प्रधानमंत्री और उनकी दिवंगत मां को लेकर आपत्तिजनक संदर्भ दिए गए.
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