यूरिन करते वक्त फ्लो रहता है स्लो तो हो जाएं अलर्ट, इस कैंसर का मिलता है सिग्नल

हम अपनी डेली लाइफ में शरीर के कई छोटे-छोटे बदलावों को नजरअंदाज कर देते हैं, खासकर पेशाब यानी यूरिन से जुड़े संकेतों को, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पेशाब के तरीके में आया हल्का-सा फर्क भी कभी-कभी किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती इशारा हो सकता है. अगर आपको कुछ समय से ऐसा महसूस हो रहा है कि यूरिन का फ्लो पहले जैसा तेज नहीं है, पेशाब रुक-रुक कर आता है, या बार-बार बाथरूम की जरूरत महसूस होती है लेकिन राहत नहीं मिलती, तो इन संकेतों को हल्के में लेना सही नहीं है. ऐसे बदलाव किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकते हैं, जिनमें से एक कैंसर है. तो चलिए जानते हैं कि यूरिन करते वक्त फ्लो स्लो हो जाएं तो किस कैंसर का सिग्नल मिलता है.  यूरिन करते वक्त फ्लो स्लो हो जाएं तो किस कैंसर का सिग्नल मिलता है यूरिन करते वक्त फ्लो स्लो हो जाएं तो ब्लैडर कैंसर का सिग्नल मिलता है. ब्लैडर कैंसर वह बीमारी है जिसमें कैंसर की शुरुआत ब्लैडर में होने वाली कोशिकाओं से होती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि मूत्राशय कैंसर के लगभग 90 प्रतिशत मामले एक ही प्रकार के कैंसर, यूरोथेलियल सेल कार्सिनोमा (UCC)  के होते हैं. यह कैंसर  ब्लैडर के अलावा उन नलियों और हिस्सों में भी हो सकता है जिनसे होकर पेशाब शरीर से बाहर निकलता है.  किसे होता है ज्यादा खतरा? डॉक्टरों के अनुसार ब्लैडर कैंसर का सबसे बड़ा जोखिम कारक सिगरेट पीना है. लंबे समय तक स्मोकिंग करने से शरीर में ऐसे रसायन जमा होते हैं जो ब्लैडर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके अलावा भी कई कारण खतरा बढ़ाते हैं, जैसे ब्लैडर में बार-बार इन्फेक्शन या सूजन, रंगों, केमिकल या सॉल्वेंट्स के संपर्क में लंबे समय तक काम करना, कुछ तरह की पुरानी कीमोथेरेपी, बढ़ती उम्र. पुरुषों में यह बीमारी महिलाओं की तुलना में लगभग चार गुना ज्यादा पाई जाती है. हालांकि महिलाएं और युवा भी इससे पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं.  ब्लैडर कैंसर के लक्षण  शरीर कई बार शुरू में हल्के-हल्के संकेत देता है. जैसे पेशाब में खून दिखाई देना, फ्लो स्लो महसूस होना, पेशाब करते समय जलन, बार-बार यूरिन की आना लेकिन पूरा खाली न कर पाना. लेकिन ये लक्षण कई बार यूरिन इन्फेक्शन, बढ़ती उम्र या रोजमर्रा की आदतों से भी जुड़े हो सकते हैं. इसी वजह से लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते और डॉक्टर के पास देर से पहुंचते हैं. अगर आपके साथ इन लक्षणों में से कोई बदलाव लगातार बना हुआ है तो समय रहते यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना बहुत जरूरी है. कई बार शुरुआती अवस्था में ब्लैडर कैंसर का इलाज आसानी से हो सकता है, लेकिन देर होने पर बीमारी बढ़ जाती है. यह भी पढ़ें क्या है सबक्लेड के और इसे क्यों माना जा रहा खतरनाक फ्लू स्ट्रेन, जानें टेंशन में क्यों वैज्ञानिक? Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Nov 22, 2025 - 13:30
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यूरिन करते वक्त फ्लो रहता है स्लो तो हो जाएं अलर्ट, इस कैंसर का मिलता है सिग्नल

हम अपनी डेली लाइफ में शरीर के कई छोटे-छोटे बदलावों को नजरअंदाज कर देते हैं, खासकर पेशाब यानी यूरिन से जुड़े संकेतों को, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पेशाब के तरीके में आया हल्का-सा फर्क भी कभी-कभी किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती इशारा हो सकता है. अगर आपको कुछ समय से ऐसा महसूस हो रहा है कि यूरिन का फ्लो पहले जैसा तेज नहीं है, पेशाब रुक-रुक कर आता है, या बार-बार बाथरूम की जरूरत महसूस होती है लेकिन राहत नहीं मिलती, तो इन संकेतों को हल्के में लेना सही नहीं है. ऐसे बदलाव किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकते हैं, जिनमें से एक कैंसर है. तो चलिए जानते हैं कि यूरिन करते वक्त फ्लो स्लो हो जाएं तो किस कैंसर का सिग्नल मिलता है. 

यूरिन करते वक्त फ्लो स्लो हो जाएं तो किस कैंसर का सिग्नल मिलता है

यूरिन करते वक्त फ्लो स्लो हो जाएं तो ब्लैडर कैंसर का सिग्नल मिलता है. ब्लैडर कैंसर वह बीमारी है जिसमें कैंसर की शुरुआत ब्लैडर में होने वाली कोशिकाओं से होती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि मूत्राशय कैंसर के लगभग 90 प्रतिशत मामले एक ही प्रकार के कैंसर, यूरोथेलियल सेल कार्सिनोमा (UCC)  के होते हैं. यह कैंसर  ब्लैडर के अलावा उन नलियों और हिस्सों में भी हो सकता है जिनसे होकर पेशाब शरीर से बाहर निकलता है. 

किसे होता है ज्यादा खतरा?

डॉक्टरों के अनुसार ब्लैडर कैंसर का सबसे बड़ा जोखिम कारक सिगरेट पीना है. लंबे समय तक स्मोकिंग करने से शरीर में ऐसे रसायन जमा होते हैं जो ब्लैडर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके अलावा भी कई कारण खतरा बढ़ाते हैं, जैसे ब्लैडर में बार-बार इन्फेक्शन या सूजन, रंगों, केमिकल या सॉल्वेंट्स के संपर्क में लंबे समय तक काम करना, कुछ तरह की पुरानी कीमोथेरेपी, बढ़ती उम्र. पुरुषों में यह बीमारी महिलाओं की तुलना में लगभग चार गुना ज्यादा पाई जाती है. हालांकि महिलाएं और युवा भी इससे पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं. 

ब्लैडर कैंसर के लक्षण 

शरीर कई बार शुरू में हल्के-हल्के संकेत देता है. जैसे पेशाब में खून दिखाई देना, फ्लो स्लो महसूस होना, पेशाब करते समय जलन, बार-बार यूरिन की आना लेकिन पूरा खाली न कर पाना. लेकिन ये लक्षण कई बार यूरिन इन्फेक्शन, बढ़ती उम्र या रोजमर्रा की आदतों से भी जुड़े हो सकते हैं. इसी वजह से लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते और डॉक्टर के पास देर से पहुंचते हैं. अगर आपके साथ इन लक्षणों में से कोई बदलाव लगातार बना हुआ है तो समय रहते यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना बहुत जरूरी है. कई बार शुरुआती अवस्था में ब्लैडर कैंसर का इलाज आसानी से हो सकता है, लेकिन देर होने पर बीमारी बढ़ जाती है.

यह भी पढ़ें क्या है सबक्लेड के और इसे क्यों माना जा रहा खतरनाक फ्लू स्ट्रेन, जानें टेंशन में क्यों वैज्ञानिक?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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