'यह समय उचित नहीं...', केरल में SIR प्रक्रिया रोकने की मांग, IUML सुप्रीम कोर्ट पहुंची

देश के कई राज्यों में चल रही स्पेशल इंटरिम रिविजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. अब केरल की इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने भी इस प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. पार्टी का कहना है कि जब राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया पहले से ही चल रही है, ऐसे समय में SIR कराना उचित नहीं है. स्थानीय निकाय चुनाव के बीच SIR गलत समय पर-IUMLIUML ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा कि केरल में 9 और 11 दिसंबर को स्थानीय निकाय चुनाव होने वाले हैं. वहीं SIR के तहत मतदाता सूची का ड्राफ्ट 4 दिसंबर को जारी किया जाना है. पार्टी का कहना है कि एक साथ दोनों प्रक्रियाएं चलने से चुनावी व्यवस्थाओं में गड़बड़ी होगी और यह तय मानकों के खिलाफ है. ECI पर मनमाने फैसले का आरोपपार्टी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने बिना किसी ठोस कारण-जैसे कि फर्जी मतदान, डुप्लिकेट नाम या बड़े पैमाने पर किसी भ्रष्टाचार की पुष्टि किए ही SIR शुरू कर दिया. याचिका में कहा गया है कि पहले से मौजूद वैध मतदाता सूची को पूरी तरह दोबारा जांचने का फैसला 'अनुचित, जल्दबाजी भरा और मनमाना है' IUML का कहना है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act, 1950) कहीं भी वैध मतदाता सूची को 'सामूहिक रूप से हटाने” या 'निष्प्रभावी करने” की अनुमति नहीं देता. पहले भी कई पार्टियां पहुंच चुकी हैं सुप्रीम कोर्टकेरल से पहले, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ सांसद SIR रोकने की मांग के साथ सुप्रीम कोर्ट जा चुके हैं. वहीं तमिलनाडु में DMK ने भी SIR प्रक्रिया के खिलाफ याचिका दायर की हुई है. अब IUML के मामले के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर और गर्माता दिखाई दे रहा है.

Nov 17, 2025 - 15:30
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देश के कई राज्यों में चल रही स्पेशल इंटरिम रिविजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. अब केरल की इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने भी इस प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. पार्टी का कहना है कि जब राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया पहले से ही चल रही है, ऐसे समय में SIR कराना उचित नहीं है.

स्थानीय निकाय चुनाव के बीच SIR गलत समय पर-IUML
IUML ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा कि केरल में 9 और 11 दिसंबर को स्थानीय निकाय चुनाव होने वाले हैं. वहीं SIR के तहत मतदाता सूची का ड्राफ्ट 4 दिसंबर को जारी किया जाना है. पार्टी का कहना है कि एक साथ दोनों प्रक्रियाएं चलने से चुनावी व्यवस्थाओं में गड़बड़ी होगी और यह तय मानकों के खिलाफ है.

ECI पर मनमाने फैसले का आरोप
पार्टी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने बिना किसी ठोस कारण-जैसे कि फर्जी मतदान, डुप्लिकेट नाम या बड़े पैमाने पर किसी भ्रष्टाचार की पुष्टि किए ही SIR शुरू कर दिया. याचिका में कहा गया है कि पहले से मौजूद वैध मतदाता सूची को पूरी तरह दोबारा जांचने का फैसला 'अनुचित, जल्दबाजी भरा और मनमाना है' IUML का कहना है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act, 1950) कहीं भी वैध मतदाता सूची को 'सामूहिक रूप से हटाने” या 'निष्प्रभावी करने” की अनुमति नहीं देता.

पहले भी कई पार्टियां पहुंच चुकी हैं सुप्रीम कोर्ट
केरल से पहले, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ सांसद SIR रोकने की मांग के साथ सुप्रीम कोर्ट जा चुके हैं. वहीं तमिलनाडु में DMK ने भी SIR प्रक्रिया के खिलाफ याचिका दायर की हुई है. अब IUML के मामले के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर और गर्माता दिखाई दे रहा है.

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