‘मुझे जो कहना था, मैंने पहले ही कह दिया’, नक्सलवाद का समर्थन करने के अमित शाह के बयान पर बोले सुदर्शन रेड्डी

उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्षी इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से उन पर नक्सलवाद का समर्थन करने के आरोप को लेकर बहस को आगे बढ़ाने से इनकार कर किया. उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उनके खिलाफ माहौल बनाना चाहते हैं. रेड्डी ने उपराष्ट्रपति पद को राजनीतिक के बजाय उच्च संवैधानिक पद करार देते हुए मंगलवार (26 अगस्त, 2025) को सभी दलों से अपील की कि वे गुण-दोष के आधार पर उनकी उम्मीदवारी पर गौर करें. इंडिया गठबंधन के प्रमुख घटक दलों कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं से विचार-विमर्श के लिए लखनऊ आए रेड्डी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मौजूदगी में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में शाह की ओर से लगाए गए आरोपों पर कहा, ‘‘मैं इस विषय पर पिछले चार दिन से लगातार बात कर रहा हूं. इस समय मेरे पास कहने के लिए कुछ नया नहीं है. यह सवाल अब नया नहीं है. वह (शाह) एक नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहे हैं. मैं पहले ही इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुका हूं और जो कुछ कहना था, वह कह चुका हूं. मैं इस बहस को और आगे नहीं बढ़ाना चाहता. मैं हमेशा संविधान की प्रस्तावना की मूल भावना के साथ खड़ा रहा हूं और आगे भी पूरी मजबूती से खड़ा रहूंगा.” पूर्व न्यायमूर्ति ने कहा, ‘‘मुझे यह बताने की जरूरत नहीं है कि मैं यहां क्यों हूं. मैं उत्तर प्रदेश से संसद के माननीय सदस्यों का सहयोग प्राप्त करने के लिए आया हूं. मेरा मानना है कि उपराष्ट्रपति, जो राष्ट्रपति के बाद देश का दूसरा सर्वोच्च पद है, वह कोई राजनीतिक पद नहीं है, बल्कि एक उच्च संवैधानिक पद है.” मैं विपक्षी दलों के लिए प्रकट करता हूं आभार- बी. सुदर्शन रेड्डी उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग मुझसे पूछते हैं कि मैंने राजनीति अखाड़े में कदम क्यों रखा. मैंने जवाब दिया कि मैंने राजनीति में कदम नहीं रखा है. यह एक उच्च संवैधानिक पद है, जिस पर पहले दार्शनिक, राष्ट्रनेता और शिक्षाविद् रह चुके हैं- जैसे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉ. जाकिर हुसैन, पूर्व राजनयिक डॉ. के. आर. नारायणन और बाद में हामिद अंसारी. ये सभी मेरे लिए प्रेरणा स्रोत हैं. मुझे इस पद के लिए उम्मीदवार बनाया गया है, इसके लिए मैं सभी विपक्षी राजनीतिक दलों का हृदय से आभार प्रकट करता हूं.’’ रेड्डी ने कहा, ‘‘प्रतिपक्ष ने मुझ पर विश्वास जताया है और इसके लिए मैं बहुत आभारी हूं. मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि वे लोग भी मेरी मदद के लिए आगे आ रहे हैं जो इंडिया गठबंधन में शामिल नहीं हैं.’’ रेड्डी ने राजनीतिक दलों से क्या की अपील? उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा, ‘‘मैं सभी राजनीतिक दलों के सदस्यों से आग्रह करता हूं कि वे दलगत भावना से ऊपर उठकर मेरी उम्मीदवारी पर गुण-दोष के आधार पर विचार करें.’’ यह भी पढ़ेंः 'हम रसखान के दोहे गाते हैं और अब्दुल कलाम को सलाम करते हैं, लेकिन...', लव जिहाद पर क्या बोले धीरेंद्र शास्त्री?

Aug 27, 2025 - 00:30
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‘मुझे जो कहना था, मैंने पहले ही कह दिया’, नक्सलवाद का समर्थन करने के अमित शाह के बयान पर बोले सुदर्शन रेड्डी

उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्षी इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से उन पर नक्सलवाद का समर्थन करने के आरोप को लेकर बहस को आगे बढ़ाने से इनकार कर किया. उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उनके खिलाफ माहौल बनाना चाहते हैं.

रेड्डी ने उपराष्ट्रपति पद को राजनीतिक के बजाय उच्च संवैधानिक पद करार देते हुए मंगलवार (26 अगस्त, 2025) को सभी दलों से अपील की कि वे गुण-दोष के आधार पर उनकी उम्मीदवारी पर गौर करें. इंडिया गठबंधन के प्रमुख घटक दलों कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं से विचार-विमर्श के लिए लखनऊ आए रेड्डी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मौजूदगी में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में शाह की ओर से लगाए गए आरोपों पर कहा, ‘‘मैं इस विषय पर पिछले चार दिन से लगातार बात कर रहा हूं. इस समय मेरे पास कहने के लिए कुछ नया नहीं है. यह सवाल अब नया नहीं है. वह (शाह) एक नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहे हैं. मैं पहले ही इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुका हूं और जो कुछ कहना था, वह कह चुका हूं. मैं इस बहस को और आगे नहीं बढ़ाना चाहता. मैं हमेशा संविधान की प्रस्तावना की मूल भावना के साथ खड़ा रहा हूं और आगे भी पूरी मजबूती से खड़ा रहूंगा.”

पूर्व न्यायमूर्ति ने कहा, ‘‘मुझे यह बताने की जरूरत नहीं है कि मैं यहां क्यों हूं. मैं उत्तर प्रदेश से संसद के माननीय सदस्यों का सहयोग प्राप्त करने के लिए आया हूं. मेरा मानना है कि उपराष्ट्रपति, जो राष्ट्रपति के बाद देश का दूसरा सर्वोच्च पद है, वह कोई राजनीतिक पद नहीं है, बल्कि एक उच्च संवैधानिक पद है.”

मैं विपक्षी दलों के लिए प्रकट करता हूं आभार- बी. सुदर्शन रेड्डी

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग मुझसे पूछते हैं कि मैंने राजनीति अखाड़े में कदम क्यों रखा. मैंने जवाब दिया कि मैंने राजनीति में कदम नहीं रखा है. यह एक उच्च संवैधानिक पद है, जिस पर पहले दार्शनिक, राष्ट्रनेता और शिक्षाविद् रह चुके हैं- जैसे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉ. जाकिर हुसैन, पूर्व राजनयिक डॉ. के. आर. नारायणन और बाद में हामिद अंसारी. ये सभी मेरे लिए प्रेरणा स्रोत हैं. मुझे इस पद के लिए उम्मीदवार बनाया गया है, इसके लिए मैं सभी विपक्षी राजनीतिक दलों का हृदय से आभार प्रकट करता हूं.’’

रेड्डी ने कहा, ‘‘प्रतिपक्ष ने मुझ पर विश्वास जताया है और इसके लिए मैं बहुत आभारी हूं. मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि वे लोग भी मेरी मदद के लिए आगे आ रहे हैं जो इंडिया गठबंधन में शामिल नहीं हैं.’’

रेड्डी ने राजनीतिक दलों से क्या की अपील?

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा, ‘‘मैं सभी राजनीतिक दलों के सदस्यों से आग्रह करता हूं कि वे दलगत भावना से ऊपर उठकर मेरी उम्मीदवारी पर गुण-दोष के आधार पर विचार करें.’’

यह भी पढ़ेंः 'हम रसखान के दोहे गाते हैं और अब्दुल कलाम को सलाम करते हैं, लेकिन...', लव जिहाद पर क्या बोले धीरेंद्र शास्त्री?

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