मुख्य द्वार से लेकर पूजा कक्ष तक, छोटे घरों के लिए वास्तु के असरदार उपाय बदल देंगे आपकी किस्मत!

Vastu Tips For Small Home: क्या आप अपने छोटे घर को शांति और सुख का स्थान बनाना चाहते हैं? तो आपतो वास्तु शास्त्र से जुड़े वास्तु के कुछ सरल उपायों को करना चाहिए. वास्तु शास्त्र आपके घर को इस तरह व्यवस्थित करने में मदद करता है, जिससे ऊर्जा का प्रवाह बेहतर होने के साथ संतुलन भी बना रहे.  कई लोग सोचते हैं कि, वास्तु शास्त्र के नियम बड़े घरों पर ही लागू होते हैं, लेकिन यह सच नहीं है. वास्तु शास्त्र छोटे स्थानों में भी उतना ही प्रभावी है, जितना की बड़े घरो में. दिशाओं, व्यवस्थ्याओं और स्थानों का इस्तेमाल करके आप अपने घर के वातावरण को कापी बेहतर बना सकते हैं, भले ही वह कितना छोटा क्यों न हो.  यहां कुछ आसान वास्तु टिप्स दिए गए हैं, जिनका इस्तेमाल करके आप अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा ला सकते हैं.  मुख्य द्वार पर फिटकरी रखने से क्या सच में बदलती है घर की किस्मत? जानिए वास्तु का ये खास उपाय? छोटे घरों का मुख्य द्वार इस बात को सुनिश्चित करें कि आप मुख्य द्वार उत्तर, पूर्व या उत्तर पूर्व दिशा में हो. इसे साफ-सुथरा और बेहतर स्थिति में रखें. घर के मुख्य द्वार पर तोरण या ओम या फिर स्वास्तिक जैसे शुभ चिन्ह लगाएं. बेहतर होगा कि मुख्य द्वार दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर न हो.  शयनकक्ष (Bedroom) की सही दिशा दक्षिण-पश्चिम दिशा है. अपने बिस्तर को दक्षिण-पश्चिम कोने में रखें और सोते समय अपना सिर दक्षिण दिशा की ओर रखें. बिस्तर के ठीक सामने शीशा लगाने से बचें. इससे नींद की गुणवत्ता खराब होने के साथ व्यक्ति पर नकारात्मक ऊर्जा हावी होती है.  रसोईघर आदर्श रूप से देखा जाए तो इसकी सही दिशा (अग्नि कोण) में स्थित होना चाहिए. खाना बनाते समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके गैस स्टोव और सिंक को एक दूसरे के बगल में रखना चाहिए.  भोजन कक्ष के लिए सबसे बेहतर जगह पश्चिम, पूर्व या दक्षिण दिशा है. लकड़ी की मेज का इस्तेमाल करें और भोजन करते समय पूर्व दिशा की ओर मुख करें. भोजन कक्ष को बीम के नीचे या मुख्य द्वार के ठीक सामने रखने से बचें.  सोफा, बिस्तर और अलमारी जैसे भारी फर्नीचर को दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखें. उत्तर-पूर्व दिशा में भारी सामान रखना सही नहीं माना जाता है. इसे हल्का और खुला रखें.  पूजा कक्ष के लिए उत्तर-पूर्व कोना सबसे बेहतर माना जाता है. इस हिस्से में सफेद या पीले हल्के रंगों का इस्तेमाल करना अच्छा रहता है. इसे स्नानघर या सीढ़ियों से दूर रखें. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Feb 21, 2026 - 17:30
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मुख्य द्वार से लेकर पूजा कक्ष तक, छोटे घरों के लिए वास्तु के असरदार उपाय बदल देंगे आपकी किस्मत!

Vastu Tips For Small Home: क्या आप अपने छोटे घर को शांति और सुख का स्थान बनाना चाहते हैं? तो आपतो वास्तु शास्त्र से जुड़े वास्तु के कुछ सरल उपायों को करना चाहिए. वास्तु शास्त्र आपके घर को इस तरह व्यवस्थित करने में मदद करता है, जिससे ऊर्जा का प्रवाह बेहतर होने के साथ संतुलन भी बना रहे. 

कई लोग सोचते हैं कि, वास्तु शास्त्र के नियम बड़े घरों पर ही लागू होते हैं, लेकिन यह सच नहीं है. वास्तु शास्त्र छोटे स्थानों में भी उतना ही प्रभावी है, जितना की बड़े घरो में. दिशाओं, व्यवस्थ्याओं और स्थानों का इस्तेमाल करके आप अपने घर के वातावरण को कापी बेहतर बना सकते हैं, भले ही वह कितना छोटा क्यों न हो. 

यहां कुछ आसान वास्तु टिप्स दिए गए हैं, जिनका इस्तेमाल करके आप अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा ला सकते हैं. 

मुख्य द्वार पर फिटकरी रखने से क्या सच में बदलती है घर की किस्मत? जानिए वास्तु का ये खास उपाय?

छोटे घरों का मुख्य द्वार

इस बात को सुनिश्चित करें कि आप मुख्य द्वार उत्तर, पूर्व या उत्तर पूर्व दिशा में हो. इसे साफ-सुथरा और बेहतर स्थिति में रखें. घर के मुख्य द्वार पर तोरण या ओम या फिर स्वास्तिक जैसे शुभ चिन्ह लगाएं. बेहतर होगा कि मुख्य द्वार दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर न हो. 

शयनकक्ष (Bedroom) की सही दिशा दक्षिण-पश्चिम दिशा है. अपने बिस्तर को दक्षिण-पश्चिम कोने में रखें और सोते समय अपना सिर दक्षिण दिशा की ओर रखें. बिस्तर के ठीक सामने शीशा लगाने से बचें. इससे नींद की गुणवत्ता खराब होने के साथ व्यक्ति पर नकारात्मक ऊर्जा हावी होती है. 

रसोईघर आदर्श रूप से देखा जाए तो इसकी सही दिशा (अग्नि कोण) में स्थित होना चाहिए. खाना बनाते समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके गैस स्टोव और सिंक को एक दूसरे के बगल में रखना चाहिए. 

भोजन कक्ष के लिए सबसे बेहतर जगह पश्चिम, पूर्व या दक्षिण दिशा है. लकड़ी की मेज का इस्तेमाल करें और भोजन करते समय पूर्व दिशा की ओर मुख करें. भोजन कक्ष को बीम के नीचे या मुख्य द्वार के ठीक सामने रखने से बचें. 

सोफा, बिस्तर और अलमारी जैसे भारी फर्नीचर को दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखें. उत्तर-पूर्व दिशा में भारी सामान रखना सही नहीं माना जाता है. इसे हल्का और खुला रखें. 

पूजा कक्ष के लिए उत्तर-पूर्व कोना सबसे बेहतर माना जाता है. इस हिस्से में सफेद या पीले हल्के रंगों का इस्तेमाल करना अच्छा रहता है. इसे स्नानघर या सीढ़ियों से दूर रखें.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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