मजबूत हो रहा रिश्ता, सोमवार को भारत दौरे पर आ रहे जर्मन चांसलर; जानें पीएम मोदी से किन मुद्दों पर होगी बात?

India-Germany Relation: जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की सोमवार से भारत दौरे पर रहेंगे. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन ने इस दौरे को जर्मन विदेश नीति में भारत के बढ़ते महत्व को दिखाता है. इस दौरान चांसलर मर्ज अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे और साबरमती आश्रम जाएंगे. एकरमैन ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री ने खुद अपने शहर में आने के लिए आमंत्रित किया है और पीएम मोदी के गृहनगर में यह निमंत्रण दोस्ती और गर्मजोशी भरे स्वागत का प्रतीक था, जिसकी चांसलर बहुत सराहना करते हैं.  अहमदाबाद के बाद बेंगलुरु जाएंगे मर्ज अहमदाबाद के बाद मर्ज 13 जनवरी को बेंगलुरु जाएंगे. वहां, वह इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस ( Indian Institute of Science) और जर्मन कंपनी बॉश (Bosch) के कैंपस का दौरा करेंगे.  चांसलर के साथ एक बड़ा बिजनेस डेलीगेशन भी है, जिसमें 25 बड़ी और मध्यम आकार की जर्मन कंपनियों के चीफ एग्जीक्यूटिव शामिल हैं. एकरमैन ने कहा कि इस यात्रा में मर्ज की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रक्षा, सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी, शिक्षा और स्किलिंग सहित कई मुद्दों पर चर्चा होगी. इससे दोनों देशों के बीच पार्टनरशिप और मजबूत होगी. इसके अलावा, बदलती भू-राजनीति के बीच विश्व राजनीति भी बात छिड़ सकती है. मर्ज पिछले आठ महीने से जर्मन चांसलर के पद पर हैं.   लगातार बढ़ रहा दोनों के बीच कारोबार  भारत और जर्मनी के बीच सेवाओं और सामानों का लेनदेन लगातार बढ़ रहा है. पिछले साल तक दोनों के बीच ट्रेड वॉल्यूम 50 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया. एकरमैन ने कहा कि यह लेवल दिखाता है कि जर्मनी भारत में कितनी मजबूती से जुड़ा हुआ है. भारत में 2,000 से ज्यादा जर्मन कंपनियां काम करती हैं, जबकि लगभग 750 भारतीय कंपनियों ने जर्मनी में निवेश किया है. दोनों देशों के बीच कारोबार काफी हद तक संतुलित है. सामान के मामले में जर्मनी थोड़ा फायदे में है, जबकि सेवाओं के मामले में भारत थोड़ा फायदे में है. एकरमैन ने कहा कि जर्मन कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी के साथ कारोबार के साथ और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. औसतन, हर हफ्ते दो कंपनियां भारत में अपना कारोबार शुरू करने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स से संपर्क करती हैं. ये भी पढ़ें: मुनाफा कमाना है? तो अगले हफ्ते इन शेयरों पर रखें नजर, लिस्ट में ICICI Lombard से लेकर IREDA जैसे कई नाम 

Jan 11, 2026 - 16:30
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मजबूत हो रहा रिश्ता, सोमवार को भारत दौरे पर आ रहे जर्मन चांसलर; जानें पीएम मोदी से किन मुद्दों पर होगी बात?

India-Germany Relation: जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की सोमवार से भारत दौरे पर रहेंगे. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन ने इस दौरे को जर्मन विदेश नीति में भारत के बढ़ते महत्व को दिखाता है. इस दौरान चांसलर मर्ज अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे और साबरमती आश्रम जाएंगे. एकरमैन ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री ने खुद अपने शहर में आने के लिए आमंत्रित किया है और पीएम मोदी के गृहनगर में यह निमंत्रण दोस्ती और गर्मजोशी भरे स्वागत का प्रतीक था, जिसकी चांसलर बहुत सराहना करते हैं. 

अहमदाबाद के बाद बेंगलुरु जाएंगे मर्ज

अहमदाबाद के बाद मर्ज 13 जनवरी को बेंगलुरु जाएंगे. वहां, वह इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस ( Indian Institute of Science) और जर्मन कंपनी बॉश (Bosch) के कैंपस का दौरा करेंगे.  चांसलर के साथ एक बड़ा बिजनेस डेलीगेशन भी है, जिसमें 25 बड़ी और मध्यम आकार की जर्मन कंपनियों के चीफ एग्जीक्यूटिव शामिल हैं.

एकरमैन ने कहा कि इस यात्रा में मर्ज की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रक्षा, सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी, शिक्षा और स्किलिंग सहित कई मुद्दों पर चर्चा होगी. इससे दोनों देशों के बीच पार्टनरशिप और मजबूत होगी. इसके अलावा, बदलती भू-राजनीति के बीच विश्व राजनीति भी बात छिड़ सकती है. मर्ज पिछले आठ महीने से जर्मन चांसलर के पद पर हैं.  

लगातार बढ़ रहा दोनों के बीच कारोबार 

भारत और जर्मनी के बीच सेवाओं और सामानों का लेनदेन लगातार बढ़ रहा है. पिछले साल तक दोनों के बीच ट्रेड वॉल्यूम 50 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया. एकरमैन ने कहा कि यह लेवल दिखाता है कि जर्मनी भारत में कितनी मजबूती से जुड़ा हुआ है. भारत में 2,000 से ज्यादा जर्मन कंपनियां काम करती हैं, जबकि लगभग 750 भारतीय कंपनियों ने जर्मनी में निवेश किया है.

दोनों देशों के बीच कारोबार काफी हद तक संतुलित है. सामान के मामले में जर्मनी थोड़ा फायदे में है, जबकि सेवाओं के मामले में भारत थोड़ा फायदे में है. एकरमैन ने कहा कि जर्मन कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी के साथ कारोबार के साथ और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. औसतन, हर हफ्ते दो कंपनियां भारत में अपना कारोबार शुरू करने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स से संपर्क करती हैं.

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