भारत 114 राफेल खरीद के बाद भी चीन से कितना पीछे? आंकड़ा देखकर बढ़ जाएगी टेंशन!

भारत ने हाल ही में 114 नए राफेल फाइटर जेट खरीदने का ऐलान क्या किया, हर तरफ खुशी की लहर दौड़ पड़ी. हो भी क्यूं न, यह वही घातक लड़ाकू विमान है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को शिकस्त दी थी. लेकिन एक सच यह भी है कि भारत का सबसे बड़ा पड़ोसी दुश्मन चीन है, जो फाइटर जेट्स के मामले में भारत से काफी आगे है. 114 राफेल आने के बाद भी भारत, चीन के बराबर नहीं आ पाएगा. लेकिन क्यों और कैसे? आइए जानते हैं… सवाल 1: भारत की 114 राफेल की डील क्या है, और इसका स्टेटस क्या है?जवाब: भारत की 114 राफेल डील मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोग्राम का हिस्सा है, जो इंडियन एयर फोर्स को एयर सुपीरियॉरिटी देने के लिए है. 12 फरवरी 2026 को, डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने इस डील के लिए एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (AoN) अप्रूव कर दिया. यह डील फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन कंपनी से है और इसमें 114 राफेल जेट्स खरीदे जाने हैं. 90 जेट्स भारत में बनेंगे, जिसमें 50% इंडिजिनस कंटेंट होगा. 114 राफेल जेट की कुल कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपए है. भारत पहले ही 2016 डील से 36 राफेल इंडक्ट कर चुका है और पिछले साल 26 मैरीन वेरिएंट्स की डील साइन हुई थी. 114 नए राफेल जुड़ने से भारत की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी. यानी भारत अपने सबसे ताकतवर पड़ोसी दुश्मन चीन को टक्कर दे पाएगा. लेकिन रुकिए… पहले यह जान लेते हैं कि भारत और चीन के पास मौजूदा फाइटर जेट्स का स्टेट क्या है. भारत की 114 राफेल डील MRFA प्रोग्राम का हिस्सा है. सवाल 2: भारत के पास कुल कितने 4th जेनरेशन और उससे ऊपर के फाइटर जेट्स हैं?जवाब: ग्लोबल फायरपावर की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 तक, भारत के पास 480 से 485 चौथी पीढ़ी (4th जेनरेशन) और उससे ऊपर के फाइटर जेट्स हैं, जो इंडियन एयर फोर्स की रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं… सुखोई SU-30MKI: यह रूस और भारत का संयुक्त रूप से विकसित 4.5 जेनरेशन का हेवी-ड्यूटी ट्विन-इंजन फाइटर हैं, जो इंडियन एयर फोर्स की सबसे बड़ी ताकत हैं. भारत के पास 263 सुखोई हैं. इसकी सुपरमैन्यूवरेबिलिटी, कैनर्ड डेल्टा विंग डिजाइन और एडवांस्ड एवियोनिक्स सिस्टम इसे एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड हमलों में बेजोड़ बनाते हैं, जहां यह ब्रह्मोस जैसी लॉन्ग-रेंज मिसाइल्स ले जा सकता है. अपग्रेड प्लान के तहत 84 जेट्स को और एडवांस्ड बनाया जा रहा है, जो इसकी थ्रस्ट वेक्टरिंग टेक्नोलॉजी से हवाई युद्ध में जादुई तरीके से खेल पलट सकता है. डसॉल्ट राफेल: फ्रांस का यह 4.5 जेनरेशन का ट्विन-इंजन डेल्टा विंग मल्टी-रोल फाइटर भारत की एयर फोर्स की शान माना जाता है. भारत के पास 36 राफेल जेट्स हैं, जिनमें 28 सिंगल-सीट EH और 8 डबल-सीट DH शामिल हैं. राफेल ऑपरेशन सिंदूर जैसे मिशनों में अपनी ताकत साबित कर चुका है. एडवांस्ड AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम्स एंड मेटियर और स्कैल्प मिसाइल्स से लैस इस जेट में हाई मैन्यूवरेबिलिटी और स्टेल्थ-लाइक फीचर्स भी मौजूद हैं, जो दुश्मन के रडार से बचते हुए सटीक हमले करने में माहिर हैं. आने वाले समय में 114 और राफेल की खरीद से यह फ्लीट और मजबूत होगी, भारत को लॉन्ग-रेंज स्ट्राइक कैपेबिलिटी में नई ऊंचाइयां देगी. HAL तेजस: भारत का चौथी पीढ़ी का स्वदेशी लाइटवेट सिंगल-इंजन डेल्टा विंग फाइटर, जिसके 30 MK-1 वेरिएंट एक्टिव हैं, जो आत्मनिर्भर भारत की उड़ान का सिंबल है. फ्लाई-बाय-वायर कंट्रोल्स, एडवांस्ड AESA रडार अपग्रेड्स और इंटरनल वेपन्स बे से लैस यह जेट मल्टी-रोल मिशनों में किंग है, जिसमें एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग और सटीक हमले शामिल हैं. 141 MK1A वेरिएंट ऑर्डर पर हैं, जो इसकी कम रडार क्रॉस-सेक्शन और हाई-स्पीड परफॉर्मेंस से भारत की एयर डिफेंस को नई गति देंगे. डसॉल्ट मिराज 2000: फ्रांस का चौथी पीढ़ी का सिंगल-इंजन डेल्टा विंग मल्टी-रोल फाइटर, जिसके 36 H/I वेरिएंट भारत में एक्टिव हैं, जो हाई-स्पीड इंटरसेप्शन में अपनी धाक जमाता है. अपग्रेडेड 2000I स्टैंडर्ड में बेहतर एवियोनिक्स और वेपन्स कम्पेटिबिलिटी से यह एयर-टू-ग्राउंड स्ट्राइक्स और रेकॉनिसेंस मिशनों में माहिर है. यह लेजर-गाइडेड बम ले जा सकता है. कारगिल युद्ध में अपनी भूमिका से मशहूर हुआ यह जेट अब भी भारत की एयर सुपीरियॉरिटी को मजबूत रखता है. मिकोयान MiG-29: यह चौथी पीढ़ी का सोवियत यूनियन का ट्विन-इंजन सुपरमैन्यूवरेबल फाइटर है, जिसके 59 जेट्स भारत की एयर फोर्स में एक्टिव हैं. यह एयर डिफेंस में बड़ी भूमिका निभाता है. UPG वेरिएंट में अपग्रेडेड रडार, ग्लास कॉकपिट, और बढ़ी हुई इंजन थ्रस्ट से यह ग्राउंड अटैक तथा इंटरसेप्शन में माहिर है, जहां यह BVR मिसाइल्स का इस्तेमाल करता है. यह जेट भारत की सीमाओं पर तैनात रहकर दुश्मन की हरकतों पर नजर रखता है और युद्ध में तेज रिस्पॉन्स देता है. MiG-29 भारत की सीमाओं पर तैनात रहकर दुश्मन की हरकतों पर नजर रखता है. सवाल 3: चीन के पास कुल कितने 4th जेनरेशन और उससे ऊपर के फाइटर जेट्स हैं?जवाब: ग्लोबल फायरपावर की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 तक, चीन के पास लगभग 1,600 से 1,800 4th जेनरेशन और उससे ऊपर के फाइटर जेट्स हैं, जो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती और आधुनिक हवाई ताकत बनाते हैं… चेंगदू J-20: चीन का प्रमुख 5th जेनरेशन स्टेल्थ फाइटर है, जिसके 300 से ज्यादा जेट्स फरवरी 2026 में एक्टिव हैं और यह संख्या तेजी से बढ़ रही है. ट्विन-इंजन, हेवी-वेट एयर सुपीरियॉरिटी फाइटर में स्टेल्थ डिजाइन, AESA रडार, सुपरक्रूज (WS-15 इंजन के साथ) और लॉन्ग-रेंज PL-15/PL-21 मिसाइल्स शामिल हैं. इससे यह दुश्मन के रडार से बचते हुए 100 किमी दूर से टारगेट को तबाह कर सकता है. नए वैरिएंट्स में मैरीटाइम स्ट्राइक और ट्विन-सीट J-20S शामिल हैं, जो PLAAF को इंडो-पैसिफिक में मजबूत डिटरेंस देते हैं. शेनयांग J-16: 4.5 जेनरेशन मल्टी-रोल स्ट्राइक फाइटर, जिसके लगभग 45

Feb 13, 2026 - 20:30
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भारत 114 राफेल खरीद के बाद भी चीन से कितना पीछे? आंकड़ा देखकर बढ़ जाएगी टेंशन!

भारत ने हाल ही में 114 नए राफेल फाइटर जेट खरीदने का ऐलान क्या किया, हर तरफ खुशी की लहर दौड़ पड़ी. हो भी क्यूं न, यह वही घातक लड़ाकू विमान है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को शिकस्त दी थी. लेकिन एक सच यह भी है कि भारत का सबसे बड़ा पड़ोसी दुश्मन चीन है, जो फाइटर जेट्स के मामले में भारत से काफी आगे है. 114 राफेल आने के बाद भी भारत, चीन के बराबर नहीं आ पाएगा. लेकिन क्यों और कैसे? आइए जानते हैं…

सवाल 1: भारत की 114 राफेल की डील क्या है, और इसका स्टेटस क्या है?
जवाब: भारत की 114 राफेल डील मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोग्राम का हिस्सा है, जो इंडियन एयर फोर्स को एयर सुपीरियॉरिटी देने के लिए है. 12 फरवरी 2026 को, डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने इस डील के लिए एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (AoN) अप्रूव कर दिया. यह डील फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन कंपनी से है और इसमें 114 राफेल जेट्स खरीदे जाने हैं. 90 जेट्स भारत में बनेंगे, जिसमें 50% इंडिजिनस कंटेंट होगा. 114 राफेल जेट की कुल कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपए है.

भारत पहले ही 2016 डील से 36 राफेल इंडक्ट कर चुका है और पिछले साल 26 मैरीन वेरिएंट्स की डील साइन हुई थी. 114 नए राफेल जुड़ने से भारत की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी. यानी भारत अपने सबसे ताकतवर पड़ोसी दुश्मन चीन को टक्कर दे पाएगा. लेकिन रुकिए… पहले यह जान लेते हैं कि भारत और चीन के पास मौजूदा फाइटर जेट्स का स्टेट क्या है.

भारत की 114 राफेल डील MRFA प्रोग्राम का हिस्सा है.
भारत की 114 राफेल डील MRFA प्रोग्राम का हिस्सा है.

सवाल 2: भारत के पास कुल कितने 4th जेनरेशन और उससे ऊपर के फाइटर जेट्स हैं?
जवाब: ग्लोबल फायरपावर की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 तक, भारत के पास 480 से 485 चौथी पीढ़ी (4th जेनरेशन) और उससे ऊपर के फाइटर जेट्स हैं, जो इंडियन एयर फोर्स की रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं…

  • सुखोई SU-30MKI: यह रूस और भारत का संयुक्त रूप से विकसित 4.5 जेनरेशन का हेवी-ड्यूटी ट्विन-इंजन फाइटर हैं, जो इंडियन एयर फोर्स की सबसे बड़ी ताकत हैं. भारत के पास 263 सुखोई हैं. इसकी सुपरमैन्यूवरेबिलिटी, कैनर्ड डेल्टा विंग डिजाइन और एडवांस्ड एवियोनिक्स सिस्टम इसे एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड हमलों में बेजोड़ बनाते हैं, जहां यह ब्रह्मोस जैसी लॉन्ग-रेंज मिसाइल्स ले जा सकता है. अपग्रेड प्लान के तहत 84 जेट्स को और एडवांस्ड बनाया जा रहा है, जो इसकी थ्रस्ट वेक्टरिंग टेक्नोलॉजी से हवाई युद्ध में जादुई तरीके से खेल पलट सकता है.
  • डसॉल्ट राफेल: फ्रांस का यह 4.5 जेनरेशन का ट्विन-इंजन डेल्टा विंग मल्टी-रोल फाइटर भारत की एयर फोर्स की शान माना जाता है. भारत के पास 36 राफेल जेट्स हैं, जिनमें 28 सिंगल-सीट EH और 8 डबल-सीट DH शामिल हैं. राफेल ऑपरेशन सिंदूर जैसे मिशनों में अपनी ताकत साबित कर चुका है. एडवांस्ड AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम्स एंड मेटियर और स्कैल्प मिसाइल्स से लैस इस जेट में हाई मैन्यूवरेबिलिटी और स्टेल्थ-लाइक फीचर्स भी मौजूद हैं, जो दुश्मन के रडार से बचते हुए सटीक हमले करने में माहिर हैं. आने वाले समय में 114 और राफेल की खरीद से यह फ्लीट और मजबूत होगी, भारत को लॉन्ग-रेंज स्ट्राइक कैपेबिलिटी में नई ऊंचाइयां देगी.
  • HAL तेजस: भारत का चौथी पीढ़ी का स्वदेशी लाइटवेट सिंगल-इंजन डेल्टा विंग फाइटर, जिसके 30 MK-1 वेरिएंट एक्टिव हैं, जो आत्मनिर्भर भारत की उड़ान का सिंबल है. फ्लाई-बाय-वायर कंट्रोल्स, एडवांस्ड AESA रडार अपग्रेड्स और इंटरनल वेपन्स बे से लैस यह जेट मल्टी-रोल मिशनों में किंग है, जिसमें एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग और सटीक हमले शामिल हैं. 141 MK1A वेरिएंट ऑर्डर पर हैं, जो इसकी कम रडार क्रॉस-सेक्शन और हाई-स्पीड परफॉर्मेंस से भारत की एयर डिफेंस को नई गति देंगे.
  • डसॉल्ट मिराज 2000: फ्रांस का चौथी पीढ़ी का सिंगल-इंजन डेल्टा विंग मल्टी-रोल फाइटर, जिसके 36 H/I वेरिएंट भारत में एक्टिव हैं, जो हाई-स्पीड इंटरसेप्शन में अपनी धाक जमाता है. अपग्रेडेड 2000I स्टैंडर्ड में बेहतर एवियोनिक्स और वेपन्स कम्पेटिबिलिटी से यह एयर-टू-ग्राउंड स्ट्राइक्स और रेकॉनिसेंस मिशनों में माहिर है. यह लेजर-गाइडेड बम ले जा सकता है. कारगिल युद्ध में अपनी भूमिका से मशहूर हुआ यह जेट अब भी भारत की एयर सुपीरियॉरिटी को मजबूत रखता है.
  • मिकोयान MiG-29: यह चौथी पीढ़ी का सोवियत यूनियन का ट्विन-इंजन सुपरमैन्यूवरेबल फाइटर है, जिसके 59 जेट्स भारत की एयर फोर्स में एक्टिव हैं. यह एयर डिफेंस में बड़ी भूमिका निभाता है. UPG वेरिएंट में अपग्रेडेड रडार, ग्लास कॉकपिट, और बढ़ी हुई इंजन थ्रस्ट से यह ग्राउंड अटैक तथा इंटरसेप्शन में माहिर है, जहां यह BVR मिसाइल्स का इस्तेमाल करता है. यह जेट भारत की सीमाओं पर तैनात रहकर दुश्मन की हरकतों पर नजर रखता है और युद्ध में तेज रिस्पॉन्स देता है.
MiG-29 भारत की सीमाओं पर तैनात रहकर दुश्मन की हरकतों पर नजर रखता है.
MiG-29 भारत की सीमाओं पर तैनात रहकर दुश्मन की हरकतों पर नजर रखता है.

सवाल 3: चीन के पास कुल कितने 4th जेनरेशन और उससे ऊपर के फाइटर जेट्स हैं?
जवाब: ग्लोबल फायरपावर की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 तक, चीन के पास लगभग 1,600 से 1,800 4th जेनरेशन और उससे ऊपर के फाइटर जेट्स हैं, जो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती और आधुनिक हवाई ताकत बनाते हैं…

  • चेंगदू J-20: चीन का प्रमुख 5th जेनरेशन स्टेल्थ फाइटर है, जिसके 300 से ज्यादा जेट्स फरवरी 2026 में एक्टिव हैं और यह संख्या तेजी से बढ़ रही है. ट्विन-इंजन, हेवी-वेट एयर सुपीरियॉरिटी फाइटर में स्टेल्थ डिजाइन, AESA रडार, सुपरक्रूज (WS-15 इंजन के साथ) और लॉन्ग-रेंज PL-15/PL-21 मिसाइल्स शामिल हैं. इससे यह दुश्मन के रडार से बचते हुए 100 किमी दूर से टारगेट को तबाह कर सकता है. नए वैरिएंट्स में मैरीटाइम स्ट्राइक और ट्विन-सीट J-20S शामिल हैं, जो PLAAF को इंडो-पैसिफिक में मजबूत डिटरेंस देते हैं.
  • शेनयांग J-16: 4.5 जेनरेशन मल्टी-रोल स्ट्राइक फाइटर, जिसके लगभग 450 जेट्स सक्रिय हैं और 2030 तक 900 तक पहुंचने का अनुमान है. SU-30 के आधार पर विकसित यह ट्विन-सीट जेट AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम्स और बड़े वेपन्स पेलोड (एंटी-शिप, ग्राउंड अटैक) से लैस है, जो इसे हाई-स्पीड और लॉन्ग-रेंज ऑपरेशंस में माहिर बनाता है. यह PLAAF की मुख्य मल्टी-रोल ताकत है, जो एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड दोनों मिशनों में माहिर है.
  • चेंगदू J-10: 4th/4.5 जेनरेशन लाइटवेट मल्टी-रोल फाइटर है, जिसके 600 से ज्यादा जेट्स सर्विस में हैं. सिंगल-इंजन, डेल्टा-कैनर्ड डिजाइन वाला यह जेट हाई मैन्यूवरेबिलिटी, AESA रडार और PL-15 जैसी BVR मिसाइल्स से लैस है. यह खूबियां इसे एयर डिफेंस और ग्राउंड अटैक में माहिर बनाता है. J-10C वैरिएंट सबसे एडवांस्ड है और PLAAF की संख्या में सबसे बड़ा हिस्सा रखता है.

 

चीनी सेना में 600 से ज्यादा चेंगदू J10 सर्विस में हैं.
चीनी सेना में 600 से ज्यादा चेंगदू J10 सर्विस में हैं.
  • शेनयांग J-11: 4th जेनरेशन एयर सुपीरियॉरिटी फाइटर जेट है, जिसकी संख्या 400 के करीब है. ट्विन-इंजन, हेवी फाइटर में एडवांस्ड एवियोनिक्स, थ्रस्ट वेक्टरिंग और लॉन्ग-रेंज मिसाइल्स शामिल हैं, जो इसे लॉन्ग-रेंज इंटरसेप्शन में मजबूत बनाते हैं. हालांकि पुराने वैरिएंट्स को धीरे-धीरे रिटायर किया जा रहा है, लेकिन अपग्रेडेड J-11B अभी भी बड़ी जिम्मेदारी संभालते हैं.
  • सुखोई Su-30MKK/MK2 और Su-35S: रूसी मूल के चौथी पीढ़ी से ऊपर के जेनरेशन मल्टी-रोल फाइटर जेट्स हैं, जिनकी कुल संख्या 150 से ज्यादा है. ये हाई मैन्यूवरेबिलिटी, लॉन्ग-रेंज रडार और मल्टी-रोल कैपेबिलिटी से लैस हैं, लेकिन चीन अब इन्हें धीरे-धीरे घरेलू J-16 से रिप्लेस कर रहा है. ये अभी भी ट्रेनिंग और स्पेशल मिशन्स में काम आते हैं.

सवाल 4: तो क्या 114 राफेल आने के बाद भी भारत चीन से पीछे रहेगा और क्यों?
जवाब: 114 राफेल आने के बाद भारत के पास कुल 176 राफेल जेट्स हो जाएंगे और कुल फाइटर जेट्स का बेड़ा करीब 600 से ऊपर पहुंच जाएगा. लेकिन चीन से पीछे रहने का मुख्य कारण चीन की न्यूमेरिकल सुपीरियॉरिटी है, जहां उसके पास पहले से 1,800 से ज्यादा फाइटर जेट्स हैं.

चीन हर साल 200 से ज्यादा नए चौथी और पांचवी पीढ़ी के जेट्स बना रहा है. चीन के पास 300 से ज्यादा J-20 जैसे 5th जेनरेशन जेट्स हैं, जो स्टेल्थ और लॉन्ग-रेंज स्ट्राइक्स में भारत के किसी जेट से आगे हैं, जबकि भारत के पास अभी कोई 5th जेनरेशन जेट नहीं है.

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रेटजिक स्टडीज (IISS) की रिपोर्ट के मुताबिक, राफेल 4.5 जेनरेशन है, जो J-10 या J-11 से बेहतर हैं, लेकिन J-20 की स्टेल्थ और सेंसर फ्यूजन से मुकाबला करना मुश्किल होगा. साथ ही, इंडियन एयर फोर्स की स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ अभी 30 है, जबकि सैंक्शन्ड 42 है और चीन-पाकिस्तान की दो-फ्रंट चैलेंज के कारण भारत को और जेट्स की जरूरत है.

सवाल 5: क्या भारत की यह स्थिति कभी बदल पाएगी? आगे क्या होगा?
जवाब: HAL चेयरमैन डॉ. डी. के. सुनील की 25 जून 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 तक 6 तेजस डिलीवर होंगे. इससे भारत की स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ 42 पहुंच जाएगी और चीन-पाकिस्तान बॉर्डर पर 450 जेट्स डिप्लॉय हो सकेंगे. लेकिन चीन 6th जेनरेशन जेट्स पर काम कर रहा है, जो AI और हाइपरसोनिक स्पीड वाले होंगे. आने वाले सालों में भारत की डिटरेंस कैपेबिलिटी बढ़ेगी, जैसे ऑपरेशन सिंदूर (2025) में राफेल ने दिखाया था, लेकिन अगर चीन की प्रोडक्शन स्पीड जारी रही, तो भारत को और इंपोर्ट या इंडिजिनस प्रोग्राम्स तेज करने पड़ेंगे, वरना एयर सुपीरियॉरिटी में गैप बना रहेगा.

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी

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