ब्लड कैंसर के इलाज के लिए नई थेरेपी बनाएंगी भारत बायोटेक की कंपनी और वेजेन बायो
भारत में ब्लड कैंसर के इलाज को बेहतर बनाने के लिए एक नई साझेदारी हुई है. भारत बायोटेक की सहायक कंपनी न्यूसेलियन थेराप्यूटिक्स ने हैदराबाद की वेजेन बायो के साथ हाथ मिलाया है. दोनों कंपनियां मल्टीपल मायलोमा नाम के ब्लड कैंसर के इलाज के लिए एक खास थेरेपी बनाने पर काम करेंगी. इस थेरेपी का नाम VL-2511 है. कंपनियों का लक्ष्य इसे 2028 तक बाजार में लाने की दिशा में आगे बढ़ना है. क्या है मल्टीपल मायलोमा बीमारी? मल्टीपल मायलोमा एक तरह का ब्लड कैंसर है. इसमें शरीर की कुछ सफेद रक्त कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं. ये कोशिकाएं बोन मैरो यानी हड्डियों के अंदर मौजूद उस हिस्से में पाई जाती हैं, जहां खून बनता है. इस बीमारी से हड्डियों में दर्द, थकान, बार-बार संक्रमण और किडनी से जुड़ी समस्याएं होती हैं. कुछ मरीजों में मौजूदा इलाज से बीमारी पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाती. ऐसे में नई दवाओं और इलाज के तरीकों पर काम किया जा रहा है. यह भी पढ़ें : Cancer Medicines Price Cut: 137 कैंसर दवाएं 70% तक सस्ती, जानिए जेब पर कितना पड़ेगा असर? कैसे काम करती है CAR-T थेरेपी? CAR-T एक खास तरह का इलाज है, जिसमें मरीज के शरीर की रोगों से लड़ने वाली कोशिकाओं का इस्तेमाल किया जाता है. सबसे पहले मरीज के शरीर से टी-सेल्स नाम की कोशिकाएं निकाली जाती हैं. फिर प्रयोगशाला में उनमें बदलाव करके उन्हें कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उन पर हमला करने के लिए तैयार किया जाता है. इसके बाद इन कोशिकाओं को मरीज के शरीर में वापस पहुंचाया जाता है. वेजेन बायो की VL-2511 थेरेपी को कैंसर कोशिकाओं में मौजूद BCMA और CD19 नाम के दो प्रोटीन को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है. इसका मकसद कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन पर हमला करना है. यह थेरेपी विकास और जांच के चरण में है. 2028 तक इलाज लाने का लक्ष्य इस साझेदारी में वेजेन बायो थेरेपी से जुड़ी तकनीक देगी, जबकि न्यूसेलियन इसे बनाने की प्रक्रिया विकसित करेगी. कंपनी अपनी हैदराबाद स्थित विशेष सुविधा में इस थेरेपी को तैयार करने और आगे बड़े स्तर पर इसका उत्पादन करने की योजना पर काम करेगी. इस थेरेपी पर चीन में क्लिनिकल विकास का काम हो चुका है और अमेरिका में भी इसे विकसित किया जा रहा है. भारत में इसे आगे की जांच और क्लिनिकल ट्रायल के लिए तैयार करने की योजना है. कंपनियों ने 2028 तक इसे बाजार में लाने का लक्ष्य रखा है. साथ ही इसे सस्ता बनाने की पूरी कोशिश की जाएगी. यह भी पढ़ें :रात को बार-बार लग रहा पेशाब? हो सकती है ये गंभीर समस्या
भारत में ब्लड कैंसर के इलाज को बेहतर बनाने के लिए एक नई साझेदारी हुई है. भारत बायोटेक की सहायक कंपनी न्यूसेलियन थेराप्यूटिक्स ने हैदराबाद की वेजेन बायो के साथ हाथ मिलाया है. दोनों कंपनियां मल्टीपल मायलोमा नाम के ब्लड कैंसर के इलाज के लिए एक खास थेरेपी बनाने पर काम करेंगी. इस थेरेपी का नाम VL-2511 है. कंपनियों का लक्ष्य इसे 2028 तक बाजार में लाने की दिशा में आगे बढ़ना है.
क्या है मल्टीपल मायलोमा बीमारी?
मल्टीपल मायलोमा एक तरह का ब्लड कैंसर है. इसमें शरीर की कुछ सफेद रक्त कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं. ये कोशिकाएं बोन मैरो यानी हड्डियों के अंदर मौजूद उस हिस्से में पाई जाती हैं, जहां खून बनता है. इस बीमारी से हड्डियों में दर्द, थकान, बार-बार संक्रमण और किडनी से जुड़ी समस्याएं होती हैं. कुछ मरीजों में मौजूदा इलाज से बीमारी पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाती. ऐसे में नई दवाओं और इलाज के तरीकों पर काम किया जा रहा है.
यह भी पढ़ें : Cancer Medicines Price Cut: 137 कैंसर दवाएं 70% तक सस्ती, जानिए जेब पर कितना पड़ेगा असर?
कैसे काम करती है CAR-T थेरेपी?
CAR-T एक खास तरह का इलाज है, जिसमें मरीज के शरीर की रोगों से लड़ने वाली कोशिकाओं का इस्तेमाल किया जाता है. सबसे पहले मरीज के शरीर से टी-सेल्स नाम की कोशिकाएं निकाली जाती हैं. फिर प्रयोगशाला में उनमें बदलाव करके उन्हें कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उन पर हमला करने के लिए तैयार किया जाता है. इसके बाद इन कोशिकाओं को मरीज के शरीर में वापस पहुंचाया जाता है.
वेजेन बायो की VL-2511 थेरेपी को कैंसर कोशिकाओं में मौजूद BCMA और CD19 नाम के दो प्रोटीन को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है. इसका मकसद कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन पर हमला करना है. यह थेरेपी विकास और जांच के चरण में है.
2028 तक इलाज लाने का लक्ष्य
इस साझेदारी में वेजेन बायो थेरेपी से जुड़ी तकनीक देगी, जबकि न्यूसेलियन इसे बनाने की प्रक्रिया विकसित करेगी. कंपनी अपनी हैदराबाद स्थित विशेष सुविधा में इस थेरेपी को तैयार करने और आगे बड़े स्तर पर इसका उत्पादन करने की योजना पर काम करेगी. इस थेरेपी पर चीन में क्लिनिकल विकास का काम हो चुका है और अमेरिका में भी इसे विकसित किया जा रहा है. भारत में इसे आगे की जांच और क्लिनिकल ट्रायल के लिए तैयार करने की योजना है. कंपनियों ने 2028 तक इसे बाजार में लाने का लक्ष्य रखा है. साथ ही इसे सस्ता बनाने की पूरी कोशिश की जाएगी.
यह भी पढ़ें :रात को बार-बार लग रहा पेशाब? हो सकती है ये गंभीर समस्या
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