बीमारी से पहले बचाव पर जोर, जेपी नड्डा ने बताया नया हेल्थ मॉडल

देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में पिछले कुछ वर्षों में बीमारी के इलाज के साथ-साथ बीमारी की रोकथाम और शुरुआती पहचान पर खास जोर दिया गया है. ABP Health Conclave में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि 2017 के बाद प्रिवेंटिव हेल्थ और अर्ली डिटेक्शन को स्वास्थ्य व्यवस्था में प्राथमिकता दी गई. इसका मकसद बीमारी गंभीर होने से पहले उसकी पहचान करना और समय रहते इलाज शुरू करना है. नड्डा के मुताबिक, 140 करोड़ की आबादी वाले देश में स्वास्थ्य सेवाओं को सिर्फ बड़े अस्पतालों तक सीमित रखने के बजाय गांव स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया गया. आरोग्य मंदिरों के जरिए 30 साल से अधिक उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है. इनमें ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, सर्विक्स कैंसर के साथ डायबिटीज और हाइपरटेंशन की जांच शामिल है. करोड़ों लोगों की स्क्रीनिंग नड्डा ने बताया कि 2018 से चल रही स्क्रीनिंग के तहत करीब 44 करोड़ लोगों की हाइपरटेंशन जांच की गई और लगभग 7.6 करोड़ लोगों में इसकी पहचान हुई. इसी तरह करीब 44 करोड़ लोगों की डायबिटीज स्क्रीनिंग हुई, जिसमें लगभग 5 करोड़ लोगों में बीमारी की पहचान हुई. कैंसर स्क्रीनिंग के आंकड़े भी बड़े हैं. ओरल कैंसर के लिए 37.7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें करीब 2.2 लाख लोगों में बीमारी की पहचान हुई. ब्रेस्ट कैंसर की 17.7 करोड़ स्क्रीनिंग में लगभग 99 हजार मामलों की पहचान हुई, जबकि सर्विक्स कैंसर की 19.8 करोड़ स्क्रीनिंग में करीब 1 लाख मामले सामने आए. इसका मतलब है कि इतने लोगों की बिमारी को शुरुआती स्तर पर ही पहचान लिया गया और उनका इलाज शुरु कर दिया गया. यह भी पढ़ें: पैरों के नाखून के साइड में जमा गंदगी को निकालने का ये है सबसे आसान तरीका बच्चे के जन्म से 16 साल तक वैक्सीनेशन पर नजर नड्डा ने हेल्थ सिस्टम में मां और बच्चे की निगरानी को भी महत्वपूर्ण बताया. उनके मुताबिक, भारत सरकार के कार्यक्रम के तहत बच्चे के जन्म से लेकर 16 साल की उम्र तक 11 वैक्सीनेशन दिए जाते हैं. इसका उद्देश्य बच्चों को गंभीर बीमारियों से सुरक्षा देना है. वहीं गर्भवती महिलाओं के लिए भी स्वास्थ्य निगरानी का पूरा सिस्टम बनाया गया है. सामान्य गर्भावस्था में पांच चेकअप और दो वैक्सीनेशन का प्रावधान है. अगर महिला हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में आती है तो उसकी निगरानी और बढ़ाई जाती है और आठ चेकअप किए जाते हैं. सरकारी अस्पतालों में बढ़ी डिलीवरी की हिस्सेदारी मातृ स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों में भी बदलाव का जिक्र नड्डा ने किया. उनके मुताबिक, 2014 में करीब 78 परसेंट डिलीवरी सरकारी अस्पतालों में होती थीं. वहीं 2023-24 के आंकड़ों में यह हिस्सेदारी बढ़कर 90.6 परसेंट हो गई है. वहीं सी-सेक्शन से होने वाली डिलवरी में मां के ऑपरेशन का सारा खर्च सरकार द्वारा उठाया जाता है. यह भी पढ़ें: Cancer Medicines Price Cut: 137 कैंसर दवाएं 70% तक सस्ती, जानिए जेब पर कितना पड़ेगा असर?

Oct 22, 2026 - 01:30
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बीमारी से पहले बचाव पर जोर, जेपी नड्डा ने बताया नया हेल्थ मॉडल

देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में पिछले कुछ वर्षों में बीमारी के इलाज के साथ-साथ बीमारी की रोकथाम और शुरुआती पहचान पर खास जोर दिया गया है. ABP Health Conclave में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि 2017 के बाद प्रिवेंटिव हेल्थ और अर्ली डिटेक्शन को स्वास्थ्य व्यवस्था में प्राथमिकता दी गई. इसका मकसद बीमारी गंभीर होने से पहले उसकी पहचान करना और समय रहते इलाज शुरू करना है.

नड्डा के मुताबिक, 140 करोड़ की आबादी वाले देश में स्वास्थ्य सेवाओं को सिर्फ बड़े अस्पतालों तक सीमित रखने के बजाय गांव स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया गया. आरोग्य मंदिरों के जरिए 30 साल से अधिक उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है. इनमें ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, सर्विक्स कैंसर के साथ डायबिटीज और हाइपरटेंशन की जांच शामिल है.

करोड़ों लोगों की स्क्रीनिंग

नड्डा ने बताया कि 2018 से चल रही स्क्रीनिंग के तहत करीब 44 करोड़ लोगों की हाइपरटेंशन जांच की गई और लगभग 7.6 करोड़ लोगों में इसकी पहचान हुई. इसी तरह करीब 44 करोड़ लोगों की डायबिटीज स्क्रीनिंग हुई, जिसमें लगभग 5 करोड़ लोगों में बीमारी की पहचान हुई. कैंसर स्क्रीनिंग के आंकड़े भी बड़े हैं. ओरल कैंसर के लिए 37.7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें करीब 2.2 लाख लोगों में बीमारी की पहचान हुई. ब्रेस्ट कैंसर की 17.7 करोड़ स्क्रीनिंग में लगभग 99 हजार मामलों की पहचान हुई, जबकि सर्विक्स कैंसर की 19.8 करोड़ स्क्रीनिंग में करीब 1 लाख मामले सामने आए. इसका मतलब है कि इतने लोगों की बिमारी को शुरुआती स्तर पर ही पहचान लिया गया और उनका इलाज शुरु कर दिया गया.

यह भी पढ़ें: पैरों के नाखून के साइड में जमा गंदगी को निकालने का ये है सबसे आसान तरीका

बच्चे के जन्म से 16 साल तक वैक्सीनेशन पर नजर

नड्डा ने हेल्थ सिस्टम में मां और बच्चे की निगरानी को भी महत्वपूर्ण बताया. उनके मुताबिक, भारत सरकार के कार्यक्रम के तहत बच्चे के जन्म से लेकर 16 साल की उम्र तक 11 वैक्सीनेशन दिए जाते हैं. इसका उद्देश्य बच्चों को गंभीर बीमारियों से सुरक्षा देना है. वहीं गर्भवती महिलाओं के लिए भी स्वास्थ्य निगरानी का पूरा सिस्टम बनाया गया है. सामान्य गर्भावस्था में पांच चेकअप और दो वैक्सीनेशन का प्रावधान है. अगर महिला हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में आती है तो उसकी निगरानी और बढ़ाई जाती है और आठ चेकअप किए जाते हैं.

सरकारी अस्पतालों में बढ़ी डिलीवरी की हिस्सेदारी

मातृ स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों में भी बदलाव का जिक्र नड्डा ने किया. उनके मुताबिक, 2014 में करीब 78 परसेंट डिलीवरी सरकारी अस्पतालों में होती थीं. वहीं 2023-24 के आंकड़ों में यह हिस्सेदारी बढ़कर 90.6 परसेंट हो गई है. वहीं सी-सेक्शन से होने वाली डिलवरी में मां के ऑपरेशन का सारा खर्च सरकार द्वारा उठाया जाता है.

यह भी पढ़ें: Cancer Medicines Price Cut: 137 कैंसर दवाएं 70% तक सस्ती, जानिए जेब पर कितना पड़ेगा असर?

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