बदल गए AI गेम के नियम! पोस्ट करने से पहले जान लें वरना पड़ सकता है भारी जुर्माना

AI Content: भारत सरकार ने AI से तैयार किए गए कंटेंट को लेकर बड़े बदलाव लागू कर दिए हैं. 20 फरवरी से ये नियम आधिकारिक रूप से प्रभाव में आ चुके हैं. अब अगर कोई व्यक्ति सोशल मीडिया या किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर AI से बना कंटेंट साझा करता है तो उसे तय दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा. यह संशोधन आईटी मंत्रालय द्वारा Information Technology (Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 में किया गया है. सरकार ने साफ किया है कि AI या सिंथेटिक कंटेंट किसे माना जाएगा और सोशल मीडिया कंपनियों की क्या जिम्मेदारी होगी. डीपफेक पर रोक लगाने की कोशिश हाल के समय में डीपफेक और फर्जी वीडियो ने समाज में भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा की है. Narendra Modi ने भी AI से जुड़े खतरों पर चिंता जताते हुए पारदर्शिता और वॉटरमार्किंग को जरूरी बताया. खासतौर पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता पर जोर दिया गया है. क्या है SGI (Synthetically Generated Content)? नए नियमों के मुताबिक, कोई भी ऐसा फोटो, वीडियो या ऑडियो जो AI या कंप्यूटर तकनीक से इस तरह बनाया गया हो कि वह असली व्यक्ति, स्थान या घटना जैसा दिखे उसे SGI यानी सिंथेटिक जनरेटेड कंटेंट माना जाएगा. अब ऐसे कंटेंट को पोस्ट करने से पहले स्पष्ट रूप से लेबल या वॉटरमार्क करना जरूरी है ताकि दर्शकों को पता रहे कि यह AI द्वारा बनाया गया है. हालांकि सामान्य फोटो एडिटिंग या बेसिक फिल्टर इस्तेमाल करने पर AI लेबल लगाने की जरूरत नहीं होगी. नए नियमों के तीन बड़े बदलाव सबसे अहम बदलाव यह है कि AI कंटेंट को बिना लेबल के साझा नहीं किया जा सकता. एक बार AI जनरेटेड का टैग लगा दिया गया तो उसे हटाया नहीं जा सकेगा. दूसरा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे तकनीकी टूल विकसित करने होंगे जो AI कंटेंट की पहचान कर सकें और अपलोड से पहले उसकी जांच करें. तीसरा, हर तीन महीने में प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स को चेतावनी देनी होगी कि AI का गलत इस्तेमाल करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है. किन चीजों पर पूरी तरह रोक? सरकार ने कुछ मामलों में सख्त रेखा खींच दी है. बच्चों से जुड़ी अश्लील कंटेंट, फर्जी दस्तावेज, हथियार या गोला-बारूद से जुड़ा अवैध कंटेंट और डीपफेक वीडियो या तस्वीरें पूरी तरह प्रतिबंधित श्रेणी में रखी गई हैं. यदि सरकार किसी कंटेंट को हटाने का निर्देश देती है तो संबंधित प्लेटफॉर्म को तीन घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी. पहले यह समयसीमा 36 घंटे थी. इसके अलावा, बच्चों से जुड़ी हिंसक या अश्लील सामग्री पर 12 घंटे के भीतर प्रतिक्रिया देना अनिवार्य होगा. प्लेटफॉर्म्स को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि AI कंटेंट की उत्पत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद रहे. नियम तोड़ने पर क्या होगा? यदि कोई व्यक्ति या संस्था इन AI नियमों का उल्लंघन करती है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है. मामलों के अनुसार कार्रवाई Indian Penal Code, Information Technology Act, 2000 या Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 के तहत की जा सकती है. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई प्लेटफॉर्म ऑटोमैटिक टूल्स के जरिए संदिग्ध AI कंटेंट को ब्लॉक करता है तो इसे कानून का उल्लंघन नहीं माना जाएगा बल्कि यह अपेक्षित कार्रवाई है. यह भी पढ़ें: LED और QLED TV में क्या होता है अंतर? जानिए किसे खरीदने में है समझदारी

Feb 21, 2026 - 14:30
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बदल गए AI गेम के नियम! पोस्ट करने से पहले जान लें वरना पड़ सकता है भारी जुर्माना

AI Content: भारत सरकार ने AI से तैयार किए गए कंटेंट को लेकर बड़े बदलाव लागू कर दिए हैं. 20 फरवरी से ये नियम आधिकारिक रूप से प्रभाव में आ चुके हैं. अब अगर कोई व्यक्ति सोशल मीडिया या किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर AI से बना कंटेंट साझा करता है तो उसे तय दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा.

यह संशोधन आईटी मंत्रालय द्वारा Information Technology (Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 में किया गया है. सरकार ने साफ किया है कि AI या सिंथेटिक कंटेंट किसे माना जाएगा और सोशल मीडिया कंपनियों की क्या जिम्मेदारी होगी.

डीपफेक पर रोक लगाने की कोशिश

हाल के समय में डीपफेक और फर्जी वीडियो ने समाज में भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा की है. Narendra Modi ने भी AI से जुड़े खतरों पर चिंता जताते हुए पारदर्शिता और वॉटरमार्किंग को जरूरी बताया. खासतौर पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता पर जोर दिया गया है.

क्या है SGI (Synthetically Generated Content)?

नए नियमों के मुताबिक, कोई भी ऐसा फोटो, वीडियो या ऑडियो जो AI या कंप्यूटर तकनीक से इस तरह बनाया गया हो कि वह असली व्यक्ति, स्थान या घटना जैसा दिखे उसे SGI यानी सिंथेटिक जनरेटेड कंटेंट माना जाएगा.

अब ऐसे कंटेंट को पोस्ट करने से पहले स्पष्ट रूप से लेबल या वॉटरमार्क करना जरूरी है ताकि दर्शकों को पता रहे कि यह AI द्वारा बनाया गया है. हालांकि सामान्य फोटो एडिटिंग या बेसिक फिल्टर इस्तेमाल करने पर AI लेबल लगाने की जरूरत नहीं होगी.

नए नियमों के तीन बड़े बदलाव

सबसे अहम बदलाव यह है कि AI कंटेंट को बिना लेबल के साझा नहीं किया जा सकता. एक बार AI जनरेटेड का टैग लगा दिया गया तो उसे हटाया नहीं जा सकेगा. दूसरा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे तकनीकी टूल विकसित करने होंगे जो AI कंटेंट की पहचान कर सकें और अपलोड से पहले उसकी जांच करें. तीसरा, हर तीन महीने में प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स को चेतावनी देनी होगी कि AI का गलत इस्तेमाल करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है.

किन चीजों पर पूरी तरह रोक?

सरकार ने कुछ मामलों में सख्त रेखा खींच दी है. बच्चों से जुड़ी अश्लील कंटेंट, फर्जी दस्तावेज, हथियार या गोला-बारूद से जुड़ा अवैध कंटेंट और डीपफेक वीडियो या तस्वीरें पूरी तरह प्रतिबंधित श्रेणी में रखी गई हैं.

यदि सरकार किसी कंटेंट को हटाने का निर्देश देती है तो संबंधित प्लेटफॉर्म को तीन घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी. पहले यह समयसीमा 36 घंटे थी. इसके अलावा, बच्चों से जुड़ी हिंसक या अश्लील सामग्री पर 12 घंटे के भीतर प्रतिक्रिया देना अनिवार्य होगा. प्लेटफॉर्म्स को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि AI कंटेंट की उत्पत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद रहे.

नियम तोड़ने पर क्या होगा?

यदि कोई व्यक्ति या संस्था इन AI नियमों का उल्लंघन करती है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है. मामलों के अनुसार कार्रवाई Indian Penal Code, Information Technology Act, 2000 या Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 के तहत की जा सकती है.

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई प्लेटफॉर्म ऑटोमैटिक टूल्स के जरिए संदिग्ध AI कंटेंट को ब्लॉक करता है तो इसे कानून का उल्लंघन नहीं माना जाएगा बल्कि यह अपेक्षित कार्रवाई है.

यह भी पढ़ें:

LED और QLED TV में क्या होता है अंतर? जानिए किसे खरीदने में है समझदारी

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