Union Budget 2026: प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन एस. महेंद्र देव ने बजट 2026-27 को समावेशी बताते हुए कहा है कि यह बजट वृद्धि और रोजगार को बढ़ावा देने वाला है. उनके मुताबिक बजट में कारोबारी सुगमता के साथ-साथ आम लोगों के रहन-सहन को बेहतर बनाने पर भी खास ध्यान दिया गया है. देव ने लिंक्डइन पर पोस्ट में कहा कि बजट 2026-27 ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में अगला अहम कदम है और यह वृद्धि, समावेश तथा रोजगार सृजन को आगे बढ़ाने वाला है.
विनिर्माण को बढ़ावा देने के उपाय
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने लगातार नौवें बजट भाषण में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई उपायों की घोषणा की. इसके अलावा वैश्विक डेटा सेंटरों के लिए कर छूट, कृषि और पर्यटन क्षेत्रों को प्रोत्साहन देने जैसे कदम भी बजट का हिस्सा रहे. उनका 85 मिनट का भाषण ‘लोकलुभावन के ऊपर लोक’ के मंत्र के साथ शुरू हुआ और किसी अलंकरण या काव्यात्मक संदर्भ के बिना तथ्यात्मक घोषणाओं पर केंद्रित रहा. चुनावी माहौल के बावजूद बजट में लोकलुभावन घोषणाओं से परहेज किया गया, जिसे एक संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के तौर पर देखा जा रहा है.
वित्त मंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष रखे गए नवोन्मेषी विचारों से बजट के कई प्रस्ताव प्रेरित हैं, जिससे यह एक युवा-शक्ति से प्रेरित बजट बन गया है. उन्होंने दोहराया कि मोदी सरकार का संकल्प गरीबों, वंचितों और पिछड़े वर्गों के कल्याण पर केंद्रित है. भाषण के दौरान विपक्ष की ओर से कोई बड़ा व्यवधान नहीं दिखा और इस बार सीतारमण ने अपने पिछले भाषणों की तरह किसी भाषा या कविता के संदर्भों का इस्तेमाल नहीं किया.
बजट में तीन कर्तव्य का जिक्र
यह पहला बजट था जिसे नवनिर्मित कर्तव्य भवन में तैयार किया गया. सीतारमण ने बताया कि इस भवन में तैयार पहले बजट से तीन ‘कर्तव्यों’ की प्रेरणा मिली- आर्थिक वृद्धि को तेज और टिकाऊ बनाना, आकांक्षाओं की पूर्ति व क्षमता निर्माण करना और ‘सबका साथ, सबका विकास’. अपने भाषण के अंत में उन्होंने ‘जीवन यापन की सुविधा’ पर जोर देते हुए कहा कि ईमानदार करदाताओं को अब दंड के बजाय अतिरिक्त राशि देकर मामलों के निपटारे का अवसर मिलेगा. बजट भाषण का समापन भी किसी उद्धरण के बजाय ‘जय हिंद’ के साथ किया गया.
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