फंड्स की नहीं कमी: लावारिश पड़े 80 हजार करोड़, क्यों परिवार नहीं निकाल पा रहे अपनों के पड़े पैसे

Un-claimed Wealth: देश में करोड़ों रुपये लावारिस हालत में पड़े हुए हैं और इन पैसों के वास्तविक हकदारों के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है. कई ऐसे परिवार हैं जिनके सदस्यों के पैसे बैंक खातों, बीमा फंडों या म्युचुअल फंड्स में जमा हैं, लेकिन परिवार के लोगों को इसकी खबर तक नहीं है. यानी देश भर में ऐसे करोड़ों रुपये पड़े हुए हैं जिनका आज कोई दावेदार नहीं है. इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया है सेबी रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर और सहज मनी के फाउंडर अभिषेक कुमार ने. उन्होंने हाल ही में एक लिंक्डइन पोस्ट में लिखा कि लगभग 80,000 करोड़ रुपये ऐसे पड़े हैं जिनका कोई दावा करने वाला नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि यह विषय बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके बारे में बहुत कम लोग बात करते हैं. फंड्स लावारिस क्यों रह जाते हैं? अभिषेक कुमार के अनुसार, यह स्थिति इसलिए नहीं है कि लोगों के पास पैसे की कमी है, बल्कि इसकी असली वजह है — कम्युनिकेशन की कमी, पेपरवर्क की जटिलता और परिवारों में जागरूकता का अभाव. उन्होंने लोगों से सवाल पूछा कि क्या उनके परिवार को उनके पैसों की जानकारी है? कई बार ऐसा होता है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके निवेशों के बारे में परिवार को कोई जानकारी नहीं होती, जिससे वह पैसा सालों तक बिना दावे के पड़ा रहता है. वास्तविक उदाहरण अभिषेक कुमार ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि पिछले साल उन्होंने एक क्लाइंट की मदद की, जिनकी पत्नी को यह पता ही नहीं था कि उनके नाम से 15 लाख रुपये म्युचुअल फंड्स में निवेश किए गए हैं. इसी तरह उन्होंने एक और घटना का जिक्र किया, जिसमें एक परिवार को अपने एक बैंक खाते को अनलॉक कराने में पूरे दो साल लग गए. इसकी वजह यह थी कि खाते में नॉमिनी का नाम जोड़ा नहीं गया था. क्या सिर्फ वसीयतनामा काफी है? अभिषेक कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि कई लोग यह सोचते हैं कि केवल वसीयतनामा (Will) बना लेना पर्याप्त है, लेकिन ऐसा नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वसीयतनामा तभी प्रभावी होता है जब वह उचित साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया गया हो. देश में लाखों परिवार ऐसे हैं जिनके मेहनत की कमाई विभिन्न वित्तीय संस्थानों में फंसी हुई है. विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को अपने निवेशों की जानकारी परिवार के साथ साझा करनी चाहिए, सभी खातों में नॉमिनी अवश्य जोड़ना चाहिए, और जरूरी दस्तावेजों को सुव्यवस्थित रखना चाहिए ताकि भविष्य में उनकी संपत्ति लावारिस न रह जाए. ये भी पढ़ें: US-इंडिया ट्रेड डील की उम्मीद के बीच मजबूत हुआ रुपया, करेंसी की रिंग में डॉलर को बताई औकात

Nov 11, 2025 - 18:30
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फंड्स की नहीं कमी: लावारिश पड़े 80 हजार करोड़, क्यों परिवार नहीं निकाल पा रहे अपनों के पड़े पैसे

Un-claimed Wealth: देश में करोड़ों रुपये लावारिस हालत में पड़े हुए हैं और इन पैसों के वास्तविक हकदारों के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है. कई ऐसे परिवार हैं जिनके सदस्यों के पैसे बैंक खातों, बीमा फंडों या म्युचुअल फंड्स में जमा हैं, लेकिन परिवार के लोगों को इसकी खबर तक नहीं है. यानी देश भर में ऐसे करोड़ों रुपये पड़े हुए हैं जिनका आज कोई दावेदार नहीं है.

इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया है सेबी रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर और सहज मनी के फाउंडर अभिषेक कुमार ने. उन्होंने हाल ही में एक लिंक्डइन पोस्ट में लिखा कि लगभग 80,000 करोड़ रुपये ऐसे पड़े हैं जिनका कोई दावा करने वाला नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि यह विषय बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके बारे में बहुत कम लोग बात करते हैं.

फंड्स लावारिस क्यों रह जाते हैं?

अभिषेक कुमार के अनुसार, यह स्थिति इसलिए नहीं है कि लोगों के पास पैसे की कमी है, बल्कि इसकी असली वजह है — कम्युनिकेशन की कमी, पेपरवर्क की जटिलता और परिवारों में जागरूकता का अभाव. उन्होंने लोगों से सवाल पूछा कि क्या उनके परिवार को उनके पैसों की जानकारी है? कई बार ऐसा होता है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके निवेशों के बारे में परिवार को कोई जानकारी नहीं होती, जिससे वह पैसा सालों तक बिना दावे के पड़ा रहता है.

वास्तविक उदाहरण

अभिषेक कुमार ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि पिछले साल उन्होंने एक क्लाइंट की मदद की, जिनकी पत्नी को यह पता ही नहीं था कि उनके नाम से 15 लाख रुपये म्युचुअल फंड्स में निवेश किए गए हैं.

इसी तरह उन्होंने एक और घटना का जिक्र किया, जिसमें एक परिवार को अपने एक बैंक खाते को अनलॉक कराने में पूरे दो साल लग गए. इसकी वजह यह थी कि खाते में नॉमिनी का नाम जोड़ा नहीं गया था.

क्या सिर्फ वसीयतनामा काफी है?

अभिषेक कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि कई लोग यह सोचते हैं कि केवल वसीयतनामा (Will) बना लेना पर्याप्त है, लेकिन ऐसा नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वसीयतनामा तभी प्रभावी होता है जब वह उचित साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया गया हो.

देश में लाखों परिवार ऐसे हैं जिनके मेहनत की कमाई विभिन्न वित्तीय संस्थानों में फंसी हुई है. विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को अपने निवेशों की जानकारी परिवार के साथ साझा करनी चाहिए, सभी खातों में नॉमिनी अवश्य जोड़ना चाहिए, और जरूरी दस्तावेजों को सुव्यवस्थित रखना चाहिए ताकि भविष्य में उनकी संपत्ति लावारिस न रह जाए.

ये भी पढ़ें: US-इंडिया ट्रेड डील की उम्मीद के बीच मजबूत हुआ रुपया, करेंसी की रिंग में डॉलर को बताई औकात

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