पिछले पांच सालों में एफसीआई के गोदामों में रखा कितना मीट्रिक टन अनाज हुआ खराब? सरकार ने दिया ये जवाब

पिछले पांच सालों में एफसीआई के गोदामों में रखा कितना आनाज खराब हुआ है, इसको लेकर सरकार से सवाल किया गया. यह सवाल सांसद डेलकर कालाबेन मोहनभाई ने किया. इस दौरान उन्होंने पूछा कि क्या सरकार ने पिछले पांच सालों में फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के स्टॉक में अनाज के नुकसान का आकलन किया है. अगर हां, तो नुकसान की मॉनेटरी वैल्यू सहित राज्य, साल, आइटम और FCI गोदाम के हिसाब से, खासकर दादरा और नगर हवेली के लिए, क्या डिटेल्स हैं? FCI गोदाम की कमी के कारण अनाज के नुकसान की डिटेल्स क्या हैं और भविष्य में अनाज के ऐसे नुकसान को रोकने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं? सरकार ने बताया कि इतना टन अनाज हुआ खराबसरकार की तरफ से उपभोक्ता मामले में खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की राज्यमंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभानिया ने दिया. उन्होंने कहा कि सरकार ने फ़ूड कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (FCI) के स्टॉक में अनाज के नुकसान का अंदाज़ा लगाया है. उन्होंने जवाब देते हुए बताया कि दादरा और नगर हवेली में कोई FCI गोदाम नहीं है. पिछले पांच सालों में एफसीआई के गोदामों में रखा 7858 मीट्रिक टन अनाज खराब हुआ है. इसकी कीमत करीबन 36 करोड़ रुपए से ज्यादा है.  श्रम कानून पर विपक्ष का प्रदर्शनविपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) के कई घटक दलों के सांसदों ने हाल ही में लागू चार श्रम संहिताओं के खिलाफ बुधवार को संसद परिसर में प्रदर्शन किया और इन्हें वापस लेने की मांग की. विपक्षी सांसद संसद के 'मकर द्वार' के निकट एकत्र हुए और इन संहिताओं एवं सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.  हाथों में तख्तियां लेकर मजदूर विरोधी कानून वापस लो के नारे लगेउन्होंने हाथों में तख्तियां लेकर 'मजदूर विरोधी कानून वापस लो' के नारे लगाए. कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कुछ अन्य दलों के प्रमुख नेता इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए. 2020 से लंबित कानून को सरकार कर चुकी है लागूकेंद्र ने बीते 21 नवंबर को 2020 से लंबित चार श्रम संहिताओं को लागू कर दिया. इनमें सभी के लिए समय पर न्यूनतम वेतन और सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा जैसे श्रमिक-अनुकूल उपायों को शामिल किया गया है. इसमें गिग श्रमिक और प्लेटफॉर्म श्रमिक भी शामिल हैं. वहीं, लंबे समय तक काम करने के घंटे, व्यापक निश्चित अवधि के रोजगार और नियोक्ता के अनुकूल छंटनी के नियमों की अनुमति भी दी गई है.

Dec 3, 2025 - 23:30
 0
पिछले पांच सालों में एफसीआई के गोदामों में रखा कितना मीट्रिक टन अनाज हुआ खराब? सरकार ने दिया ये जवाब

पिछले पांच सालों में एफसीआई के गोदामों में रखा कितना आनाज खराब हुआ है, इसको लेकर सरकार से सवाल किया गया. यह सवाल सांसद डेलकर कालाबेन मोहनभाई ने किया. इस दौरान उन्होंने पूछा कि क्या सरकार ने पिछले पांच सालों में फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के स्टॉक में अनाज के नुकसान का आकलन किया है. अगर हां, तो नुकसान की मॉनेटरी वैल्यू सहित राज्य, साल, आइटम और FCI गोदाम के हिसाब से, खासकर दादरा और नगर हवेली के लिए, क्या डिटेल्स हैं? FCI गोदाम की कमी के कारण अनाज के नुकसान की डिटेल्स क्या हैं और भविष्य में अनाज के ऐसे नुकसान को रोकने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?

सरकार ने बताया कि इतना टन अनाज हुआ खराब
सरकार की तरफ से उपभोक्ता मामले में खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की राज्यमंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभानिया ने दिया. उन्होंने कहा कि सरकार ने फ़ूड कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (FCI) के स्टॉक में अनाज के नुकसान का अंदाज़ा लगाया है. उन्होंने जवाब देते हुए बताया कि दादरा और नगर हवेली में कोई FCI गोदाम नहीं है. पिछले पांच सालों में एफसीआई के गोदामों में रखा 7858 मीट्रिक टन अनाज खराब हुआ है. इसकी कीमत करीबन 36 करोड़ रुपए से ज्यादा है. 

श्रम कानून पर विपक्ष का प्रदर्शन
विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) के कई घटक दलों के सांसदों ने हाल ही में लागू चार श्रम संहिताओं के खिलाफ बुधवार को संसद परिसर में प्रदर्शन किया और इन्हें वापस लेने की मांग की. विपक्षी सांसद संसद के 'मकर द्वार' के निकट एकत्र हुए और इन संहिताओं एवं सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. 

हाथों में तख्तियां लेकर मजदूर विरोधी कानून वापस लो के नारे लगे
उन्होंने हाथों में तख्तियां लेकर 'मजदूर विरोधी कानून वापस लो' के नारे लगाए. कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कुछ अन्य दलों के प्रमुख नेता इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए.

2020 से लंबित कानून को सरकार कर चुकी है लागू
केंद्र ने बीते 21 नवंबर को 2020 से लंबित चार श्रम संहिताओं को लागू कर दिया. इनमें सभी के लिए समय पर न्यूनतम वेतन और सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा जैसे श्रमिक-अनुकूल उपायों को शामिल किया गया है. इसमें गिग श्रमिक और प्लेटफॉर्म श्रमिक भी शामिल हैं. वहीं, लंबे समय तक काम करने के घंटे, व्यापक निश्चित अवधि के रोजगार और नियोक्ता के अनुकूल छंटनी के नियमों की अनुमति भी दी गई है.

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow