धर्म का दिखावा करने वाला व्यक्ति नरक का भागी होता है! ऐसे लोगों के लिए गरुड़ पुराण और मनुस्मृति क्या कहती है?

Karma: भारत में साधु-संत हमेशा से श्रद्धा और विश्वास का केंद्र रहे हैं. समाज उन्हें केवल धार्मिक मार्गदर्शक ही नहीं मानता, बल्कि उनके आचरण को जीवन की दिशा भी समझता है. लेकिन जब कोई व्यक्ति साधु का वस्त्र पहनकर अधर्म में लिप्त होता है, तो यह केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं होता. यह धर्म, समाज और आस्था पर सीधा प्रहार है. यह सबसे बड़ा पाखंड है, क्योंकि यहाँ विश्वास का शोषण होता है. शास्त्रों ने ऐसे पाखंडियों के लिए कठोरतम शब्दों का प्रयोग किया है और उन्हें महापातक घोषित किया है. वेष से नहीं, आचरण से धर्म दिखना चाहिए धर्मशास्त्र साफ कहते हैं कि धर्म का आधार केवल वेश नहीं है. मनुस्मृति में लिखा है कि अधर्मेण तु यः साधुं वेषं कृत्वा चरेदिह. स सर्वान् निहनत्याशु स्वर्गं चैव न गच्छति. अर्थात, जो व्यक्ति साधु का वेश पहनकर अधर्म करता है, वह केवल खुद पापी नहीं बनता बल्कि पूरे समाज को भी नाश की ओर ले जाता है. महाभारत के शांति पर्व में भी इसी पाखंड को घोर पाप माना गया है. धर्म का दिखावा करने वाला व्यक्ति नरक का भागी होता है, क्योंकि उसका आचरण दूसरों को भ्रमित करता है और आस्था को दूषित करता है. गरुड़ पुराण का भयावह चित्रण गरुड़ पुराण में इस विषय पर सबसे डरावना वर्णन मिलता है. यहां बताया गया है कि साधु का वेष पहनकर कुकृत्य करने वाला व्यक्ति मृत्यु के बाद सीधे रौरव नरक में गिराया जाता है. इस नरक में यमदूत उसे अग्नि की ज्वालाओं और विषैले कीड़ों से सताते हैं. उसकी आत्मा तब तक शांति नहीं पाती जब तक उसके द्वारा फैलाया गया पाखंड समाज से मिट नहीं जाता. पद्म पुराण में भी कहा गया है कि ऐसा व्यक्ति बार-बार नीच योनियों में जन्म लेता है और अंतहीन दुःख भोगता है. यह दंड केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके परिवार और अनुयायियों पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ता है. जब कोई व्यक्ति साधु का भेष धारण कर अधर्म करता है, तो क्या होता है? जब कोई व्यक्ति साधु का भेष धारण कर अधर्म करता है, तो उसका प्रभाव केवल व्यक्तिगत नहीं होता. यह आस्था पर सीधा हमला होता है. समाज जो साधु को धर्म का प्रतीक मानता है, वह संदेह और अविश्वास से भर जाता है. सच्चे साधुओं की छवि भी धूमिल होने लगती है और धर्म की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचती है. यही कारण है कि धर्मशास्त्रों ने ऐसे लोगों को समाज से बहिष्कृत करने की बात कही है. वेष से धर्म की पहचान नहीं होती, आचरण ही वास्तविक धर्म का प्रमाण है. पाखंड करने वाले को क्या मिलता है? शास्त्र केवल परलोक की बात नहीं करते, वे इस लोक में भी दंड का संकेत देते हैं. जो व्यक्ति पाखंड करता है, उसे जीवन में ही अपमान, रोग और मानसिक क्लेश झेलना पड़ता है. उसका अंत प्रायः कलंकित और दुःखदायी होता है. दैवी दंड के रूप में उसके पुण्य क्षीण हो जाते हैं और भाग्य उसका साथ छोड़ देता है. सामाजिक दंड के रूप में वह बहिष्कृत होता है, और समाज उसकी बातों पर विश्वास करना छोड़ देता है. धर्मग्रंथों ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा पाखंडी जीवन और मृत्यु दोनों में चैन से नहीं रह सकता. पाखंड करने वालों को क्या मिलता है? महाभारत के अनुसार वेषेण तपसा वापि धर्मं योऽनुतिष्ठति. स पाखंडो न संशयो नरकं याति दुर्मतिः इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति केवल वेष और दिखावे से धर्म का पालन करता है, उसका तप वास्तविक नहीं है. ऐसा पाखंडी निश्चित रूप से नरक का भागी बनता है. यह संदेश केवल उस काल के लिए नहीं था, बल्कि आज भी उतना ही प्रासंगिक है. जब धर्म के नाम पर पाखंड हो रहा हो, तो समाज को इस श्लोक को याद करना चाहिए. असली संत कौन है? आज भी हम ऐसे कई चेहरे देखते हैं जो साधु का चोला पहनकर पाखंड में लिप्त हैं. कहीं वे चमत्कार दिखाने का दावा करते हैं, कहीं आस्था के नाम पर लोगों को ठगते हैं. शास्त्रों की दृष्टि से यह सब घोर अधर्म है. आस्था का मूल्य कभी वस्त्रों से तय नहीं होता. केवल वेष देखकर किसी को संत मान लेना सबसे बड़ी भूल है. असली संत वही है जिसका आचरण निर्मल हो, जिसका जीवन सेवा और साधना से भरा हो. साधु का भेष धारण कर अधर्म करना सबसे बड़ा पाप है! धर्मशास्त्र, स्मृतियां और पुराण इस विषय पर एकमत हैं कि साधु का भेष धारण कर अधर्म करना सबसे बड़ा पाप है. ऐसे व्यक्ति का अंत नरक, अपमान और कलंक से होता है. उसका जीवन समाज के लिए चेतावनी बन जाता है. शास्त्रों का संदेश स्पष्ट है कि आचरण ही धर्म है, वेष केवल आभास है. इसलिए समाज को चाहिए कि वह केवल चोले से प्रभावित न हो, बल्कि साधु के जीवन और आचरण को परखे. यही आस्था की रक्षा का मार्ग है और यही धर्म की वास्तविक पहचान है. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Sep 25, 2025 - 17:30
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धर्म का दिखावा करने वाला व्यक्ति नरक का भागी होता है! ऐसे लोगों के लिए गरुड़ पुराण और मनुस्मृति क्या कहती है?

Karma: भारत में साधु-संत हमेशा से श्रद्धा और विश्वास का केंद्र रहे हैं. समाज उन्हें केवल धार्मिक मार्गदर्शक ही नहीं मानता, बल्कि उनके आचरण को जीवन की दिशा भी समझता है.

लेकिन जब कोई व्यक्ति साधु का वस्त्र पहनकर अधर्म में लिप्त होता है, तो यह केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं होता. यह धर्म, समाज और आस्था पर सीधा प्रहार है.

यह सबसे बड़ा पाखंड है, क्योंकि यहाँ विश्वास का शोषण होता है. शास्त्रों ने ऐसे पाखंडियों के लिए कठोरतम शब्दों का प्रयोग किया है और उन्हें महापातक घोषित किया है.

वेष से नहीं, आचरण से धर्म दिखना चाहिए

धर्मशास्त्र साफ कहते हैं कि धर्म का आधार केवल वेश नहीं है. मनुस्मृति में लिखा है कि अधर्मेण तु यः साधुं वेषं कृत्वा चरेदिह. स सर्वान् निहनत्याशु स्वर्गं चैव न गच्छति. अर्थात, जो व्यक्ति साधु का वेश पहनकर अधर्म करता है, वह केवल खुद पापी नहीं बनता बल्कि पूरे समाज को भी नाश की ओर ले जाता है.

महाभारत के शांति पर्व में भी इसी पाखंड को घोर पाप माना गया है. धर्म का दिखावा करने वाला व्यक्ति नरक का भागी होता है, क्योंकि उसका आचरण दूसरों को भ्रमित करता है और आस्था को दूषित करता है.

गरुड़ पुराण का भयावह चित्रण

गरुड़ पुराण में इस विषय पर सबसे डरावना वर्णन मिलता है. यहां बताया गया है कि साधु का वेष पहनकर कुकृत्य करने वाला व्यक्ति मृत्यु के बाद सीधे रौरव नरक में गिराया जाता है.

इस नरक में यमदूत उसे अग्नि की ज्वालाओं और विषैले कीड़ों से सताते हैं. उसकी आत्मा तब तक शांति नहीं पाती जब तक उसके द्वारा फैलाया गया पाखंड समाज से मिट नहीं जाता.

पद्म पुराण में भी कहा गया है कि ऐसा व्यक्ति बार-बार नीच योनियों में जन्म लेता है और अंतहीन दुःख भोगता है. यह दंड केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके परिवार और अनुयायियों पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ता है.

जब कोई व्यक्ति साधु का भेष धारण कर अधर्म करता है, तो क्या होता है?

जब कोई व्यक्ति साधु का भेष धारण कर अधर्म करता है, तो उसका प्रभाव केवल व्यक्तिगत नहीं होता. यह आस्था पर सीधा हमला होता है. समाज जो साधु को धर्म का प्रतीक मानता है, वह संदेह और अविश्वास से भर जाता है.

सच्चे साधुओं की छवि भी धूमिल होने लगती है और धर्म की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचती है. यही कारण है कि धर्मशास्त्रों ने ऐसे लोगों को समाज से बहिष्कृत करने की बात कही है. वेष से धर्म की पहचान नहीं होती, आचरण ही वास्तविक धर्म का प्रमाण है.

पाखंड करने वाले को क्या मिलता है?

शास्त्र केवल परलोक की बात नहीं करते, वे इस लोक में भी दंड का संकेत देते हैं. जो व्यक्ति पाखंड करता है, उसे जीवन में ही अपमान, रोग और मानसिक क्लेश झेलना पड़ता है.

उसका अंत प्रायः कलंकित और दुःखदायी होता है. दैवी दंड के रूप में उसके पुण्य क्षीण हो जाते हैं और भाग्य उसका साथ छोड़ देता है. सामाजिक दंड के रूप में वह बहिष्कृत होता है, और समाज उसकी बातों पर विश्वास करना छोड़ देता है. धर्मग्रंथों ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा पाखंडी जीवन और मृत्यु दोनों में चैन से नहीं रह सकता.

पाखंड करने वालों को क्या मिलता है?

महाभारत के अनुसार वेषेण तपसा वापि धर्मं योऽनुतिष्ठति. स पाखंडो न संशयो नरकं याति दुर्मतिः इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति केवल वेष और दिखावे से धर्म का पालन करता है, उसका तप वास्तविक नहीं है. ऐसा पाखंडी निश्चित रूप से नरक का भागी बनता है.

यह संदेश केवल उस काल के लिए नहीं था, बल्कि आज भी उतना ही प्रासंगिक है. जब धर्म के नाम पर पाखंड हो रहा हो, तो समाज को इस श्लोक को याद करना चाहिए.

असली संत कौन है?

आज भी हम ऐसे कई चेहरे देखते हैं जो साधु का चोला पहनकर पाखंड में लिप्त हैं. कहीं वे चमत्कार दिखाने का दावा करते हैं, कहीं आस्था के नाम पर लोगों को ठगते हैं.

शास्त्रों की दृष्टि से यह सब घोर अधर्म है. आस्था का मूल्य कभी वस्त्रों से तय नहीं होता. केवल वेष देखकर किसी को संत मान लेना सबसे बड़ी भूल है. असली संत वही है जिसका आचरण निर्मल हो, जिसका जीवन सेवा और साधना से भरा हो.

साधु का भेष धारण कर अधर्म करना सबसे बड़ा पाप है!

धर्मशास्त्र, स्मृतियां और पुराण इस विषय पर एकमत हैं कि साधु का भेष धारण कर अधर्म करना सबसे बड़ा पाप है. ऐसे व्यक्ति का अंत नरक, अपमान और कलंक से होता है. उसका जीवन समाज के लिए चेतावनी बन जाता है. शास्त्रों का संदेश स्पष्ट है कि आचरण ही धर्म है, वेष केवल आभास है.

इसलिए समाज को चाहिए कि वह केवल चोले से प्रभावित न हो, बल्कि साधु के जीवन और आचरण को परखे. यही आस्था की रक्षा का मार्ग है और यही धर्म की वास्तविक पहचान है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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