दिमाग नहीं, दिल बीमार है? जानें कैसे ब्रेन फॉग हो सकता है हार्ट डिजीज का शुरुआती संकेत

अगर आपको बार बार ध्यान लगाने में परेशानी हो रही है, नाम भूलने लगे हैं या दिमाग हमेशा भारी महसूस रहता है तो इसे सिर्फ मानसिक थकान समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है. डॉक्टरों के अनुसार कई बार ये लक्षण दिमाग की नहीं, बल्कि दिल की बीमारी की ओर इशारा करते हैं. वहीं हार्ट डिजीज हमेशा सीने में दर्द या सांस फूलने जैसे आम संकेतों से ही सामने आए ऐसा जरूरी नहीं है.   जब दिमाग के लक्षण बताते हैं दिल की परेशानीकई डॉक्टरों के अनुसार वह अक्सर ऐसे मरीज देखते हैं जो मेमोरी लॉस या ब्रेन फॉग की शिकायत लेकर आते हैं. लेकिन उन्हें पता ही नहीं होता है कि इसके पीछे दिल से जुड़ी समस्या छिपी होती है. उनके अनुसार कई रिसर्च लगातार यह साबित कर रही है कि दिमाग की सेहत सीधे तौर पर दिल की सेहत पर निर्भर करती है.ब्रेन फॉग भी हो सकता है हार्ट का लक्षणडॉक्टर बताते हैं कि कई लोग उनके पास शिकायत लेकर आते हैं कि वह मीटिंग में लोगों के नाम भूलने लगे हैं और दिमाग पहले जैसा तेज नहीं रहा. उन्हें न तो सीने में दर्द था और नहीं सांस फूलने की दिक्कत, लेकिन जांच के दौरान सामने आया कि उनके शरीर में ब्लड सर्कुलेशन से जुड़े कुछ जरूरी लक्षण गड़बड़ थे. वहीं दिल से दिमाग तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पा रही थी, जिसका असर सीधे उसकी सोचने समझने की क्षमता पड़ रहा था.कम ब्लड फ्लो और कमजोर मेमोरीएक्सपर्ट्स के अनुसार कई रिसर्च बताती है कि दिल के कार्य क्षमता में हल्की सी कमी भी दिमाग तक पहुंचने वाले ब्लड सर्कुलेशन को घटा सकती है. इससे मेमोरी, फोकस और कॉग्निटिव फंक्शन पर असर पड़ता है. वहीं जनरल ऑफ सेरेब्रल ब्लड फ्लो एंड मेटाबॉलिज्म 2024 में पब्लिश एक रिसर्च में भी सामने आया था कि हल्का कार्डियोवैस्कुलर इंपेयरमेंट दिमागी कार्य क्षमता को प्रभावित कर सकता है.शुरुआती संकेतों को पहचानना क्यों है जरूरी?इसके अलावा एक्सपर्ट्स यह भी बताते हैं कि ब्रेन फॉग या याददाश्त में कमी को सिर्फ उम्र या तनाव से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. दरअसल फंक्शनल मेडिसिन का मकसद यही है की बड़ी बीमारी बनने से पहले शरीर के छोटे-छोटे संकेत को पहचाना जाए. वहीं अगर समय रहते इन लक्षणों पर ध्यान दिया जाए, तो दिल से जुड़ी गंभीर समस्याओं को बढ़ने से रोका जा सकता है. ये भी पढ़ें-दीपेंदर गोयल के बाद कौन बनेगा Zomato का CEO, जानें किस धर्म से है उनका वास्ता? Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.l

Jan 22, 2026 - 09:30
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दिमाग नहीं, दिल बीमार है? जानें कैसे ब्रेन फॉग हो सकता है हार्ट डिजीज का शुरुआती संकेत

अगर आपको बार बार ध्यान लगाने में परेशानी हो रही है, नाम भूलने लगे हैं या दिमाग हमेशा भारी महसूस रहता है तो इसे सिर्फ मानसिक थकान समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है. डॉक्टरों के अनुसार कई बार ये लक्षण दिमाग की नहीं, बल्कि दिल की बीमारी की ओर इशारा करते हैं. वहीं हार्ट डिजीज हमेशा सीने में दर्द या सांस फूलने जैसे आम संकेतों से ही सामने आए ऐसा जरूरी नहीं है.  

 जब दिमाग के लक्षण बताते हैं दिल की परेशानी

कई डॉक्टरों के अनुसार वह अक्सर ऐसे मरीज देखते हैं जो मेमोरी लॉस या ब्रेन फॉग की शिकायत लेकर आते हैं. लेकिन उन्हें पता ही नहीं होता है कि इसके पीछे दिल से जुड़ी समस्या छिपी होती है. उनके अनुसार कई रिसर्च लगातार यह साबित कर रही है कि दिमाग की सेहत सीधे तौर पर दिल की सेहत पर निर्भर करती है.

ब्रेन फॉग भी हो सकता है हार्ट का लक्षण

डॉक्टर बताते हैं कि कई लोग उनके पास शिकायत लेकर आते हैं कि वह मीटिंग में लोगों के नाम भूलने लगे हैं और दिमाग पहले जैसा तेज नहीं रहा. उन्हें न तो सीने में दर्द था और नहीं सांस फूलने की दिक्कत, लेकिन जांच के दौरान सामने आया कि उनके शरीर में ब्लड सर्कुलेशन से जुड़े कुछ जरूरी लक्षण गड़बड़ थे. वहीं दिल से दिमाग तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पा रही थी, जिसका असर सीधे उसकी सोचने समझने की क्षमता पड़ रहा था.

कम ब्लड फ्लो और कमजोर मेमोरी

एक्सपर्ट्स के अनुसार कई रिसर्च बताती है कि दिल के कार्य क्षमता में हल्की सी कमी भी दिमाग तक पहुंचने वाले ब्लड सर्कुलेशन को घटा सकती है. इससे मेमोरी, फोकस और कॉग्निटिव फंक्शन पर असर पड़ता है. वहीं जनरल ऑफ सेरेब्रल ब्लड फ्लो एंड मेटाबॉलिज्म 2024 में पब्लिश एक रिसर्च में भी सामने आया था कि हल्का कार्डियोवैस्कुलर इंपेयरमेंट दिमागी कार्य क्षमता को प्रभावित कर सकता है.

शुरुआती संकेतों को पहचानना क्यों है जरूरी?

इसके अलावा एक्सपर्ट्स यह भी बताते हैं कि ब्रेन फॉग या याददाश्त में कमी को सिर्फ उम्र या तनाव से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. दरअसल फंक्शनल मेडिसिन का मकसद यही है की बड़ी बीमारी बनने से पहले शरीर के छोटे-छोटे संकेत को पहचाना जाए. वहीं अगर समय रहते इन लक्षणों पर ध्यान दिया जाए, तो दिल से जुड़ी गंभीर समस्याओं को बढ़ने से रोका जा सकता है.

ये भी पढ़ें-दीपेंदर गोयल के बाद कौन बनेगा Zomato का CEO, जानें किस धर्म से है उनका वास्ता?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.l

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