दाल मखनी और दाल तड़का में क्या होता है अंतर! ये एक चीज बदल देती है पूरा स्वाद

भारतीय खाने में दालों का स्वाद ही अलग होता है. हर घर में रोज किसी न किसी दाल का तड़का जरूर लगता है. लेकिन जब बात दाल मखनी और दाल तड़का की आती है तो लोग अक्सर सोच में पड़ जाते हैं कि आखिर दोनों में फर्क क्या है. दोनों ही बेहद स्वादिष्ट और रेस्टोरेंट मेन्यू की जान मानी जाती हैं. मगर क्या आप जानते हैं कि बस एक चीज का फर्क इन दोनों डिशेज के स्वाद को पूरी तरह बदल देता है. यही कारण है कि दाल मखनी का स्वाद एकदम क्रीमी और रिच लगता है, जबकि दाल तड़का का स्वाद देसी और मसालेदार. दाल मखनी को ऐसे बनाया जाता है खास दाल मखनी पंजाब की मशहूर डिश है. इसमें साबुत उड़द दाल (काली दाल) और राजमा का इस्तेमाल होता है. इसे धीमी आंच पर लंबे समय तक पकाया जाता है ताकि दाल का फ्लेवर पूरी तरह खुलकर आए. पकने के बाद इसमें मक्खन और ताजा क्रीम डाली जाती है जो इसे गाढ़ा और क्रीमी टेक्सचर देती है. यही वजह है कि दाल मखनी का स्वाद नर्म, मखमली और रिच होता है. रेस्टोरेंट्स में इसे अक्सर नान या बटर रोटी के साथ सर्व किया जाता है. यह स्वाद में थोड़ी खट्टी और मीठी होती है जो इसे सबसे अलग बनाता है. दाल तड़का देती है चटपटा और तीखा फ्लेवर दाल तड़का आमतौर पर पीली मूंग दाल, तुअर दाल या मसूर दाल से बनाई जाती है. इसे ज्यादा देर तक पकाने की जरूरत नहीं होती. दाल उबालने के बाद इसमें घी या तेल में तड़का लगाया जाता है जिसमें प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, लहसुन और मसाले डाले जाते हैं. इस तड़के से दाल का स्वाद एकदम चटपटा और मसालेदार हो जाता है. दाल तड़का का मजा ज्यादातर चावल या रोटी दोनों के साथ लिया जाता है. इसे उत्तर भारत में सबसे ज्यादा खाया जाता है. राजस्थान की मशहूर डिश दाल बाटी में भी ज्यादातर इसी दाल को परोसा जाता है. यह भी पढ़ें: Karwa Chauth Recipe: करवाचौथ व्रत के लिए हेल्दी जिमीकंद रेसिपी, इस बार टेस्ट और सेहत दोनों का रखें ध्यान ये होता है असली फर्क दाल मखनी और दाल तड़का में असली फर्क “मक्खन और क्रीम” का है. दाल मखनी को क्रीम और मक्खन के साथ गाढ़ा और रिच बनाया जाता है, जबकि दाल तड़का को तड़के से चटपटा बनाया जाता है. यही एक चीज दोनों डिशेज का पूरा फ्लेवर बदल देती है. हालांकि कई लोग दाल मखनी को बगैर लहसुन और अदरक के बनाते हैं. इतना ही नहीं, दाल मखनी में कोई तड़का नहीं लगाया जाता. ये शाही दाल है और बटरचिकन की तरह इसकी ग्रेवी भी रिच होती है. यह भी पढ़ें: ये हैं भारत की 7 नाइट लाइफ स्ट्रीट फूड मार्केट, कहीं और नहीं मिलता इनसे बेस्ट खाना

Oct 8, 2025 - 11:30
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दाल मखनी और दाल तड़का में क्या होता है अंतर! ये एक चीज बदल देती है पूरा स्वाद

भारतीय खाने में दालों का स्वाद ही अलग होता है. हर घर में रोज किसी न किसी दाल का तड़का जरूर लगता है. लेकिन जब बात दाल मखनी और दाल तड़का की आती है तो लोग अक्सर सोच में पड़ जाते हैं कि आखिर दोनों में फर्क क्या है. दोनों ही बेहद स्वादिष्ट और रेस्टोरेंट मेन्यू की जान मानी जाती हैं. मगर क्या आप जानते हैं कि बस एक चीज का फर्क इन दोनों डिशेज के स्वाद को पूरी तरह बदल देता है. यही कारण है कि दाल मखनी का स्वाद एकदम क्रीमी और रिच लगता है, जबकि दाल तड़का का स्वाद देसी और मसालेदार.

दाल मखनी को ऐसे बनाया जाता है खास

दाल मखनी पंजाब की मशहूर डिश है. इसमें साबुत उड़द दाल (काली दाल) और राजमा का इस्तेमाल होता है. इसे धीमी आंच पर लंबे समय तक पकाया जाता है ताकि दाल का फ्लेवर पूरी तरह खुलकर आए. पकने के बाद इसमें मक्खन और ताजा क्रीम डाली जाती है जो इसे गाढ़ा और क्रीमी टेक्सचर देती है. यही वजह है कि दाल मखनी का स्वाद नर्म, मखमली और रिच होता है. रेस्टोरेंट्स में इसे अक्सर नान या बटर रोटी के साथ सर्व किया जाता है. यह स्वाद में थोड़ी खट्टी और मीठी होती है जो इसे सबसे अलग बनाता है.

दाल तड़का देती है चटपटा और तीखा फ्लेवर

दाल तड़का आमतौर पर पीली मूंग दाल, तुअर दाल या मसूर दाल से बनाई जाती है. इसे ज्यादा देर तक पकाने की जरूरत नहीं होती. दाल उबालने के बाद इसमें घी या तेल में तड़का लगाया जाता है जिसमें प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, लहसुन और मसाले डाले जाते हैं. इस तड़के से दाल का स्वाद एकदम चटपटा और मसालेदार हो जाता है. दाल तड़का का मजा ज्यादातर चावल या रोटी दोनों के साथ लिया जाता है. इसे उत्तर भारत में सबसे ज्यादा खाया जाता है. राजस्थान की मशहूर डिश दाल बाटी में भी ज्यादातर इसी दाल को परोसा जाता है.

यह भी पढ़ें: Karwa Chauth Recipe: करवाचौथ व्रत के लिए हेल्दी जिमीकंद रेसिपी, इस बार टेस्ट और सेहत दोनों का रखें ध्यान

ये होता है असली फर्क

दाल मखनी और दाल तड़का में असली फर्क “मक्खन और क्रीम” का है. दाल मखनी को क्रीम और मक्खन के साथ गाढ़ा और रिच बनाया जाता है, जबकि दाल तड़का को तड़के से चटपटा बनाया जाता है. यही एक चीज दोनों डिशेज का पूरा फ्लेवर बदल देती है. हालांकि कई लोग दाल मखनी को बगैर लहसुन और अदरक के बनाते हैं. इतना ही नहीं, दाल मखनी में कोई तड़का नहीं लगाया जाता. ये शाही दाल है और बटरचिकन की तरह इसकी ग्रेवी भी रिच होती है.

यह भी पढ़ें: ये हैं भारत की 7 नाइट लाइफ स्ट्रीट फूड मार्केट, कहीं और नहीं मिलता इनसे बेस्ट खाना

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