'टूट गई ट्रेड डील...' US कॉमर्स मिनिस्टर के बयान से बढ़ी एक्सपोर्ट्स के दिल की धड़कन, कारोबार को लेकर माथे पर शिकन
India-US Trade Deal: अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील पर बात अटकी हुई है. इस बीच बीते गुरुवार को अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक ने दावा किया कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बात इसलिए फाइनल नहीं हो पाई क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पर्सनली फोन करने से मना कर दिया और इसलिए यह डील नहीं हुई. लुटनिक ने भी यह भी कहा है, ''हमले इंडोनेशिया, वियतनाम और फिलीपींस के साथ समझौते किए. हमें इनसे पहले भारत के साथ डील पूरी हो जाने की उम्मीद थी. डील पूरी तैयार भी थी, लेकिन पीएम मोदी ने राष्ट्रपति को कॉल नहीं किया, जिससे उनका ईगो हर्ट हुआ और डील पूरी नहीं हुई.'' भारत पर 500 परसेंट टैरिफ का खतरा इससे पहले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने 'सैंक्शनिंग रशिया एक्ट' को "हरी झंडी" दे दी है. इससे रूस से सस्ते रेट पर क्रूड ऑयल इम्पोर्ट करने वाले देशों पर दबाव बनाया जाएगा, जिससे यूक्रेन में रूसी हमले को रोकने में मदद मिले. इस बिल के तहत खासतौर पर भारत, चीन और ब्राजील पर 500 परसेंट तक टैरिफ लगाने का जिक्र किया गया. कुल मिलाकर दोनों देशों के बीच इस वक्त कई मुद्दों पर बात उलझी हुई है. टेंशन में आए भारत के एक्सपोर्ट्स हालांकि, देश के एक्सपोर्ट्स का मानना है कि भारत और अमेरिकी अधिकारियों को आमने-सामने बैठकर मुद्दों को सुलझाना चाहिए ताकि आपसी फायदे वाला ट्रेड एग्रीमेंट हो सके. उनका कहना है कि अमेरिका ने पहले से ही भारत पर 50 परसेंट टैरिफ लगा रखा है, जिससे दोनों देशों को नुकसान पहुंच रहा है. अब अगर टैरिफ और बढ़ता है, तो इससे अमेरिका और भारत दोनों ही देशों के कारोबार को बड़ा झटका लगेगा. फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) के अध्यक्ष एससी रल्हन कहते हैं, दोनों पक्षों को डील के लिए बातचीत जारी रखनी चाहिए. लेदर इंडस्ट्री से जुड़े एक एक्सपोर्टर ने कहा, अमेरिका भारत के लिए बड़ा बाजार है और ट्रेड एग्रीमेंट होने से देश के एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा. एक्सपोर्टर ने कहा, "हालांकि हम नए बाजारों की तलाश कर रहे हैं, लेकिन अमेरिका एक प्रमुख बाजार है." इंजीनियरिंग फील्ड के एक अन्य एक्सपोर्टर ने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट व्यापार के मोर्चे पर अनिश्चितताओं को कम करने में मदद करेगा. थिंक टैंक GTRI ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील में आई रुकावट छूटी हुई फोन कॉल के बजाय पॉलिसी को लेकर लिए गए मुश्किल फैसलों को दिखाती है. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के फाउंडर अजय श्रीवास्तव ने कहा, "इस देरी को पर्सनल डिप्लोमेसी का मामला बताना एक आसान कहानी हो सकती है, लेकिन यह उन जरूरी मतभेदों को छिपाता है जिन्हें दोनों पक्षों को अभी सुलझाना है और इससे ग्लोबल इकॉनमी में सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रिश्तों में से एक को कम आंकने का खतरा है." ये भी पढ़ें: उधर ट्रंप ने लगाया टैरिफ, इधर करीब आए भारत और चीन; खूब करने लगे सामानों का लेनदेन
India-US Trade Deal: अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील पर बात अटकी हुई है. इस बीच बीते गुरुवार को अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक ने दावा किया कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बात इसलिए फाइनल नहीं हो पाई क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पर्सनली फोन करने से मना कर दिया और इसलिए यह डील नहीं हुई.
लुटनिक ने भी यह भी कहा है, ''हमले इंडोनेशिया, वियतनाम और फिलीपींस के साथ समझौते किए. हमें इनसे पहले भारत के साथ डील पूरी हो जाने की उम्मीद थी. डील पूरी तैयार भी थी, लेकिन पीएम मोदी ने राष्ट्रपति को कॉल नहीं किया, जिससे उनका ईगो हर्ट हुआ और डील पूरी नहीं हुई.''
भारत पर 500 परसेंट टैरिफ का खतरा
इससे पहले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने 'सैंक्शनिंग रशिया एक्ट' को "हरी झंडी" दे दी है. इससे रूस से सस्ते रेट पर क्रूड ऑयल इम्पोर्ट करने वाले देशों पर दबाव बनाया जाएगा, जिससे यूक्रेन में रूसी हमले को रोकने में मदद मिले. इस बिल के तहत खासतौर पर भारत, चीन और ब्राजील पर 500 परसेंट तक टैरिफ लगाने का जिक्र किया गया. कुल मिलाकर दोनों देशों के बीच इस वक्त कई मुद्दों पर बात उलझी हुई है.
टेंशन में आए भारत के एक्सपोर्ट्स
हालांकि, देश के एक्सपोर्ट्स का मानना है कि भारत और अमेरिकी अधिकारियों को आमने-सामने बैठकर मुद्दों को सुलझाना चाहिए ताकि आपसी फायदे वाला ट्रेड एग्रीमेंट हो सके.
उनका कहना है कि अमेरिका ने पहले से ही भारत पर 50 परसेंट टैरिफ लगा रखा है, जिससे दोनों देशों को नुकसान पहुंच रहा है. अब अगर टैरिफ और बढ़ता है, तो इससे अमेरिका और भारत दोनों ही देशों के कारोबार को बड़ा झटका लगेगा. फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) के अध्यक्ष एससी रल्हन कहते हैं, दोनों पक्षों को डील के लिए बातचीत जारी रखनी चाहिए. लेदर इंडस्ट्री से जुड़े एक एक्सपोर्टर ने कहा, अमेरिका भारत के लिए बड़ा बाजार है और ट्रेड एग्रीमेंट होने से देश के एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा.
एक्सपोर्टर ने कहा, "हालांकि हम नए बाजारों की तलाश कर रहे हैं, लेकिन अमेरिका एक प्रमुख बाजार है." इंजीनियरिंग फील्ड के एक अन्य एक्सपोर्टर ने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट व्यापार के मोर्चे पर अनिश्चितताओं को कम करने में मदद करेगा.
थिंक टैंक GTRI ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील में आई रुकावट छूटी हुई फोन कॉल के बजाय पॉलिसी को लेकर लिए गए मुश्किल फैसलों को दिखाती है. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के फाउंडर अजय श्रीवास्तव ने कहा, "इस देरी को पर्सनल डिप्लोमेसी का मामला बताना एक आसान कहानी हो सकती है, लेकिन यह उन जरूरी मतभेदों को छिपाता है जिन्हें दोनों पक्षों को अभी सुलझाना है और इससे ग्लोबल इकॉनमी में सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रिश्तों में से एक को कम आंकने का खतरा है."
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उधर ट्रंप ने लगाया टैरिफ, इधर करीब आए भारत और चीन; खूब करने लगे सामानों का लेनदेन
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