जापान के निप्पॉन स्टील की हुई यूएस स्टील, लंबे समय से अटकी 14.9 बिलियन डॉलर की डील को ट्रंप ने दी मंजूरी

Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को आखिरकार यूएस स्टील (US Steel) और जापान की निप्पॉन स्टील (Nippon Steel) की 14.9 बिलियन डॉलर की डील को मंजूरी दे दी. इसी के साथ यूनाइटेड स्टीलवर्कर्स यूनियन (USW) के विरोध और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर लोगों के मन में उठ रहे सवालों पर विराम लग गया.  राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर ट्रंप ने कही ये बात ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया है, जिसमें लिखा है कि अगर दोनों कंपनियां इस डील से होने वाली राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं को सुलझाने के लिए ट्रेजरी डिपार्टमेंट के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर करती हैं, तो गठजोड़ आगे बढ़ सकता है. ट्रंप का कहना है कि इस डील को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर जो चिंताएं हैं, उन्हें हल किया जा सकता है. इसके लिए दोनों ही कंपनियों को कुछ शर्तों का पालन करना होगा.  दोनों कंपनियों ने ट्रंप को दिया धन्यवाद इस डील को लेकर कंपनियों ने ट्रंप को धन्यवाद देते हुए एक बयान में कहा, हम अमेरिकी स्टीलमेकिंग और मैन्युफैक्चरिंग को फिर से आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धताओं पर काम करने के लिए तत्पर हैं. इस समझौते में 2028 तक लगभग 11 बिलियन डॉलर तक नए निवेश और इसमें अमेरिकी सरकार को 'गोल्डन शेयर' देने का भी का भी जिक्र किया गया. यह गोल्डन शेयर सरकार को अमेरिकी स्टील कंपनी से संबंधित अहम फैसले लेने का वीटो पावर देगा. ट्रंप की इसी मंजूरी के साथ निप्पॉन स्टील यूएस स्टील में 100 परसेंट हिस्सेदारी खरीद लेगी. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2028 के बाद निप्पॉन स्टील एक नई फैक्ट्री के लिए अतिरिक्त 3 बिलियन डॉलर का निवेश करेगी.  क्यों हो रहा था इस डील का विरोध?  बता दें कि यूएस स्टील के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले यूनाइटेड स्टीलवर्कर्स यूनियन (USW) ने जापान की कंपनी द्वारा यूएस स्टील के अधिग्रहण का विरोध किया था. उनका यह कहना था कि यह सौदा अमेरिकी नौकरियों को खतरे में डाल देगा और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा है क्योंकि उनका मानना था कि अमेरिकी स्टील इंडस्ट्री की सप्लाई चेन बहुत मजबूत है और इससे अमेरिका की इकोनॉमी को बहुत फायदा पहुंचता है. ऐसे में अगर इस पर मालिकाना हक किसी विदेशी कंपनी का हो जाता है, तो सप्लाई चेन पूरी तरह से उनके कंट्रोल में आ जाएगा. इससे अमेरिका को नुकसान होगा.    ये भी पढ़ें: इजरायली मिसाइल पर जब फूटा ईरान का गुस्सा तो सहमा अमेरिका, हिल गया वॉल स्ट्रीट, कच्चे तेल में लगी आग

Jun 15, 2025 - 08:30
 0
जापान के निप्पॉन स्टील की हुई यूएस स्टील, लंबे समय से अटकी 14.9 बिलियन डॉलर की डील को ट्रंप ने दी मंजूरी

Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को आखिरकार यूएस स्टील (US Steel) और जापान की निप्पॉन स्टील (Nippon Steel) की 14.9 बिलियन डॉलर की डील को मंजूरी दे दी. इसी के साथ यूनाइटेड स्टीलवर्कर्स यूनियन (USW) के विरोध और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर लोगों के मन में उठ रहे सवालों पर विराम लग गया. 

राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर ट्रंप ने कही ये बात

ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया है, जिसमें लिखा है कि अगर दोनों कंपनियां इस डील से होने वाली राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं को सुलझाने के लिए ट्रेजरी डिपार्टमेंट के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर करती हैं, तो गठजोड़ आगे बढ़ सकता है. ट्रंप का कहना है कि इस डील को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर जो चिंताएं हैं, उन्हें हल किया जा सकता है. इसके लिए दोनों ही कंपनियों को कुछ शर्तों का पालन करना होगा. 

दोनों कंपनियों ने ट्रंप को दिया धन्यवाद

इस डील को लेकर कंपनियों ने ट्रंप को धन्यवाद देते हुए एक बयान में कहा, हम अमेरिकी स्टीलमेकिंग और मैन्युफैक्चरिंग को फिर से आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धताओं पर काम करने के लिए तत्पर हैं. इस समझौते में 2028 तक लगभग 11 बिलियन डॉलर तक नए निवेश और इसमें अमेरिकी सरकार को 'गोल्डन शेयर' देने का भी का भी जिक्र किया गया. यह गोल्डन शेयर सरकार को अमेरिकी स्टील कंपनी से संबंधित अहम फैसले लेने का वीटो पावर देगा. ट्रंप की इसी मंजूरी के साथ निप्पॉन स्टील यूएस स्टील में 100 परसेंट हिस्सेदारी खरीद लेगी. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2028 के बाद निप्पॉन स्टील एक नई फैक्ट्री के लिए अतिरिक्त 3 बिलियन डॉलर का निवेश करेगी. 

क्यों हो रहा था इस डील का विरोध? 

बता दें कि यूएस स्टील के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले यूनाइटेड स्टीलवर्कर्स यूनियन (USW) ने जापान की कंपनी द्वारा यूएस स्टील के अधिग्रहण का विरोध किया था. उनका यह कहना था कि यह सौदा अमेरिकी नौकरियों को खतरे में डाल देगा और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा है क्योंकि उनका मानना था कि अमेरिकी स्टील इंडस्ट्री की सप्लाई चेन बहुत मजबूत है और इससे अमेरिका की इकोनॉमी को बहुत फायदा पहुंचता है. ऐसे में अगर इस पर मालिकाना हक किसी विदेशी कंपनी का हो जाता है, तो सप्लाई चेन पूरी तरह से उनके कंट्रोल में आ जाएगा. इससे अमेरिका को नुकसान होगा. 

 

ये भी पढ़ें:

इजरायली मिसाइल पर जब फूटा ईरान का गुस्सा तो सहमा अमेरिका, हिल गया वॉल स्ट्रीट, कच्चे तेल में लगी आग

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow