घर के अंदर ही छिपी हो सकती है इंटरनेट स्लो होने की बड़ी वजह, ऐसे जानें
जब इंटरनेट धीमा चलता है तो ज्यादातर लोग तुरंत अपने ब्रॉडबैंड प्लान या इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को जिम्मेदार मानते हैं. आम धारणा है कि ज्यादा स्पीड वाला प्लान लेने से इंटरनेट की हर समस्या खत्म हो जाएगी. लेकिन एक नई रिसर्च बताती है कि इंटरनेट की परफॉर्मेंस केवल डाउनलोड स्पीड पर निर्भर नहीं करती. कई बार असली परेशानी आपके घर के अंदर ही मौजूद होती है. इंटरनेट कनेक्शन को समझने के लिए बैंडविथ और लेटेंसी दो अलग चीजें हैं. बैंडविथ बताती है कि एक समय में कितनी मात्रा में डेटा ट्रांसफर हो सकता है जबकि लेटेंसी यह बताती है कि डेटा को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में कितना समय लग रहा है. बड़ी फाइल या फिल्म डाउनलोड करने में बैंडविथ ज्यादा जरूरी होती हैं. लेकिन वीडियो कॉल, ऑनलाइन गेमिंग और वर्चुअल रियलिटी जैसी इंटरैक्टिव सर्विसेज में कम लेटेंसी बेहद जरूरी होती है. ज्यादा लेटेंसी होने पर वीडियो कॉल में आवाज अटक सकती है और गेम में रिएक्शन देर से मिलता है. घर का Wi-Fi बन सकता है सबसे बड़ा कारण रिसर्च में सामने आया कि इंटरनेट में सबसे ज्यादा देरी हमेशा दूर मौजूद सर्वर या इंटरनेट के मुख्य नेटवर्क में नहीं होती है. कई मामलों में समस्या यूजर तक पहुंचने वाले आखिरी हिस्से यानी लास्ट माइल में होती है. घर में यह आखिरी कनेक्शन अक्सर Wi-Fi के जरिए डिवाइस तक पहुंचता है. कमजोर Wi-Fi सिग्नल, एक साथ जुड़े कई डिवाइस और नेटवर्क पर ज्यादा ट्रैफिक लेटेंसी बढ़ा सकते हैं. यानी आपके पास तेज इंटरनेट प्लान होने के बावजूद फोन, टीवी या लैपटॉप पर इंटरनेट एक्सपीरिएंस खराब हो सकता है. एक सेकंड की देरी भी कर सकती है परेशान रिसर्च में कुछ एक्सेस नेटवर्क में लेटेंसी एक सेकंड या उससे ज्यादा तक पहुंचने की बात सामने आई. आम यूजर को एक सेकंड बहुत कम समय लग सकता है लेकिन रियल-टाइम सेवाओं के लिए यह काफी बड़ा अंतर है. जैसे वीडियो मीटिंग में आवाज के बीच अंतर बढ़ सकता है, बातचीत में लोग एक-दूसरे की बात काट सकते हैं और ऑनलाइन गेमिंग के दौरान अचानक फ्रीज या लैग महसूस हो सकता है. यह भी पढ़ें: क्या 100MBPS वाले WiFi प्लान में सच में मिलती है इतनी तेज इंटरनेट स्पीड या बस दिखावा है? समस्या सिर्फ Wi-Fi तक सीमित नहीं रिसर्च में इंटरनेट के दूसरे हिस्सों में छिपी देरी को भी देखा गया. वेब सर्वर के सॉफ्टवेयर में डेटा भेजे जाने से पहले भी एक्सट्रा देरी हो सकती है. इसके अलावा Starlink जैसी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज में नेटवर्क के अलग-अलग हिस्से रिस्पॉन्स टाइम को प्रभावित कर सकते हैं. कैसे खोजी जा सकती है असली समस्या? रिसर्च में ऐसे टूल विकसित किए गए हैं जो इंटरनेट ट्रैफिक को प्रभावित किए बिना रियल टाइम में लेटेंसी की निगरानी कर सकते हैं. इनमें eBPF जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है जिससे कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम के अंदर नेटवर्क एक्टिविटी का विश्लेषण किया जाता है. ऐसे टूल इंटरनेट प्रोवाइडर्स और कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क को यह पता लगाने में मदद कर सकते हैं कि देरी आखिर किस हिस्से में हो रही है. इसका मतलब साफ है कि तेज इंटरनेट के लिए केवल महंगा या ज्यादा Mbps वाला प्लान लेना ही काफी नहीं है. घर में Wi-Fi की कंडिशन, राउटर से दूरी, एक साथ जुड़े डिवाइस और नेटवर्क पर पड़ने वाला लोड भी इंटरनेट एक्सपीरिएंस को काफी प्रभावित कर सकते हैं. यह भी पढ़ें: Google Maps और Earth में क्या है फर्क? जानें क्या है दोनों की टेक्नोलॉजी
जब इंटरनेट धीमा चलता है तो ज्यादातर लोग तुरंत अपने ब्रॉडबैंड प्लान या इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को जिम्मेदार मानते हैं. आम धारणा है कि ज्यादा स्पीड वाला प्लान लेने से इंटरनेट की हर समस्या खत्म हो जाएगी. लेकिन एक नई रिसर्च बताती है कि इंटरनेट की परफॉर्मेंस केवल डाउनलोड स्पीड पर निर्भर नहीं करती. कई बार असली परेशानी आपके घर के अंदर ही मौजूद होती है.
इंटरनेट कनेक्शन को समझने के लिए बैंडविथ और लेटेंसी दो अलग चीजें हैं. बैंडविथ बताती है कि एक समय में कितनी मात्रा में डेटा ट्रांसफर हो सकता है जबकि लेटेंसी यह बताती है कि डेटा को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में कितना समय लग रहा है. बड़ी फाइल या फिल्म डाउनलोड करने में बैंडविथ ज्यादा जरूरी होती हैं. लेकिन वीडियो कॉल, ऑनलाइन गेमिंग और वर्चुअल रियलिटी जैसी इंटरैक्टिव सर्विसेज में कम लेटेंसी बेहद जरूरी होती है. ज्यादा लेटेंसी होने पर वीडियो कॉल में आवाज अटक सकती है और गेम में रिएक्शन देर से मिलता है.
घर का Wi-Fi बन सकता है सबसे बड़ा कारण
रिसर्च में सामने आया कि इंटरनेट में सबसे ज्यादा देरी हमेशा दूर मौजूद सर्वर या इंटरनेट के मुख्य नेटवर्क में नहीं होती है. कई मामलों में समस्या यूजर तक पहुंचने वाले आखिरी हिस्से यानी लास्ट माइल में होती है.
घर में यह आखिरी कनेक्शन अक्सर Wi-Fi के जरिए डिवाइस तक पहुंचता है. कमजोर Wi-Fi सिग्नल, एक साथ जुड़े कई डिवाइस और नेटवर्क पर ज्यादा ट्रैफिक लेटेंसी बढ़ा सकते हैं. यानी आपके पास तेज इंटरनेट प्लान होने के बावजूद फोन, टीवी या लैपटॉप पर इंटरनेट एक्सपीरिएंस खराब हो सकता है.
एक सेकंड की देरी भी कर सकती है परेशान
रिसर्च में कुछ एक्सेस नेटवर्क में लेटेंसी एक सेकंड या उससे ज्यादा तक पहुंचने की बात सामने आई. आम यूजर को एक सेकंड बहुत कम समय लग सकता है लेकिन रियल-टाइम सेवाओं के लिए यह काफी बड़ा अंतर है. जैसे वीडियो मीटिंग में आवाज के बीच अंतर बढ़ सकता है, बातचीत में लोग एक-दूसरे की बात काट सकते हैं और ऑनलाइन गेमिंग के दौरान अचानक फ्रीज या लैग महसूस हो सकता है.
यह भी पढ़ें: क्या 100MBPS वाले WiFi प्लान में सच में मिलती है इतनी तेज इंटरनेट स्पीड या बस दिखावा है?
समस्या सिर्फ Wi-Fi तक सीमित नहीं
रिसर्च में इंटरनेट के दूसरे हिस्सों में छिपी देरी को भी देखा गया. वेब सर्वर के सॉफ्टवेयर में डेटा भेजे जाने से पहले भी एक्सट्रा देरी हो सकती है. इसके अलावा Starlink जैसी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज में नेटवर्क के अलग-अलग हिस्से रिस्पॉन्स टाइम को प्रभावित कर सकते हैं.
कैसे खोजी जा सकती है असली समस्या?
रिसर्च में ऐसे टूल विकसित किए गए हैं जो इंटरनेट ट्रैफिक को प्रभावित किए बिना रियल टाइम में लेटेंसी की निगरानी कर सकते हैं. इनमें eBPF जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है जिससे कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम के अंदर नेटवर्क एक्टिविटी का विश्लेषण किया जाता है. ऐसे टूल इंटरनेट प्रोवाइडर्स और कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क को यह पता लगाने में मदद कर सकते हैं कि देरी आखिर किस हिस्से में हो रही है.
इसका मतलब साफ है कि तेज इंटरनेट के लिए केवल महंगा या ज्यादा Mbps वाला प्लान लेना ही काफी नहीं है. घर में Wi-Fi की कंडिशन, राउटर से दूरी, एक साथ जुड़े डिवाइस और नेटवर्क पर पड़ने वाला लोड भी इंटरनेट एक्सपीरिएंस को काफी प्रभावित कर सकते हैं.
यह भी पढ़ें: Google Maps और Earth में क्या है फर्क? जानें क्या है दोनों की टेक्नोलॉजी
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