गाली दी, कॉलर पकड़कर धमकाया, जब गौतम गंभीर के गुस्से ने खत्म कर दिया खिलाड़ी का करियर, चौंकाने वाली कहानी
क्रिकेट के मैदान पर विवाद अक्सर खिलाड़ियों और कोच के बीच देखने को मिल जाता है. टीम इंडिया के मौजूदा हेड कोच गौतम गंभीर हाल ही में सीनियर खिलाड़ियों के साथ मनमुटाव को लेकर सुर्खियों में रहे हैं. हालांकि यह पहली बार नहीं था जब उनका नाम विवाद में आया हो. पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी के अनुसार गंभीर के साथ उनके रिश्ते की खटास उनके करियर पर भी असर डाल चुकी है. आईपीएल में हुई खटास मनोज तिवारी और गौतम गंभीर दोनों केकेआर के लिए खेलते थे. गंभीर टीम के कप्तान थे और तिवारी का मानना था कि उनके प्रदर्शन के बावजूद उन्हें जानबूझकर बैटिंग ऑर्डर में नीचे रखा गया. मनोज ने मीडिया में खुलासा किया कि ईडन गार्डन्स में मैच के बाद गंभीर ने उन्हें धमकी दी और कॉलर पकड़कर गुस्सा जताया. ऐसी स्थिति हुई कि टीम के बॉलिंग कोच वसीम अकरम को बीच में आकर मामला शांत कराना पड़ा था. मनोज तिवारी का मानना था कि यही घटना उनके केकेआर करियर के समय से पहले खत्म होने का कारण बनी. इस के बाद टीम ने उन्हें रिलीज कर दिया था. रणजी ट्रॉफी का विवाद केकेआर विवाद के बाद, गंभीर और तिवारी का झगड़ा रणजी ट्रॉफी में भी सामने आया. साल 2015 में दिल्ली और बंगाल के बीच फिरोजशाह कोटला में मुकाबला चल रहा था. उस समय मनोज तिवारी बल्लेबाजी कर रहे थे. उन्होंने कैप पहना हुआ था और जब उन्हें पता चला कि अगली गेंद तेज गेंदबाज डालेगा, तो उन्होंने सुरक्षा के लिए डगआउट से हेलमेट की मांग कर दी. गंभीर को यह बात नागवार गुजरी और उन्होंने कथित तौर पर तिवारी को अपशब्द कहे. मामला बढ़ते देख अंपायर को हस्तक्षेप करना पड़ा. करियर पर असर इन विवादों के कारण मनोज तिवारी का आईपीएल और टीम इंडिया में करियर समय से पहले खतरे में आ गया. गंभीर की आक्रामक प्रवृत्ति और गुस्से के कारण टीम में तालमेल बिगड़ा और युवा खिलाड़ी के लिए अवसर कम हो गए.
क्रिकेट के मैदान पर विवाद अक्सर खिलाड़ियों और कोच के बीच देखने को मिल जाता है. टीम इंडिया के मौजूदा हेड कोच गौतम गंभीर हाल ही में सीनियर खिलाड़ियों के साथ मनमुटाव को लेकर सुर्खियों में रहे हैं. हालांकि यह पहली बार नहीं था जब उनका नाम विवाद में आया हो. पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी के अनुसार गंभीर के साथ उनके रिश्ते की खटास उनके करियर पर भी असर डाल चुकी है.
आईपीएल में हुई खटास
मनोज तिवारी और गौतम गंभीर दोनों केकेआर के लिए खेलते थे. गंभीर टीम के कप्तान थे और तिवारी का मानना था कि उनके प्रदर्शन के बावजूद उन्हें जानबूझकर बैटिंग ऑर्डर में नीचे रखा गया. मनोज ने मीडिया में खुलासा किया कि ईडन गार्डन्स में मैच के बाद गंभीर ने उन्हें धमकी दी और कॉलर पकड़कर गुस्सा जताया. ऐसी स्थिति हुई कि टीम के बॉलिंग कोच वसीम अकरम को बीच में आकर मामला शांत कराना पड़ा था. मनोज तिवारी का मानना था कि यही घटना उनके केकेआर करियर के समय से पहले खत्म होने का कारण बनी. इस के बाद टीम ने उन्हें रिलीज कर दिया था.
रणजी ट्रॉफी का विवाद
केकेआर विवाद के बाद, गंभीर और तिवारी का झगड़ा रणजी ट्रॉफी में भी सामने आया. साल 2015 में दिल्ली और बंगाल के बीच फिरोजशाह कोटला में मुकाबला चल रहा था. उस समय मनोज तिवारी बल्लेबाजी कर रहे थे. उन्होंने कैप पहना हुआ था और जब उन्हें पता चला कि अगली गेंद तेज गेंदबाज डालेगा, तो उन्होंने सुरक्षा के लिए डगआउट से हेलमेट की मांग कर दी. गंभीर को यह बात नागवार गुजरी और उन्होंने कथित तौर पर तिवारी को अपशब्द कहे. मामला बढ़ते देख अंपायर को हस्तक्षेप करना पड़ा.
करियर पर असर
इन विवादों के कारण मनोज तिवारी का आईपीएल और टीम इंडिया में करियर समय से पहले खतरे में आ गया. गंभीर की आक्रामक प्रवृत्ति और गुस्से के कारण टीम में तालमेल बिगड़ा और युवा खिलाड़ी के लिए अवसर कम हो गए.
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