गांधी सरोवर परियोजना के लिए चाहिए 98 एकड़ जमीन, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी ने की मांग

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने बुधवार (10 सितंबर, 2025) को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की. इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री रेड्डी ने गांधी सरोवर परियोजना के लिए 98.20 एकड़ रक्षा भूमि को तेलंगाना सरकार को हस्तांतरित करने का आग्रह किया. उन्होंने रक्षा मंत्री को मूसी और ईसा नदियों के संगम पर ‘गांधी सर्कल ऑफ यूनिटी’ स्थापित करने की राज्य सरकार की योजना से अवगत कराया. मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि गांधी सरोवर परियोजना राष्ट्रीय एकता और महात्मा गांधी के कालजयी आदर्शों का स्थायी प्रतीक होगी. देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को मजबूत करने का है एक प्रयास- रेड्डी मुख्यमंत्री रेड्डी ने रक्षा मंत्री को बताया कि गांधी सरोवर परियोजना न केवल तेलंगाना के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है. यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. उन्होंने इस परियोजना को महात्मा गांधी के सिद्धांतों और भारत की एकता को समर्पित एक अनूठा प्रयास बताया. मूसी और ईसा नदियों के संगम पर प्रस्तावित ‘गांधी सर्कल ऑफ यूनिटी’ देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को मजबूत करने का एक प्रयास है. सीएम रेवंत रेड्डी ने रक्षा मंत्रालय की ओर से मांगा सहयोग मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री से आग्रह किया कि इस परियोजना के लिए रक्षा मंत्रालय की ओर से आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाए. उन्होंने कहा कि 98.20 एकड़ भूमि का हस्तांतरण इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए आवश्यक है. रेड्डी ने यह भी आश्वासन दिया कि तेलंगाना सरकार इस परियोजना को पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ लागू करेगी. दोनों नेताओं के बीच मुलाकात में हुई सकारात्मक और रचनात्मक चर्चा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के प्रस्ताव को गंभीरता से सुना और इस पर विचार करने का आश्वासन दिया. यह मुलाकात दोनों नेताओं के बीच सकारात्मक और रचनात्मक चर्चा का हिस्सा थी. गांधी सरोवर परियोजना तेलंगाना के विकास और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. इस परियोजना के पूरा होने से न केवल स्थानीय स्तर पर विकास को गति मिलेगी, बल्कि यह देश के अन्य हिस्सों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी. यह भी पढ़ेंः दिल्ली दंगेः हाई कोर्ट से खारिज हुई जमानत याचिका तो उमर खालिद ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

Sep 10, 2025 - 23:30
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गांधी सरोवर परियोजना के लिए चाहिए 98 एकड़ जमीन, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी ने की मांग

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने बुधवार (10 सितंबर, 2025) को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की. इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री रेड्डी ने गांधी सरोवर परियोजना के लिए 98.20 एकड़ रक्षा भूमि को तेलंगाना सरकार को हस्तांतरित करने का आग्रह किया. उन्होंने रक्षा मंत्री को मूसी और ईसा नदियों के संगम पर ‘गांधी सर्कल ऑफ यूनिटी’ स्थापित करने की राज्य सरकार की योजना से अवगत कराया. मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि गांधी सरोवर परियोजना राष्ट्रीय एकता और महात्मा गांधी के कालजयी आदर्शों का स्थायी प्रतीक होगी.

देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को मजबूत करने का है एक प्रयास- रेड्डी

मुख्यमंत्री रेड्डी ने रक्षा मंत्री को बताया कि गांधी सरोवर परियोजना न केवल तेलंगाना के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है. यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. उन्होंने इस परियोजना को महात्मा गांधी के सिद्धांतों और भारत की एकता को समर्पित एक अनूठा प्रयास बताया. मूसी और ईसा नदियों के संगम पर प्रस्तावित ‘गांधी सर्कल ऑफ यूनिटी’ देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को मजबूत करने का एक प्रयास है.

सीएम रेवंत रेड्डी ने रक्षा मंत्रालय की ओर से मांगा सहयोग

मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री से आग्रह किया कि इस परियोजना के लिए रक्षा मंत्रालय की ओर से आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाए. उन्होंने कहा कि 98.20 एकड़ भूमि का हस्तांतरण इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए आवश्यक है. रेड्डी ने यह भी आश्वासन दिया कि तेलंगाना सरकार इस परियोजना को पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ लागू करेगी.

दोनों नेताओं के बीच मुलाकात में हुई सकारात्मक और रचनात्मक चर्चा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के प्रस्ताव को गंभीरता से सुना और इस पर विचार करने का आश्वासन दिया. यह मुलाकात दोनों नेताओं के बीच सकारात्मक और रचनात्मक चर्चा का हिस्सा थी. गांधी सरोवर परियोजना तेलंगाना के विकास और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. इस परियोजना के पूरा होने से न केवल स्थानीय स्तर पर विकास को गति मिलेगी, बल्कि यह देश के अन्य हिस्सों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी.

यह भी पढ़ेंः दिल्ली दंगेः हाई कोर्ट से खारिज हुई जमानत याचिका तो उमर खालिद ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

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