खेत मजदूर की बेटी ने दिखाया कमाल, बिना पक्के घर और शिक्षक के भी लहराया परचम
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ने 12वीं कक्षा का रिजल्ट घोषित कर दिया है और इस बार सिर्फ नंबरों की नहीं, हौसलों की जीत हुई है. विज्ञान, कॉमर्स और आर्ट्स – तीनों स्ट्रीम के नतीजे एक साथ जारी किए गए. साइंस में पास प्रतिशत रहा 98.43%, कॉमर्स में 99.07% और आर्ट्स में 97.78%. मेहनतकश परिवारों से निकले टॉपर्स इस बार कई ऐसे छात्र-छात्राओं ने बाजी मारी है, जिनकी जिंदगी काफी संघर्ष से भरी हुई हैं. कोई मजदूर का बेटा है तो कोई फल बेचने वाले की बेटी. इन बच्चों ने साबित कर दिया कि सपनों को उड़ान देने के लिए हालात नहीं, हौसला चाहिए. यहां हम आपको एक खेत में करने वाले मजदूर की बेटी के बारे में बताने जा रहे हैं. खेत मजदूर की बेटी ने लहराया परचम पाली जिले के गजनीपुरा गांव की मीनाक्षी चौधरी ने आर्ट्स स्ट्रीम में 97.80% अंक हासिल कर पूरे जिले में नाम रोशन किया है. मीनाक्षी एक खेत मजदूर की बेटी हैं और उनके पास न तो पक्का घर है, न ही अच्छे स्कूल की सुविधाएं. उनके स्कूल में आर्ट्स के मुख्य विषयों के लिए शिक्षक ही नहीं थे. तीसरे ग्रेड के शिक्षकों से ली मदद ऐसे हालात में भी मीनाक्षी ने हार नहीं मानी. उन्होंने तीसरे ग्रेड के शिक्षकों से मदद ली और अपनी पढ़ाई जारी रखी. वे अपनी नानी के घर रहकर पढ़ाई करती थीं और खेतों में काम कर अपने माता-पिता की मदद भी करती थीं. यह भी पढ़ें: इन नौकरियों में है सबसे कम सुकून, क्या आप भी करते हैं इनमें से कोई काम? शिक्षक बोले- मिसाल है मीनाक्षी उनके स्कूल के प्रिंसिपल रंछोड़ लाल बंजारा ने कहा कि मीनाक्षी की सफलता मेहनत और जिद की मिसाल है. वह बताती हैं कि आगे चलकर वह शिक्षा या प्रशासनिक क्षेत्र में करियर बनाना चाहती हैं. यह भी पढ़ें: सरकारी अफसर बनने का सुनहरा मौका, असिस्टेंट कमिश्नर के बंपर पदों भर्ती शुरू, लाखों में है सैलरी
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ने 12वीं कक्षा का रिजल्ट घोषित कर दिया है और इस बार सिर्फ नंबरों की नहीं, हौसलों की जीत हुई है. विज्ञान, कॉमर्स और आर्ट्स – तीनों स्ट्रीम के नतीजे एक साथ जारी किए गए. साइंस में पास प्रतिशत रहा 98.43%, कॉमर्स में 99.07% और आर्ट्स में 97.78%.
मेहनतकश परिवारों से निकले टॉपर्स
इस बार कई ऐसे छात्र-छात्राओं ने बाजी मारी है, जिनकी जिंदगी काफी संघर्ष से भरी हुई हैं. कोई मजदूर का बेटा है तो कोई फल बेचने वाले की बेटी. इन बच्चों ने साबित कर दिया कि सपनों को उड़ान देने के लिए हालात नहीं, हौसला चाहिए. यहां हम आपको एक खेत में करने वाले मजदूर की बेटी के बारे में बताने जा रहे हैं.
खेत मजदूर की बेटी ने लहराया परचम
पाली जिले के गजनीपुरा गांव की मीनाक्षी चौधरी ने आर्ट्स स्ट्रीम में 97.80% अंक हासिल कर पूरे जिले में नाम रोशन किया है. मीनाक्षी एक खेत मजदूर की बेटी हैं और उनके पास न तो पक्का घर है, न ही अच्छे स्कूल की सुविधाएं. उनके स्कूल में आर्ट्स के मुख्य विषयों के लिए शिक्षक ही नहीं थे.
तीसरे ग्रेड के शिक्षकों से ली मदद
ऐसे हालात में भी मीनाक्षी ने हार नहीं मानी. उन्होंने तीसरे ग्रेड के शिक्षकों से मदद ली और अपनी पढ़ाई जारी रखी. वे अपनी नानी के घर रहकर पढ़ाई करती थीं और खेतों में काम कर अपने माता-पिता की मदद भी करती थीं.
यह भी पढ़ें: इन नौकरियों में है सबसे कम सुकून, क्या आप भी करते हैं इनमें से कोई काम?
शिक्षक बोले- मिसाल है मीनाक्षी
उनके स्कूल के प्रिंसिपल रंछोड़ लाल बंजारा ने कहा कि मीनाक्षी की सफलता मेहनत और जिद की मिसाल है. वह बताती हैं कि आगे चलकर वह शिक्षा या प्रशासनिक क्षेत्र में करियर बनाना चाहती हैं.
यह भी पढ़ें: सरकारी अफसर बनने का सुनहरा मौका, असिस्टेंट कमिश्नर के बंपर पदों भर्ती शुरू, लाखों में है सैलरी
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