खत्म होगा लंबा इंतजार! NSE IPO को लॉन्च कराने की चल रही बड़ी तैयारी, सेबी ने दिया जरूरी अपडेट

NSE IPO: सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) इस महीने के आखिर तक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NoC) जारी कर सकता है और इसी के साथ IPO लाने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाया जाएगा. सेबी के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने शनिवार को कहा, "हमें उन्हें NoC देना है और फिर NSE को DRHP वगैरह फाइल करने की दूसरी प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा. शायद, यह (NoC) इस महीने तक जारी कर दिया जाएगा.'' NoC क्या है? आईपीओ लाने के लिए किसी कंपनी या NSE जैसे स्टॉक एक्सचेंज को मार्केट रेगुलेटर सेबी के साथ-साथ दूसरे संबंधित पक्षों से अप्रूवल की जरूरत पड़ती है. इससे पता चलता है कि आईपीओ लाने के मामले में किसी को कोई आपत्ति नहीं है. NoC को आप एक रेगुलेटरी अप्रूवल के तौर पर समझ सकते हैं, जिसकी जरूरत आईपीओ लाने से पहले पड़ती है.  आम कंपनियों के उलट, स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरी और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन जैसे मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थानों को अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस जमा करने से पहले सेबी से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होता है. यह कदम भारत के फाइनेंशियल मार्केट की स्थिरता और कामकाज के लिए उनके महत्व को दिखाता है. कहां अटका है मामला?  NSE का IPO डार्क फाइबर केस की वजह से अटक गया, जिसमें आरोप लगे थे कि 2010 और 2014 के बीच कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को एक्सचेंज के को-लोकेशन सर्वर तक तेज प्राइवेट कम्युनिकेशन लाइनों के जरिए खास एक्सेस मिला, जिससे ट्रेड जल्दी एग्जीक्यूट हो सके. अप्रैल 2019 में सेबी ने NSE को कथित गैर-कानूनी कमाई के 62.58 करोड़ रुपये वापस करने का निर्देश दिया और इससे संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को मार्केट से जुड़े पदों से बैन कर दिया. सेबी ने 2022 में NSE पर 7 करोड़ का जुर्माना भी लगाया था, जिसे बाद में सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल ने रद्द कर दिया था.इसके बाद सेबी ने सितंबर 2023 और फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट में SAT के आदेश को चुनौती दी थी.  BSE से कहीं ज्यादा NSE का मार्केट कैप इनक्रेड के डेटा के मुताबिक, NSE के अनलिस्टेड शेयर की कीमत 2,045 रुपये प्रति शेयर है, जिससे इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 5.06 ट्रिलियन हो गया, जो लिस्टेड प्रतिद्वंद्वी BSE के आकार का लगभग पांच गुना है. बीएसई का मार्केट कैप शुक्रवार तक एक्सचेंज डेटा के अनुसार 1.09 ट्रिलियन डालर था. एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, 30 नवंबर तक इक्विटी कैश सेगमेंट में NSE की हिस्सेदारी 92.7 परसेंट और इक्विटी ऑप्शंस सेगमेंट में 74.3 परसेंट थी. खास बात यह है कि NSE के शेयरों की कीमत अधिक होने के बावजूद रिटेल निवेशकों की इसके आईपीओ में दिलचस्पी बनी हुई है. लगभग 1.46 लाख निवेशकों के पास एनएसई के शेयर हैं, जिनकी कीमत 2 लाख रुपए से कम है.    डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.) ये भी पढ़ें: Reliance Jio IPO: हो जाएं तैयार! आ रहा है रिलायंस जियो का धाकड़ IPO, जानें कब होने जा रहा लॉन्च? 

Jan 11, 2026 - 08:30
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खत्म होगा लंबा इंतजार! NSE IPO को लॉन्च कराने की चल रही बड़ी तैयारी, सेबी ने दिया जरूरी अपडेट

NSE IPO: सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) इस महीने के आखिर तक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NoC) जारी कर सकता है और इसी के साथ IPO लाने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाया जाएगा. सेबी के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने शनिवार को कहा, "हमें उन्हें NoC देना है और फिर NSE को DRHP वगैरह फाइल करने की दूसरी प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा. शायद, यह (NoC) इस महीने तक जारी कर दिया जाएगा.''

NoC क्या है?

आईपीओ लाने के लिए किसी कंपनी या NSE जैसे स्टॉक एक्सचेंज को मार्केट रेगुलेटर सेबी के साथ-साथ दूसरे संबंधित पक्षों से अप्रूवल की जरूरत पड़ती है. इससे पता चलता है कि आईपीओ लाने के मामले में किसी को कोई आपत्ति नहीं है. NoC को आप एक रेगुलेटरी अप्रूवल के तौर पर समझ सकते हैं, जिसकी जरूरत आईपीओ लाने से पहले पड़ती है. 

आम कंपनियों के उलट, स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरी और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन जैसे मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थानों को अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस जमा करने से पहले सेबी से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होता है. यह कदम भारत के फाइनेंशियल मार्केट की स्थिरता और कामकाज के लिए उनके महत्व को दिखाता है.

कहां अटका है मामला? 

NSE का IPO डार्क फाइबर केस की वजह से अटक गया, जिसमें आरोप लगे थे कि 2010 और 2014 के बीच कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को एक्सचेंज के को-लोकेशन सर्वर तक तेज प्राइवेट कम्युनिकेशन लाइनों के जरिए खास एक्सेस मिला, जिससे ट्रेड जल्दी एग्जीक्यूट हो सके.

अप्रैल 2019 में सेबी ने NSE को कथित गैर-कानूनी कमाई के 62.58 करोड़ रुपये वापस करने का निर्देश दिया और इससे संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को मार्केट से जुड़े पदों से बैन कर दिया. सेबी ने 2022 में NSE पर 7 करोड़ का जुर्माना भी लगाया था, जिसे बाद में सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल ने रद्द कर दिया था.
इसके बाद सेबी ने सितंबर 2023 और फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट में SAT के आदेश को चुनौती दी थी. 

BSE से कहीं ज्यादा NSE का मार्केट कैप

इनक्रेड के डेटा के मुताबिक, NSE के अनलिस्टेड शेयर की कीमत 2,045 रुपये प्रति शेयर है, जिससे इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 5.06 ट्रिलियन हो गया, जो लिस्टेड प्रतिद्वंद्वी BSE के आकार का लगभग पांच गुना है. बीएसई का मार्केट कैप शुक्रवार तक एक्सचेंज डेटा के अनुसार 1.09 ट्रिलियन डालर था.

एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, 30 नवंबर तक इक्विटी कैश सेगमेंट में NSE की हिस्सेदारी 92.7 परसेंट और इक्विटी ऑप्शंस सेगमेंट में 74.3 परसेंट थी. खास बात यह है कि NSE के शेयरों की कीमत अधिक होने के बावजूद रिटेल निवेशकों की इसके आईपीओ में दिलचस्पी बनी हुई है. लगभग 1.46 लाख निवेशकों के पास एनएसई के शेयर हैं, जिनकी कीमत 2 लाख रुपए से कम है. 

 

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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Reliance Jio IPO: हो जाएं तैयार! आ रहा है रिलायंस जियो का धाकड़ IPO, जानें कब होने जा रहा लॉन्च? 

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