क्लाइंट की कानूनी सहायता करने वाले वकील को क्या जांच एजेंसी पूछताछ के लिए बुला सकती है? सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वकीलों से उनके कानूनी कामकाज के लिए पूछताछ न्यायिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाएगी. गुजरात के एक वकील को पुलिस की तरफ से भेजे गए समन पर रोक लगाते हुए कोर्ट ने इससे जुड़े व्यापक प्रश्न पर स्वतः संज्ञान ले लिया. मामले में अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन से कोर्ट की सहायता करने को कहा गया है. जस्टिस के वी विश्वनाथन और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की अवकाशकालीन बेंच ने कहा है इस मामले को चीफ जस्टिस के सामने रखा जाए ताकि वह उचित बेंच का गठन कर सकें. जजों ने कहा कि वकील और क्लाइंट के बीच हुई बातचीत विशिष्ट श्रेणी में आती है. अगर वकील को अपने मुवक्किल को कानूनी सलाह या सहायता देने के लिए पुलिस कार्रवाई के दायरे में जाने दिया गया तो यह निष्पक्ष न्याय पर सीधा असर डालेगा. वकीलों की स्वायत्तता न्यायिक व्यवस्था का एक अहम हिस्सा है. जजों ने कहा कि मामले में 2 अहम सवालों पर विचार की आवश्यकता है :- 1. क्या किसी मुकदमे में सिर्फ एक वकील की हैसियत से अपने मुवक्किल को सलाह दे रहे व्यक्ति को पुलिस या दूसरी जांच एजेंसी पूछताछ के लिए समन भेज सकती है?2. अगर जांच एजेंसी को ऐसा लगता है कि मामले में वकील की भूमिका सिर्फ कानूनी सहायता तक सीमित नहीं है, तब भी क्या कोर्ट की अनुमति के बिना उसे समन भेजा जाना चाहिए? सुप्रीम कोर्ट ने जिस मामले पर संज्ञान लिया है उसमें एक वकील को अहमदाबाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 179 (नकली सिक्कों, स्टांप या नोट को असली की जगह इस्तेमाल करना) से जुड़े मामले में पूछताछ के लिए बुलाया था. वकील ने एक व्यक्ति को बैंक लोन से जुड़े मामले में जमानत दिलवाई थी. इसके बाद पुलिस ने उसे समन भेजा था. गुजरात हाई कोर्ट ने समन पर रोक से मना कर दिया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी है. ध्यान रहे कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को ईडी की तरफ से भेजे गए समन पर भी काफी विवाद हुआ था. बाद में एजेंसी ने खुद ही उन्हें वापस ले लिया था.

Jun 25, 2025 - 20:30
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क्लाइंट की कानूनी सहायता करने वाले वकील को क्या जांच एजेंसी पूछताछ के लिए बुला सकती है? सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वकीलों से उनके कानूनी कामकाज के लिए पूछताछ न्यायिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाएगी. गुजरात के एक वकील को पुलिस की तरफ से भेजे गए समन पर रोक लगाते हुए कोर्ट ने इससे जुड़े व्यापक प्रश्न पर स्वतः संज्ञान ले लिया. मामले में अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन से कोर्ट की सहायता करने को कहा गया है.

जस्टिस के वी विश्वनाथन और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की अवकाशकालीन बेंच ने कहा है इस मामले को चीफ जस्टिस के सामने रखा जाए ताकि वह उचित बेंच का गठन कर सकें. जजों ने कहा कि वकील और क्लाइंट के बीच हुई बातचीत विशिष्ट श्रेणी में आती है. अगर वकील को अपने मुवक्किल को कानूनी सलाह या सहायता देने के लिए पुलिस कार्रवाई के दायरे में जाने दिया गया तो यह निष्पक्ष न्याय पर सीधा असर डालेगा. वकीलों की स्वायत्तता न्यायिक व्यवस्था का एक अहम हिस्सा है.

जजों ने कहा कि मामले में 2 अहम सवालों पर विचार की आवश्यकता है :-

1. क्या किसी मुकदमे में सिर्फ एक वकील की हैसियत से अपने मुवक्किल को सलाह दे रहे व्यक्ति को पुलिस या दूसरी जांच एजेंसी पूछताछ के लिए समन भेज सकती है?
2. अगर जांच एजेंसी को ऐसा लगता है कि मामले में वकील की भूमिका सिर्फ कानूनी सहायता तक सीमित नहीं है, तब भी क्या कोर्ट की अनुमति के बिना उसे समन भेजा जाना चाहिए?

सुप्रीम कोर्ट ने जिस मामले पर संज्ञान लिया है उसमें एक वकील को अहमदाबाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 179 (नकली सिक्कों, स्टांप या नोट को असली की जगह इस्तेमाल करना) से जुड़े मामले में पूछताछ के लिए बुलाया था. वकील ने एक व्यक्ति को बैंक लोन से जुड़े मामले में जमानत दिलवाई थी. इसके बाद पुलिस ने उसे समन भेजा था.

गुजरात हाई कोर्ट ने समन पर रोक से मना कर दिया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी है. ध्यान रहे कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को ईडी की तरफ से भेजे गए समन पर भी काफी विवाद हुआ था. बाद में एजेंसी ने खुद ही उन्हें वापस ले लिया था.

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