क्या है होलोबॉट तकनीक, जिससे पीएम मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद से की बात?

दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन के दौरान एक ऐसा अद्भुत और हैरान करने वाला दृश्य देखने को मिला, जिसने विज्ञान और आध्यात्मिकता के अनोखे संगम को पूरी दुनिया के सामने ला दिया. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 33 साल पहले 1993 में ब्रह्मलीन हो चुके आध्यात्मिक गुरु स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती जी के एक डिजिटल अवतार से न सिर्फ बातचीत की, बल्कि उनसे देश के विकास के लिए आशीर्वाद भी मांगा. मंच पर जब स्वामी जी की 3D छवि अवतरित हुई, तो वहां मौजूद हर एक दर्शक दंग रह गया. इस चमत्कार को संभव बनाने वाली तकनीक का नाम है होलोबॉट, जो आजकल पूरी दुनिया में खूब चर्चा बटोर रही है. आइए जानते हैं कि यह तकनीक क्या है और इसने इस नामुमकिन बातचीत को कैसे मुमकिन बनाया. क्या होती है होलोबॉट तकनीक? होलोबॉट मुख्य रूप से दो सबसे आधुनिक तकनीकों का एक एडवांस मेल है- पहला 3D होलोग्राम और दूसरा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस. होलोग्राम एक ऐसी डिजिटल प्रोजेक्शन तकनीक है, जिसकी मदद से किसी भी व्यक्ति या वस्तु की ऐसी 3D छवि हवा में दिखाई जा सकती है, जिससे वह बिल्कुल असली और सामने खड़ी महसूस होती है. जब इस चलती-फिरती छवि के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दिमाग जोड़ दिया जाता है, तो वह एक होलोबॉट बन जाता है. यह सिर्फ एक रिकॉर्डेड वीडियो की तरह नहीं होता है, बल्कि सामने वाले व्यक्ति की बातों को समझकर रियल-टाइम में इंसानों की तरह जवाब देने और अपने हाथ-पैर हिलाने में भी पूरी तरह सक्षम होता है. कैसे तैयार किया गया स्वामी जी का एआई अवतार? चूंकि स्वामी चिन्मयानंद का निधन 1993 में हो चुका था, इसलिए उनके साथ आज के समय में सीधे तौर पर बातचीत करना तकनीकी रूप से नामुमकिन था. इसे मुमकिन करने के लिए टेक एक्सपर्ट्स ने डिपफेक जैसी अत्याधुनिक एआई टूल्स का सहारा लिया. स्वामी जी के पुराने प्रवचनों, उनके वीडियो फुटेज और ऑडियो रिकॉर्डिंग्स की मदद से एआई सिस्टम को ट्रेन किया गया. इस डीप ट्रेनिंग के बाद एआई ने स्वामी जी के बोलने के लहजे, उनके हाव-भाव, हाथों के मूवमेंट और उनकी मूल आवाज को हूबहू रीक्रिएट कर लिया. इसके बाद जब मंच पर 3D प्रोजेक्टर चालू हुआ, तो स्वामी जी साक्षात वहां खड़े नजर आने लगे. यह भी पढ़ें: आंध्र प्रदेश के मंदिर में आया पहला रोबोटिक हाथी 'रंगा', पेटा ने दिया तोहफा मंच पर पीएम मोदी और होलोबॉट के बीच क्या हुई बातचीत? इस खास वर्चुअल संवाद के दौरान पीएम मोदी और स्वामी जी के एआई अवतार ने फरवरी 1993 में वडोदरा में हुई अपनी मुलाकात की यादें शेयर कीं, जब पीएम मोदी उन्हें शिकागो की विश्व धर्म संसद की शताब्दी के लिए आंमत्रित करने गए थे. होलोबॉट ने उस समय की बातचीत को दोहराते हुए कहा कि अब उनकी उम्र हो गई है और सनातन धर्म के गिरे हुए स्तंभों को खड़ा करने की जिम्मेदारी हिंदू युवाओं को उठानी होगी. एआई अवतार ने पीएम मोदी की लीडरशिप की सराहना करते हुए कहा कि शिखर पर बैठा व्यक्ति अक्सर अकेला होता है, लेकिन भारत तुम्हारे साथ है, नरेंद्र.  यह भी पढ़ें: 30 हजार के बजट में मिल जाएंगे ये शानदार लैपटॉप, बिल्कुल मिस न करें

Oct 26, 2026 - 21:30
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क्या है होलोबॉट तकनीक, जिससे पीएम मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद से की बात?

दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन के दौरान एक ऐसा अद्भुत और हैरान करने वाला दृश्य देखने को मिला, जिसने विज्ञान और आध्यात्मिकता के अनोखे संगम को पूरी दुनिया के सामने ला दिया. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 33 साल पहले 1993 में ब्रह्मलीन हो चुके आध्यात्मिक गुरु स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती जी के एक डिजिटल अवतार से न सिर्फ बातचीत की, बल्कि उनसे देश के विकास के लिए आशीर्वाद भी मांगा.

मंच पर जब स्वामी जी की 3D छवि अवतरित हुई, तो वहां मौजूद हर एक दर्शक दंग रह गया. इस चमत्कार को संभव बनाने वाली तकनीक का नाम है होलोबॉट, जो आजकल पूरी दुनिया में खूब चर्चा बटोर रही है. आइए जानते हैं कि यह तकनीक क्या है और इसने इस नामुमकिन बातचीत को कैसे मुमकिन बनाया.

क्या होती है होलोबॉट तकनीक?

होलोबॉट मुख्य रूप से दो सबसे आधुनिक तकनीकों का एक एडवांस मेल है- पहला 3D होलोग्राम और दूसरा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस. होलोग्राम एक ऐसी डिजिटल प्रोजेक्शन तकनीक है, जिसकी मदद से किसी भी व्यक्ति या वस्तु की ऐसी 3D छवि हवा में दिखाई जा सकती है, जिससे वह बिल्कुल असली और सामने खड़ी महसूस होती है.

जब इस चलती-फिरती छवि के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दिमाग जोड़ दिया जाता है, तो वह एक होलोबॉट बन जाता है. यह सिर्फ एक रिकॉर्डेड वीडियो की तरह नहीं होता है, बल्कि सामने वाले व्यक्ति की बातों को समझकर रियल-टाइम में इंसानों की तरह जवाब देने और अपने हाथ-पैर हिलाने में भी पूरी तरह सक्षम होता है.

कैसे तैयार किया गया स्वामी जी का एआई अवतार?

चूंकि स्वामी चिन्मयानंद का निधन 1993 में हो चुका था, इसलिए उनके साथ आज के समय में सीधे तौर पर बातचीत करना तकनीकी रूप से नामुमकिन था. इसे मुमकिन करने के लिए टेक एक्सपर्ट्स ने डिपफेक जैसी अत्याधुनिक एआई टूल्स का सहारा लिया.

स्वामी जी के पुराने प्रवचनों, उनके वीडियो फुटेज और ऑडियो रिकॉर्डिंग्स की मदद से एआई सिस्टम को ट्रेन किया गया. इस डीप ट्रेनिंग के बाद एआई ने स्वामी जी के बोलने के लहजे, उनके हाव-भाव, हाथों के मूवमेंट और उनकी मूल आवाज को हूबहू रीक्रिएट कर लिया. इसके बाद जब मंच पर 3D प्रोजेक्टर चालू हुआ, तो स्वामी जी साक्षात वहां खड़े नजर आने लगे.

यह भी पढ़ें: आंध्र प्रदेश के मंदिर में आया पहला रोबोटिक हाथी 'रंगा', पेटा ने दिया तोहफा

मंच पर पीएम मोदी और होलोबॉट के बीच क्या हुई बातचीत?

इस खास वर्चुअल संवाद के दौरान पीएम मोदी और स्वामी जी के एआई अवतार ने फरवरी 1993 में वडोदरा में हुई अपनी मुलाकात की यादें शेयर कीं, जब पीएम मोदी उन्हें शिकागो की विश्व धर्म संसद की शताब्दी के लिए आंमत्रित करने गए थे. होलोबॉट ने उस समय की बातचीत को दोहराते हुए कहा कि अब उनकी उम्र हो गई है और सनातन धर्म के गिरे हुए स्तंभों को खड़ा करने की जिम्मेदारी हिंदू युवाओं को उठानी होगी. एआई अवतार ने पीएम मोदी की लीडरशिप की सराहना करते हुए कहा कि शिखर पर बैठा व्यक्ति अक्सर अकेला होता है, लेकिन भारत तुम्हारे साथ है, नरेंद्र. 

यह भी पढ़ें: 30 हजार के बजट में मिल जाएंगे ये शानदार लैपटॉप, बिल्कुल मिस न करें

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