क्या है FD लैडरिंग? ₹1 लाख के निवेश को अधिकतम मुनाफे में बदलने का आसान तरीका
FD Laddering Strategy: निवेशक जो बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहना चाहते हैं, वे फिक्स्ड डिपॉजिट को एक भरोसेमंद विकल्प के तौर पर देखते हैं. एफडी में निवेशकों को तय ब्याज दर के साथ सुरक्षित रिटर्न भी मिलता है. जिससे निवेशक को ज्यादा जोखिम नहीं उठाना पड़ता. हालांकि, अगर आप FD लैडरिंग की प्लानिंग को शामिल करें तो आपके रिटर्न में बदलाव दिख सकता है. आइए जानते हैं, आखिर FD लैडरिंग क्या होता है और कैसे काम करता है? FD लैडरिंग क्या है? FD लैडरिंग एक ऐसा तरीका है, जिसमें निवेशक अलग-अलग समय के लिए कई फिक्स्ड डिपॉजिट करते हैं. ताकि हर कुछ समय पर एक-एक एफडी पूरी होती रहे. यह तरीका खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी होता है, जो लंबे समय तक सुरक्षित निवेश करना चाहते हैं. FD लैडरिंग का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि आपको समय-समय पर पैसा मिलता रहता है. साथ ही, अलग-अलग अवधि में निवेश होने की वजह से बेहतर ब्याज दरों का लाभ लेने का मौका भी बनता है. FD लैडरिंग के फायदे FD लैडरिंग अपनाने से निवेशक को कई तरह के लाभ मिलते हैं. अलग-अलग समय में पैसे लगाने से बेहतर ब्याज दरों का फायदा मिल सकता है. साथ ही कुल रिटर्न भी बढ़ने की संभावना रहती है. यह तरीका टैक्स प्लानिंग में भी मदद करता है और जोखिम को कम करता है. मैच्योरिटी के वक्त अगर बेहतर ब्याज दरें मिल रही हैं तो, आप इसे दोबारा से निवेश कर सकते हैं. 1 लाख रुपये से FD लैडरिंग अगर आप 1 लाख रुपये को FD में लगाना चाहते हैं, तो इसे एक साथ निवेश करने की जगह छोटे-छोटे हिस्सों में बांटना ज्यादा समझदारी भरा होता है. उदाहरण के लिए आप इसे 20-20 हजार रुपये में बांटकर अलग-अलग समय के लिए FD कर सकते हैं. जिससे हर साल एक-एक FD पूरी होती रहेगी. जब कोई FD पूरी हो जाए, तो उस पैसे को जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर बचे हुए पैसों को दोबारा निवेश कर सकते हैं. इसी तरह बाकी FD के साथ भी यही तरीका अपनाने से आपका पैसा लगातार रन करता है. साथ ही ज्यादा रिटर्न मिलने की उम्मीद भी रहती है. यह भी पढ़ें: SIP में सिर्फ 5 साल की देरी और 3 करोड़ का नुकसान! ये है कंपाउंडिंग का खौफनाक गणित, आलस छोड़ें
FD Laddering Strategy: निवेशक जो बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहना चाहते हैं, वे फिक्स्ड डिपॉजिट को एक भरोसेमंद विकल्प के तौर पर देखते हैं. एफडी में निवेशकों को तय ब्याज दर के साथ सुरक्षित रिटर्न भी मिलता है. जिससे निवेशक को ज्यादा जोखिम नहीं उठाना पड़ता. हालांकि, अगर आप FD लैडरिंग की प्लानिंग को शामिल करें तो आपके रिटर्न में बदलाव दिख सकता है. आइए जानते हैं, आखिर FD लैडरिंग क्या होता है और कैसे काम करता है?
FD लैडरिंग क्या है?
FD लैडरिंग एक ऐसा तरीका है, जिसमें निवेशक अलग-अलग समय के लिए कई फिक्स्ड डिपॉजिट करते हैं. ताकि हर कुछ समय पर एक-एक एफडी पूरी होती रहे. यह तरीका खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी होता है, जो लंबे समय तक सुरक्षित निवेश करना चाहते हैं.
FD लैडरिंग का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि आपको समय-समय पर पैसा मिलता रहता है. साथ ही, अलग-अलग अवधि में निवेश होने की वजह से बेहतर ब्याज दरों का लाभ लेने का मौका भी बनता है.
FD लैडरिंग के फायदे
FD लैडरिंग अपनाने से निवेशक को कई तरह के लाभ मिलते हैं. अलग-अलग समय में पैसे लगाने से बेहतर ब्याज दरों का फायदा मिल सकता है. साथ ही कुल रिटर्न भी बढ़ने की संभावना रहती है.
यह तरीका टैक्स प्लानिंग में भी मदद करता है और जोखिम को कम करता है. मैच्योरिटी के वक्त अगर बेहतर ब्याज दरें मिल रही हैं तो, आप इसे दोबारा से निवेश कर सकते हैं.
1 लाख रुपये से FD लैडरिंग
अगर आप 1 लाख रुपये को FD में लगाना चाहते हैं, तो इसे एक साथ निवेश करने की जगह छोटे-छोटे हिस्सों में बांटना ज्यादा समझदारी भरा होता है. उदाहरण के लिए आप इसे 20-20 हजार रुपये में बांटकर अलग-अलग समय के लिए FD कर सकते हैं. जिससे हर साल एक-एक FD पूरी होती रहेगी.
जब कोई FD पूरी हो जाए, तो उस पैसे को जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर बचे हुए पैसों को दोबारा निवेश कर सकते हैं. इसी तरह बाकी FD के साथ भी यही तरीका अपनाने से आपका पैसा लगातार रन करता है. साथ ही ज्यादा रिटर्न मिलने की उम्मीद भी रहती है.
यह भी पढ़ें: SIP में सिर्फ 5 साल की देरी और 3 करोड़ का नुकसान! ये है कंपाउंडिंग का खौफनाक गणित, आलस छोड़ें
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