क्या शेर और बाघ के काटने से भी हो सकता है रेबीज? जानिए क्या है सच

रेबीज का नाम आते ही सबसे पहले कुत्ते के काटने का ख्याल आता है. इसकी वजह यह है कि दुनियाभर में इंसानों में होने वाले रेबीज के अधिकांश मामलों के लिए संक्रमित कुत्ते जिम्मेदार होते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि केवल कुत्ते के काटने से ही रेबीज होता है. अगर कोई शेर या बाघ रेबीज वायरस से संक्रमित है और वह इंसान को काटता है, तो उसके काटने से भी रेबीज का खतरा हो सकता है. क्या होता है रेबीज? रेबीज एक अत्यंत घातक वायरल बीमारी है जो संक्रमित जानवरों के काटने या खरोंचने से इंसानों में फैलती है. यह संक्रमित स्तनधारी जानवर की लार के जरिए फैलती है. शुरुआत में मरीज में बुखार, सिरदर्द, कमजोरी और घाव पर खुजली या जलन महसूस होती है. बाद में पानी से डर लगना, बेचैनी और मानसिक संतुलन बिगड़ने जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देने लगते हैं. शेर और बाघ दोनों स्तनधारी हैं, इसलिए इनके संक्रमित होने की स्थिति में इनके काटने से इंसान को संक्रमण हो सकता है. शेर या बाघ के काटने से भी होता है रेबीज सिर्फ शेर या बाघ के काट लेने से रेबीज होना तय नहीं है. संक्रमण का खतरा तब होता है जब काटने वाला जानवर रेबीज वायरस से संक्रमित हो. संक्रमित जानवर की लार काटने के दौरान त्वचा के अंदर बने घाव के संपर्क में आती है. वायरस इसी रास्ते से शरीर में प्रवेश करता है. काटने के अलावा संक्रमित लार का किसी खुले घाव, आंख, नाक या मुंह के संपर्क में आने से भी जोखिम बढ़ता है. अगर शेर या बाघ रेबीज से संक्रमित है तो काफी ज्यादा संभावना है कि उसकी काटने से रेबीज फैल सकता है. इसे भी पढ़ें : Dengue Vaccine: 2027 तक आएगी भारत की पहली डेंगू वैक्सीन, जानें यह कितनी असरदार? किसी भी जानवर के काटने पर यह करें WHO के अनुसार रेबीज घरेलू और जंगली दोनों तरह के स्तनधारी जानवरों को प्रभावित कर सकता है. हालांकि मानव रेबीज के मामलों में संक्रमित कुत्ते सबसे महत्वपूर्ण स्रोत हैं. यानी शेर या बाघ से रेबीज का जोखिम कुत्ते की तुलना में बहुत कम हो सकता है, लेकिन यदि संक्रमित जानवर ने काटा है तो चिकित्सकीय सावधानी जरूरी है. किसी भी जानवर के काट लेने पर सबसे पहले घाव को धोना बेहतर होता है. WHO के अनुसार घाव को साबुन और बहते पानी से लगभग 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए. इसके बाद जल्द से जल्द अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना चाहिए. रेबीज होने का सबसे बड़ा खतरा संक्रमित लार के शरीर में प्रवेश करने से होता है. इसलिए काटने के अलावा संक्रमित जानवर की लार का किसी ताजा घाव या आंख, नाक अथवा मुंह के संपर्क में आना भी खतरनाक होता है. इसे भी पढ़ें : क्या शराब पीने के बाद दवाएं खा सकते हैं, क्या कहते हैं डॉक्टर्स?

Sep 21, 2026 - 09:30
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क्या शेर और बाघ के काटने से भी हो सकता है रेबीज? जानिए क्या है सच

रेबीज का नाम आते ही सबसे पहले कुत्ते के काटने का ख्याल आता है. इसकी वजह यह है कि दुनियाभर में इंसानों में होने वाले रेबीज के अधिकांश मामलों के लिए संक्रमित कुत्ते जिम्मेदार होते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि केवल कुत्ते के काटने से ही रेबीज होता है. अगर कोई शेर या बाघ रेबीज वायरस से संक्रमित है और वह इंसान को काटता है, तो उसके काटने से भी रेबीज का खतरा हो सकता है.

क्या होता है रेबीज?

रेबीज एक अत्यंत घातक वायरल बीमारी है जो संक्रमित जानवरों के काटने या खरोंचने से इंसानों में फैलती है. यह संक्रमित स्तनधारी जानवर की लार के जरिए फैलती है. शुरुआत में मरीज में बुखार, सिरदर्द, कमजोरी और घाव पर खुजली या जलन महसूस होती है. बाद में पानी से डर लगना, बेचैनी और मानसिक संतुलन बिगड़ने जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देने लगते हैं. शेर और बाघ दोनों स्तनधारी हैं, इसलिए इनके संक्रमित होने की स्थिति में इनके काटने से इंसान को संक्रमण हो सकता है.

शेर या बाघ के काटने से भी होता है रेबीज

सिर्फ शेर या बाघ के काट लेने से रेबीज होना तय नहीं है. संक्रमण का खतरा तब होता है जब काटने वाला जानवर रेबीज वायरस से संक्रमित हो. संक्रमित जानवर की लार काटने के दौरान त्वचा के अंदर बने घाव के संपर्क में आती है. वायरस इसी रास्ते से शरीर में प्रवेश करता है. काटने के अलावा संक्रमित लार का किसी खुले घाव, आंख, नाक या मुंह के संपर्क में आने से भी जोखिम बढ़ता है. अगर शेर या बाघ रेबीज से संक्रमित है तो काफी ज्यादा संभावना है कि उसकी काटने से रेबीज फैल सकता है.

इसे भी पढ़ें : Dengue Vaccine: 2027 तक आएगी भारत की पहली डेंगू वैक्सीन, जानें यह कितनी असरदार?

किसी भी जानवर के काटने पर यह करें

WHO के अनुसार रेबीज घरेलू और जंगली दोनों तरह के स्तनधारी जानवरों को प्रभावित कर सकता है. हालांकि मानव रेबीज के मामलों में संक्रमित कुत्ते सबसे महत्वपूर्ण स्रोत हैं. यानी शेर या बाघ से रेबीज का जोखिम कुत्ते की तुलना में बहुत कम हो सकता है, लेकिन यदि संक्रमित जानवर ने काटा है तो चिकित्सकीय सावधानी जरूरी है. किसी भी जानवर के काट लेने पर सबसे पहले घाव को धोना बेहतर होता है. WHO के अनुसार घाव को साबुन और बहते पानी से लगभग 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए. इसके बाद जल्द से जल्द अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना चाहिए. रेबीज होने का सबसे बड़ा खतरा संक्रमित लार के शरीर में प्रवेश करने से होता है. इसलिए काटने के अलावा संक्रमित जानवर की लार का किसी ताजा घाव या आंख, नाक अथवा मुंह के संपर्क में आना भी खतरनाक होता है.

इसे भी पढ़ें : क्या शराब पीने के बाद दवाएं खा सकते हैं, क्या कहते हैं डॉक्टर्स?

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