क्या खत्म हो जाएंगी नौकरियां? जानिए कैसे AI बदल रहा है व्हाइट-कॉलर जॉब मार्केट
दुनियाभर में AI और GenAI का चलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है. तकनीकी बदलावों के बीच रोजगार के बाजार से एक बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक खबर सामने आई है. वर्ल्ड बैंक की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया में जेनरेटिव एआई के कारण व्हाइट-कॉलर पदों, खासकर शुरुआती स्तर की नौकरियों में बड़ी कटौती देखी जा रही है. एक तरफ जहां बाजार में एआई स्किल्स वाले प्रोफेशनल्स की मांग आसमान छू रही है, वहीं दूसरी तरफ कई पारंपरिक शुरुआती नौकरियां धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं. वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा वर्ल्ड बैंक की वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026 में यह साफ तौर पर कहा गया है कि जेनरेटिव एआई के आने से भारत में उन नौकरियों के विज्ञापन काफी कम हो गए हैं जिन्हें आसानी से कंप्यूटर के जरिए ऑटोमेट किया जा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती स्तर पर काम करने वाले जूनियर्स और नए कर्मचारियों पर इसका सबसे बुरा असर पड़ा है. आंकड़ों की बात करें तो नवंबर 2022 में ChatGPT के लॉन्च होने के बाद से पूरे दक्षिण एशिया में कंपनियों द्वारा निकाली जाने वाली नौकरियों में 1.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी. सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टर्स एआई के इस दौर में सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर पड़ा है जो बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों और ग्लोबल सप्लाई चैन से सीधे जुड़ी हुई हैं. रिपोर्ट बताती है कि जिन सेक्टर्स में एआई इंसानों की जगह आसानी से काम कर सकता है, वहां हर महीने निकलने वाली नौकरियों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत तक भारी कमी आई है. विशेष रूप से IT और नॉलेज बेस्ड सर्विसेज में एंट्री लेवल के काम को एआई ने संभालना शुरू कर दिया है. इसके चलते जूनियर्स की कई पुरानी भूमिकाएं पूरी तरह से खत्म होने की कगार पर पहुंच गई हैं. नए तरह के रोजगारों का हो रहा है जन्म वर्ल्ड बैंक की टीम का नेतृत्व करने वाले गौरव नैय्यर के मुताबिक, एआई का यह प्रभाव पूरी तरह से नकारात्मक नहीं है. बाजार में जहां कुछ पुरानी नौकरियां जा रही हैं. वहीं एआई के कारण बिल्कुल नए तरह के सेक्टर्स और काम के मौके भी सामने आ रहे हैं. आजकल कंपनियों में प्रॉम्ट इंजीनियर्स और एआई एथिक्स स्पेशलिस्ट जैसे नए और एडवांस पदों की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है. इसका मतलब है कि बाजार पूरी तरह से बंद नहीं हो रहा है, बल्कि नौकरियों का स्वरूप पूरी तरह से बदल रहा है. यह भी पढ़ें: 20 साल में कितने प्रतिशत बढ़ गई दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों की फीस? देख लें रिपोर्ट कोडिंग अब इकलौता हुनर नहीं रहा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि छात्रों और युवाओं को अब किसी एक छोटे या बहुत ज्यादा स्पेसिफिक काम करने में माहिर होने के बजाय अपने नॉलेज का दायरा बढ़ाना होगा. उदाहरण के लिए, किसी समय कोडिंग को एक बेहद शानदार और अकेले दम पर करियर बनाने वाला हुनर माना जाता था, लेकिन आज के समय एआई ने सबसे पहले कोडिंग को ही अपने नियत्रंण में लिया है और कोडिंग का काम बहुत आसानी से ऑटोमेशन के जरिए हो जाता है. इसलिए सिर्फ कोडिंग सीखने के भरोसे बैठना अब सुरक्षित नहीं रह गया है. बदलाव के लिए STEM शिक्षा है जरूरी इस नए संकट और बदलाव से निकटने के लिए भारतीय IT कंपनियों और बड़े उच्च शिक्षा संस्थानों को अपनी रणनीति बदलनी होगी. विशेषज्ञों का कहना है कि अब छात्रों को व्यापक स्तर पर STEM - साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स की शिक्षा दी जानी चाहिए. युवाओं में वैज्ञानिक क्षमता और इंजीनियरींग के बुनियादी ज्ञान को मजबूत करना होगा ताकि वे बाजार की मांग के हिसाब से खुद को आसानी से बदल सकें. यह भी पढ़ें: AMU और JAMIA में कब निकलेंगे एंट्रेंस फॉर्म? इन तारीखों पर रखें नजर
दुनियाभर में AI और GenAI का चलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है. तकनीकी बदलावों के बीच रोजगार के बाजार से एक बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक खबर सामने आई है. वर्ल्ड बैंक की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया में जेनरेटिव एआई के कारण व्हाइट-कॉलर पदों, खासकर शुरुआती स्तर की नौकरियों में बड़ी कटौती देखी जा रही है. एक तरफ जहां बाजार में एआई स्किल्स वाले प्रोफेशनल्स की मांग आसमान छू रही है, वहीं दूसरी तरफ कई पारंपरिक शुरुआती नौकरियां धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं.
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
वर्ल्ड बैंक की वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026 में यह साफ तौर पर कहा गया है कि जेनरेटिव एआई के आने से भारत में उन नौकरियों के विज्ञापन काफी कम हो गए हैं जिन्हें आसानी से कंप्यूटर के जरिए ऑटोमेट किया जा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती स्तर पर काम करने वाले जूनियर्स और नए कर्मचारियों पर इसका सबसे बुरा असर पड़ा है. आंकड़ों की बात करें तो नवंबर 2022 में ChatGPT के लॉन्च होने के बाद से पूरे दक्षिण एशिया में कंपनियों द्वारा निकाली जाने वाली नौकरियों में 1.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी.
सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टर्स
एआई के इस दौर में सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर पड़ा है जो बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों और ग्लोबल सप्लाई चैन से सीधे जुड़ी हुई हैं. रिपोर्ट बताती है कि जिन सेक्टर्स में एआई इंसानों की जगह आसानी से काम कर सकता है, वहां हर महीने निकलने वाली नौकरियों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत तक भारी कमी आई है. विशेष रूप से IT और नॉलेज बेस्ड सर्विसेज में एंट्री लेवल के काम को एआई ने संभालना शुरू कर दिया है. इसके चलते जूनियर्स की कई पुरानी भूमिकाएं पूरी तरह से खत्म होने की कगार पर पहुंच गई हैं.
नए तरह के रोजगारों का हो रहा है जन्म
वर्ल्ड बैंक की टीम का नेतृत्व करने वाले गौरव नैय्यर के मुताबिक, एआई का यह प्रभाव पूरी तरह से नकारात्मक नहीं है. बाजार में जहां कुछ पुरानी नौकरियां जा रही हैं. वहीं एआई के कारण बिल्कुल नए तरह के सेक्टर्स और काम के मौके भी सामने आ रहे हैं. आजकल कंपनियों में प्रॉम्ट इंजीनियर्स और एआई एथिक्स स्पेशलिस्ट जैसे नए और एडवांस पदों की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है. इसका मतलब है कि बाजार पूरी तरह से बंद नहीं हो रहा है, बल्कि नौकरियों का स्वरूप पूरी तरह से बदल रहा है.
यह भी पढ़ें: 20 साल में कितने प्रतिशत बढ़ गई दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों की फीस? देख लें रिपोर्ट
कोडिंग अब इकलौता हुनर नहीं रहा
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि छात्रों और युवाओं को अब किसी एक छोटे या बहुत ज्यादा स्पेसिफिक काम करने में माहिर होने के बजाय अपने नॉलेज का दायरा बढ़ाना होगा. उदाहरण के लिए, किसी समय कोडिंग को एक बेहद शानदार और अकेले दम पर करियर बनाने वाला हुनर माना जाता था, लेकिन आज के समय एआई ने सबसे पहले कोडिंग को ही अपने नियत्रंण में लिया है और कोडिंग का काम बहुत आसानी से ऑटोमेशन के जरिए हो जाता है. इसलिए सिर्फ कोडिंग सीखने के भरोसे बैठना अब सुरक्षित नहीं रह गया है.
बदलाव के लिए STEM शिक्षा है जरूरी
इस नए संकट और बदलाव से निकटने के लिए भारतीय IT कंपनियों और बड़े उच्च शिक्षा संस्थानों को अपनी रणनीति बदलनी होगी. विशेषज्ञों का कहना है कि अब छात्रों को व्यापक स्तर पर STEM - साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स की शिक्षा दी जानी चाहिए. युवाओं में वैज्ञानिक क्षमता और इंजीनियरींग के बुनियादी ज्ञान को मजबूत करना होगा ताकि वे बाजार की मांग के हिसाब से खुद को आसानी से बदल सकें.
यह भी पढ़ें: AMU और JAMIA में कब निकलेंगे एंट्रेंस फॉर्म? इन तारीखों पर रखें नजर
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