क्या NET के पेपर बनाने में हुआ AI का इस्तेमाल, किन गड़बड़ियों के कारण उठे सवाल?
UGC NET Controversy: यूजीसी नेट की तीन परीक्षाओं को दोबारा कराने के फैसले के बाद एनटीए की परीक्षा प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े हो गए हैं. सब्जेक्ट एक्सपर्ट और एनटीए से जुड़े कई पूर्व विशेषज्ञों ने दावा किया है कि प्रश्न पत्र तैयार करने और उनके अनुवाद में एआई का इस्तेमाल किया गया था. हालांकि, एनटीए इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विवादित प्रश्न पत्र तैयार करने के लिए जेनरेटिव एआई का इस्तेमाल नहीं किया गया. विवादों के बीच अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के यूजीसी नेट पेपर दोबारा कराने का फैसला लिया गया है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, इन प्रश्नपत्रों में ऐसी गलतियां सामने आई है, जिससे पेपर तैयार करने के बाद की गई मानवीय जांच और निगरानी पर भी सवाल उठे. क्या प्रश्न पत्र तैयार करने में एआई का हुआ इस्तेमाल? एनटीए पेपर को लेकर एक सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स ने दावा किया है कि यूजीसी नेट के प्रश्न पत्र तैयार करने में एआई का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया था. एनटीए से जुड़े रहे कुछ पूर्व सब्जेक्ट एक्सपर्ट ने भी यह कहा कि परीक्षा सामग्री के अनुवाद में तकनीक का इस्तेमाल किया गया था. हालांकि सिर्फ तकनीक के इस्तेमाल से यह साबित नहीं होता कि प्रश्न पत्रों में हुई गलतियों की वजह एआई ही था. विवाद का मुख्य सवाल यह है कि प्रश्न पत्र तैयार होने के बाद उनकी पर्याप्त मानवीय और सब्जेक्ट एक्सपर्ट से जांच कराई गई थी या नहीं. एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने एआई के जरिए विवादित प्रश्न पत्र तैयार किए जाने से इनकार किया है. उनके अनुसार प्रश्न पत्र तैयार होने के बाद उनका ह्यूमन रिव्यू किया गया था. इसके बावजूद कई गलतियां सामने आने से इस समीक्षा प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं. ये भी पढ़ें-UPSSSC VDO में 1468 कैंडिडेट सेलेक्ट, कब शुरू होगी ड्यूटी और कितनी मिलेगी सैलरी? 6 हफ्ते तक क्यों नहीं रद्द हुए पेपर? विवाद सिर्फ प्रश्न पत्रों से मिली गड़बड़ियों तक सीमित नहीं है. परीक्षा में खामियां सामने आने के बाद कार्रवाई में हुई देरी को लेकर भी सवाल उठे. रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और एनटीए से जुड़े सूत्रों के बीच पेपर रद्द कर जुलाई के अंत या अगस्त के पहले सप्ताह तक दोबारा परीक्षा कराने को लेकर चर्चा हुई थी और लेकिन एनटीए ने तत्काल परीक्षा रद्द नहीं की. करीब 6 सप्ताह के बाद 87 में से 84 विषयों की प्रोविजनल आंसर की जारी करते समय तीन विषयों की परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की घोषणा की गई. एनटीए की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल शिक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एनटीए के दो वरिष्ठ अधिकारियों से हुई बातचीत में प्रश्न पत्र को तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता नहीं मिल पाई थी. सूत्रों ने दावा किया है कि प्रश्नपत्रों में एडहॉक तरीके से तैयार किए जाने के बाद कही गई थी और इसी वजह से आंसर की तैयार करने में भी परेशानी आई. कुछ और रिपोर्ट्स में सामने आया कि अगर प्रश्न पत्र तैयार करने के लिए चार-पांच विषय एक्सपर्ट्स का पैनल मौजूद था तो पुराने प्रश्न पत्रों के इतने सवाल दोबारा कैसे आ गए और प्रश्न तैयार करने वाले एक्सपर्ट के पास ही उन सवालों के उत्तर क्यों स्पष्ट नहीं थे. वहीं एक्सपर्ट्स के अनुसार पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही नहीं है कि परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी का इस्तेमाल हुआ है या नहीं. बल्कि यह है कि तकनीक के इस्तेमाल के बाद पर्याप्त मानवीय और अकादमिक जांच हुई या नहीं. ये भी पढ़ें-UPPSC ने जारी किया नोटिफिकेशन, प्रोफेसर-असिस्टेंट प्रोफेसर के 1156 पदों पर भर्ती
UGC NET Controversy: यूजीसी नेट की तीन परीक्षाओं को दोबारा कराने के फैसले के बाद एनटीए की परीक्षा प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े हो गए हैं. सब्जेक्ट एक्सपर्ट और एनटीए से जुड़े कई पूर्व विशेषज्ञों ने दावा किया है कि प्रश्न पत्र तैयार करने और उनके अनुवाद में एआई का इस्तेमाल किया गया था. हालांकि, एनटीए इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विवादित प्रश्न पत्र तैयार करने के लिए जेनरेटिव एआई का इस्तेमाल नहीं किया गया.
विवादों के बीच अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के यूजीसी नेट पेपर दोबारा कराने का फैसला लिया गया है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, इन प्रश्नपत्रों में ऐसी गलतियां सामने आई है, जिससे पेपर तैयार करने के बाद की गई मानवीय जांच और निगरानी पर भी सवाल उठे.
क्या प्रश्न पत्र तैयार करने में एआई का हुआ इस्तेमाल?
एनटीए पेपर को लेकर एक सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स ने दावा किया है कि यूजीसी नेट के प्रश्न पत्र तैयार करने में एआई का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया था. एनटीए से जुड़े रहे कुछ पूर्व सब्जेक्ट एक्सपर्ट ने भी यह कहा कि परीक्षा सामग्री के अनुवाद में तकनीक का इस्तेमाल किया गया था. हालांकि सिर्फ तकनीक के इस्तेमाल से यह साबित नहीं होता कि प्रश्न पत्रों में हुई गलतियों की वजह एआई ही था. विवाद का मुख्य सवाल यह है कि प्रश्न पत्र तैयार होने के बाद उनकी पर्याप्त मानवीय और सब्जेक्ट एक्सपर्ट से जांच कराई गई थी या नहीं. एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने एआई के जरिए विवादित प्रश्न पत्र तैयार किए जाने से इनकार किया है. उनके अनुसार प्रश्न पत्र तैयार होने के बाद उनका ह्यूमन रिव्यू किया गया था. इसके बावजूद कई गलतियां सामने आने से इस समीक्षा प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं.
ये भी पढ़ें-UPSSSC VDO में 1468 कैंडिडेट सेलेक्ट, कब शुरू होगी ड्यूटी और कितनी मिलेगी सैलरी?
6 हफ्ते तक क्यों नहीं रद्द हुए पेपर?
विवाद सिर्फ प्रश्न पत्रों से मिली गड़बड़ियों तक सीमित नहीं है. परीक्षा में खामियां सामने आने के बाद कार्रवाई में हुई देरी को लेकर भी सवाल उठे. रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और एनटीए से जुड़े सूत्रों के बीच पेपर रद्द कर जुलाई के अंत या अगस्त के पहले सप्ताह तक दोबारा परीक्षा कराने को लेकर चर्चा हुई थी और लेकिन एनटीए ने तत्काल परीक्षा रद्द नहीं की. करीब 6 सप्ताह के बाद 87 में से 84 विषयों की प्रोविजनल आंसर की जारी करते समय तीन विषयों की परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की घोषणा की गई.
एनटीए की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल
शिक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एनटीए के दो वरिष्ठ अधिकारियों से हुई बातचीत में प्रश्न पत्र को तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता नहीं मिल पाई थी. सूत्रों ने दावा किया है कि प्रश्नपत्रों में एडहॉक तरीके से तैयार किए जाने के बाद कही गई थी और इसी वजह से आंसर की तैयार करने में भी परेशानी आई. कुछ और रिपोर्ट्स में सामने आया कि अगर प्रश्न पत्र तैयार करने के लिए चार-पांच विषय एक्सपर्ट्स का पैनल मौजूद था तो पुराने प्रश्न पत्रों के इतने सवाल दोबारा कैसे आ गए और प्रश्न तैयार करने वाले एक्सपर्ट के पास ही उन सवालों के उत्तर क्यों स्पष्ट नहीं थे. वहीं एक्सपर्ट्स के अनुसार पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही नहीं है कि परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी का इस्तेमाल हुआ है या नहीं. बल्कि यह है कि तकनीक के इस्तेमाल के बाद पर्याप्त मानवीय और अकादमिक जांच हुई या नहीं.
ये भी पढ़ें-UPPSC ने जारी किया नोटिफिकेशन, प्रोफेसर-असिस्टेंट प्रोफेसर के 1156 पदों पर भर्ती
What's Your Reaction?