कर्नाटक में SIR ड्यूटी का असर, बिना पढ़ाई छात्रों ने दी मिड टर्म परीक्षा 

कर्नाटक के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को इस बार SA-1 यानी मिड टर्म परीक्षा के दौरान अलग तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा. कई स्कूलों में पिछले करीब 3 महीने से नियमित कक्षाएं नहीं हो सकी, क्योंकि टीचर्स स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की ड्यूटी में लगाए गए थे. ऐसे में जब मिड टर्म परीक्षाएं हुई तो कई छात्रों के सामने ऐसी स्थिति थी कि जिस सिलेबस से सवाल पूछा जा रहे हैं, उसका बड़ा हिस्सा उन्हें पढ़ाया ही नहीं गया था. कर्नाटक में SA-1 मिड टर्म परीक्षाएं 30 सितंबर को खत्म हुई, अब स्कूल 3 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक दशहरा की छुट्टियों के लिए बंद रहेंगे.  वहीं शिक्षकों की गैर मौजूदगी का असर परीक्षा में सीधे दिखाई दिया है. छात्रों का कहना है कि अंग्रेजी और गणित जैसे विषयों के पेपर में वह कई सवालों को समझ तक नहीं पाए, क्योंकि इन विषयों की नियमित कक्षाएं नहीं हुई थी. एक छात्र ने बताया कि अंग्रेजी और गणित की परीक्षा के दौरान वह काफी सवालों के जवाब नहीं दे सका,  क्योंकि उसकी स्कूल में पढ़ाई ही नहीं हुई थी. वहीं दूसरे छात्र ने बताया कि वह केवल उन्हीं सवालों को हल कर पाया है, जो पिछले साल के सिलेबस से जुड़े थे. बाकी सवालों को उसने छोड़ दिया, क्योंकि संबंधित पाठ अभी तक पढ़ाए ही नहीं गए थे.  स्कूल जाना सिर्फ हाजिरी तक सीमित  एक सरकारी सहायता प्राप्त हाई स्कूल की छात्र ने बताया कि पिछले तीन महीने से छात्र स्कूल तो जा रहे थे, लेकिन वहां पढ़ाने के लिए शिक्षक उपलब्ध नहीं थे. ऐसे में उसने यूट्यूब पर टीचर्स की ऑनलाइन क्लासेज के जरिए अपनी पढ़ाई जारी रखने की कोशिश की. स्टूडेंट के अनुसार ऑनलाइन वीडियो से उन्हें परीक्षा की तैयारी में कुछ मदद मिली, लेकिन नियमित कक्षा का ऑप्शन नहीं बन सका.  टीचर्स ने भी बताई अपनी परेशानी  दूसरी और SIR ड्यूटी में लगाए गए टीचर्स का कहना है कि कम से कम हाई स्कूल के शिक्षकों को इस काम से अलग रखा जाना चाहिए था. क्योंकि कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए यह साल जरूरी है. बेंगलुरु में SIR ड्यूटी में लगी एक टीचर बताती हैं कि SA-1 का टाइम टेबल आने के बाद उनके कुछ छात्रों ने उनसे स्कूल वापस आकर पढ़ाने की गुजारिश भी की थी, लेकिन ड्यूटी की वजह से वह ऐसा नहीं कर सकी.  ये भी पढ़ें-दुनिया के टॉप 5 बड़े एग्जाम में नीट यूजी, जानें किस परीक्षा में कितने छात्र कुछ छात्रों ने परीक्षा ही नहीं दी  पढ़ाई नहीं होने का असर इतना रहा कि कुछ छात्रों ने SA-1 परीक्षा में शामिल नहीं होने का फैसला किया. कुछ पेरेंट्स के अनुसार उनके बच्चे स्कूल में कक्षा नहीं होने के कारण परीक्षा देने नहीं गए. वहीं अब परिवारों को बच्चों की पढ़ाई के लिए छुट्टियों में प्राइवेट ट्यूशन का सहारा लेना पड़ रहा है. पेरेंट्स का कहना है कि ट्यूशन फीस देना आसान नहीं है, लेकिन बच्चों की आगे की पढ़ाई को देखते हुए उनके पास दूसरा ऑप्शन मौजूद नहीं है.  दिसंबर में दोबारा परीक्षा कराने की मांग  छात्रों ने अब मांग की है कि जब शिक्षक एसआईआर ड्यूटी से वापस को लौटे, तो दिसंबर में एक बार फिर असेसमेंट कराया जाए. उनका कहना है कि उस परीक्षा के अंकों को भी रिजल्ट में ध्यान में रखा जाना चाहिए. हालांकि कुछ स्कूलों ने पढ़ाई का नुकसान कम करने के लिए गेस्ट टीचर की मदद ली. इससे छात्रों को दोबारा नियमित पढ़ाई शुरू कराने की कोशिश की जा रही है. ये भी पढ़ें-दिवाली से पहले UP के शिक्षकों की बल्ले-बल्ले, 70 हजार से ज्यादा का होगा प्रमोशन

Oct 3, 2026 - 18:30
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कर्नाटक में SIR ड्यूटी का असर, बिना पढ़ाई छात्रों ने दी मिड टर्म परीक्षा 

कर्नाटक के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को इस बार SA-1 यानी मिड टर्म परीक्षा के दौरान अलग तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा. कई स्कूलों में पिछले करीब 3 महीने से नियमित कक्षाएं नहीं हो सकी, क्योंकि टीचर्स स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की ड्यूटी में लगाए गए थे. ऐसे में जब मिड टर्म परीक्षाएं हुई तो कई छात्रों के सामने ऐसी स्थिति थी कि जिस सिलेबस से सवाल पूछा जा रहे हैं, उसका बड़ा हिस्सा उन्हें पढ़ाया ही नहीं गया था. कर्नाटक में SA-1 मिड टर्म परीक्षाएं 30 सितंबर को खत्म हुई, अब स्कूल 3 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक दशहरा की छुट्टियों के लिए बंद रहेंगे. 

वहीं शिक्षकों की गैर मौजूदगी का असर परीक्षा में सीधे दिखाई दिया है. छात्रों का कहना है कि अंग्रेजी और गणित जैसे विषयों के पेपर में वह कई सवालों को समझ तक नहीं पाए, क्योंकि इन विषयों की नियमित कक्षाएं नहीं हुई थी. एक छात्र ने बताया कि अंग्रेजी और गणित की परीक्षा के दौरान वह काफी सवालों के जवाब नहीं दे सका,  क्योंकि उसकी स्कूल में पढ़ाई ही नहीं हुई थी. वहीं दूसरे छात्र ने बताया कि वह केवल उन्हीं सवालों को हल कर पाया है, जो पिछले साल के सिलेबस से जुड़े थे. बाकी सवालों को उसने छोड़ दिया, क्योंकि संबंधित पाठ अभी तक पढ़ाए ही नहीं गए थे. 

स्कूल जाना सिर्फ हाजिरी तक सीमित 

एक सरकारी सहायता प्राप्त हाई स्कूल की छात्र ने बताया कि पिछले तीन महीने से छात्र स्कूल तो जा रहे थे, लेकिन वहां पढ़ाने के लिए शिक्षक उपलब्ध नहीं थे. ऐसे में उसने यूट्यूब पर टीचर्स की ऑनलाइन क्लासेज के जरिए अपनी पढ़ाई जारी रखने की कोशिश की. स्टूडेंट के अनुसार ऑनलाइन वीडियो से उन्हें परीक्षा की तैयारी में कुछ मदद मिली, लेकिन नियमित कक्षा का ऑप्शन नहीं बन सका. 

टीचर्स ने भी बताई अपनी परेशानी 

दूसरी और SIR ड्यूटी में लगाए गए टीचर्स का कहना है कि कम से कम हाई स्कूल के शिक्षकों को इस काम से अलग रखा जाना चाहिए था. क्योंकि कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए यह साल जरूरी है. बेंगलुरु में SIR ड्यूटी में लगी एक टीचर बताती हैं कि SA-1 का टाइम टेबल आने के बाद उनके कुछ छात्रों ने उनसे स्कूल वापस आकर पढ़ाने की गुजारिश भी की थी, लेकिन ड्यूटी की वजह से वह ऐसा नहीं कर सकी. 

ये भी पढ़ें-दुनिया के टॉप 5 बड़े एग्जाम में नीट यूजी, जानें किस परीक्षा में कितने छात्र

कुछ छात्रों ने परीक्षा ही नहीं दी 

पढ़ाई नहीं होने का असर इतना रहा कि कुछ छात्रों ने SA-1 परीक्षा में शामिल नहीं होने का फैसला किया. कुछ पेरेंट्स के अनुसार उनके बच्चे स्कूल में कक्षा नहीं होने के कारण परीक्षा देने नहीं गए. वहीं अब परिवारों को बच्चों की पढ़ाई के लिए छुट्टियों में प्राइवेट ट्यूशन का सहारा लेना पड़ रहा है. पेरेंट्स का कहना है कि ट्यूशन फीस देना आसान नहीं है, लेकिन बच्चों की आगे की पढ़ाई को देखते हुए उनके पास दूसरा ऑप्शन मौजूद नहीं है. 

दिसंबर में दोबारा परीक्षा कराने की मांग 

छात्रों ने अब मांग की है कि जब शिक्षक एसआईआर ड्यूटी से वापस को लौटे, तो दिसंबर में एक बार फिर असेसमेंट कराया जाए. उनका कहना है कि उस परीक्षा के अंकों को भी रिजल्ट में ध्यान में रखा जाना चाहिए. हालांकि कुछ स्कूलों ने पढ़ाई का नुकसान कम करने के लिए गेस्ट टीचर की मदद ली. इससे छात्रों को दोबारा नियमित पढ़ाई शुरू कराने की कोशिश की जा रही है.

ये भी पढ़ें-दिवाली से पहले UP के शिक्षकों की बल्ले-बल्ले, 70 हजार से ज्यादा का होगा प्रमोशन

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