'ऐसा क्यों नहीं हुआ', CJP प्रदर्शन का जिक्र कर सरकार पर क्यों भड़के सोनम वांगचुक
लद्दाख में 24 सितंबर 2025 को हुई हिंसा और पुलिस फायरिंग की पहली बरसी पर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कई सवाल उठाए हैं. उन्होंने मीडिया कवरेज, हिंसा की न्यायिक जांच, पीड़ितों के मुआवजे और खुद पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा. 24 सितंबर को लद्दाख के कई हिस्सों में बंद रहा और इस दिन को कुछ लोगों ने 'शहीद दिवस' के तौर पर मनाया. पिछले साल हुई हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी. 'क्या मीडिया को ब्लैकआउट किया जाता है ऐसी खबर दिखाने के लिए?' वांगचुक ने कहा कि 27 सितंबर को पिछले साल वह जोधपुर की जेल में थे. उन्होंने बताया कि इसी दौरान उन्हें पता चला था कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया है. उन्होंने 24 सितंबर को लद्दाख में मनाए गए शहीद दिवस का जिक्र करते हुए मीडिया कवरेज पर भी सवाल उठाया. उनका कहना है कि जब लद्दाख में शहीद दिवस मनाया जा रहा था, तब मीडिया ब्लैकआउट जैसा माहौल रहा. उन्होंने कहा कि 24 सितंबर को पीटीआई, एएनआई या दूसरे मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधि वहां नहीं पहुंचे. वांगचुक ने सवाल किया कि क्या मीडिया को किसी खबर को दिखाने से रोका जाता है? उन्होंने मीडिया संस्थानों के प्रमुखों से पूछा कि लद्दाख के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है. तिब्बत से तुलना पर बोले- किसी की भावना ठेस पहुंचाना मकसद नहीं था वांगचुक ने कहा कि उन्होंने लद्दाख की तुलना तिब्बत से की थी, जिससे कुछ लोगों को दुख हुआ. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था. उनका कहना था कि वह सिर्फ 24 सितंबर को हुई मारकाट और उस घटना को लेकर बात कर रहे थे. उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या देश में मीडिया पर इतना नियंत्रण है कि यह तय किया जाए कि कौन-सा बयान रोकना है और कौन-सा बयान चलाना है. यह भी पढ़िएः बंगाल पुलिस में उपचुनाव से पहले बड़ा फेरबदल, 23 वरिष्ठ अधिकारियों का ट्रांसफर
लद्दाख में 24 सितंबर 2025 को हुई हिंसा और पुलिस फायरिंग की पहली बरसी पर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कई सवाल उठाए हैं. उन्होंने मीडिया कवरेज, हिंसा की न्यायिक जांच, पीड़ितों के मुआवजे और खुद पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा. 24 सितंबर को लद्दाख के कई हिस्सों में बंद रहा और इस दिन को कुछ लोगों ने 'शहीद दिवस' के तौर पर मनाया. पिछले साल हुई हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी.
'क्या मीडिया को ब्लैकआउट किया जाता है ऐसी खबर दिखाने के लिए?'
वांगचुक ने कहा कि 27 सितंबर को पिछले साल वह जोधपुर की जेल में थे. उन्होंने बताया कि इसी दौरान उन्हें पता चला था कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया है. उन्होंने 24 सितंबर को लद्दाख में मनाए गए शहीद दिवस का जिक्र करते हुए मीडिया कवरेज पर भी सवाल उठाया. उनका कहना है कि जब लद्दाख में शहीद दिवस मनाया जा रहा था, तब मीडिया ब्लैकआउट जैसा माहौल रहा. उन्होंने कहा कि 24 सितंबर को पीटीआई, एएनआई या दूसरे मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधि वहां नहीं पहुंचे. वांगचुक ने सवाल किया कि क्या मीडिया को किसी खबर को दिखाने से रोका जाता है? उन्होंने मीडिया संस्थानों के प्रमुखों से पूछा कि लद्दाख के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है.
तिब्बत से तुलना पर बोले- किसी की भावना ठेस पहुंचाना मकसद नहीं था
वांगचुक ने कहा कि उन्होंने लद्दाख की तुलना तिब्बत से की थी, जिससे कुछ लोगों को दुख हुआ. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था. उनका कहना था कि वह सिर्फ 24 सितंबर को हुई मारकाट और उस घटना को लेकर बात कर रहे थे. उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या देश में मीडिया पर इतना नियंत्रण है कि यह तय किया जाए कि कौन-सा बयान रोकना है और कौन-सा बयान चलाना है.
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