ईरान वॉर: डबल डिजिट में कमाई पर लगा 'ग्रहण', कैसे $110 का कच्चा तेल चकनाचूर करेगा आपका ख्वाब?
Iran-Israel War: कच्चे तेल की कीमत का 110 डॉलर प्रति बैरल के पार जाना और ईरान में बढ़ता तनाव भारतीय इकोनॉमी के साथ-साथ India Inc. के लिए भी किसी अलर्ट से कम नहीं है. इससे कारोबारी साल 2026-27 के लिए कॉर्पोरेट कमाई में डबल-डिजिट (Double digit) ग्रोथ का सपना सिंगल डिजिट में सिमट सकता है. FY26 की चौथी तिमाही के लिए कंपनियों ने अपने नतीजे का ऐलान करना शुरू कर दिया है. कमाई में जबरदस्त कटौती की आशंका IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) भी 9 अप्रैल को अपने नतीजे घोषित करेगी. जिस तिमाही से India Inc. की रिकवरी की राह पक्की होने की उम्मीद थी, उसी दौरान सभी सेक्टरों में मुनाफे की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है. Geojit Investments Limited के चीफ़ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट डॉ. V K Vijayakumar चेतावनी देते हुए कहते हैं, "अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और गैस की उपलब्धता पर पाबंदियां जारी रहती हैं, तो कमाई में कटौती का एक और दौर आना तय है." "कमाई में कटौती उन सेक्टरों में होगी, जो ज्यादा आयात पर निर्भर हैं और कच्चे तेल से जुड़े हैं." क्या है India Inc.? India Inc. देश के कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला टर्म है. इसमें सरकारी के साथ रिलायंस, अडानी और टाटा जैसे बड़े बिजनेस घरानों के अलावा शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियां भी आती है. इनका देश की नॉमिनल जीडीपी में लगभग 60 परसेंट का योगदान होता है. इसमें मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग, बिजनेस सर्विसेज और कंस्ट्रक्शन से जुड़े सेक्टर्स आते हैं. India Inc. के लिए खतरे की घंटी कच्चे तेल की कीमत बढ़ेगी, तो इसका पेंट, लुब्रिकेंट्स, प्लास्टिक और केमिकल इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ेगा. क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ने से इन पर बेस्ड इन प्रोडक्ट्स के प्रोडक्शन का कॉस्ट बढ़ेगा. इससे कंपनियों का ऑपरेटिंग मार्जिन घटेगा क्योंकि बढ़े हुए इनपुट कॉस्ट का बोझ तुरंत ग्राहकों पर नहीं डाला जाता है. तेल महंगा होगा, तो ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स पर खर्च बढ़ेगा. इससे चौतरफा महंगाई बढ़ेगी. महंगाई बढ़ेगी, तो लोगों के खर्च करने की क्षमता कम हो जाएगी. इससे FMCG और ऑटो जैसे सेक्टरों में डिमांड कम होगी. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक 110 डॉलर पर बनी रहती है, तो इससे भारत की GDP 6 परसेंट के नीचे गिर सकती है, जिसके पहले 7 परसेंट के ऊपर बने रहने का अनुमान लगाया गया था. जंग ज्यादा लंबे समय तक खींचने पर Nifty-50 में शामिल कंपनियों की कमाई 4 परसेंट तक गिर सकती है. किन सेक्टर्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर? कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर उन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा पड़ेगा, जो मूल रूप से एनर्जी-बेस्ड हैं. विजयकुमार बताते हैं, "पेंट्स, एडहेसिव और टायर्स जैसे पेट्रोलियम इनपुट का इस्तेमाल करने वाले उद्योगों पर इसका असर पड़ेगा. विट्रिफाइड टाइल्स जैसे उत्पादों के निर्माण में LNG को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करने वाले निर्माताओं को तो भारी नुकसान हुआ है." वह आगे कहते हैं कि इस असर की सबसे ज्यादा तीव्रता Q4 के बजाय FY27 की पहली तिमाही (Q1) में महसूस की जाएगी. Swastika Investmart में रिसर्च हेड संतोष मीना कहते हैं, ''सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टर वे हैं जिनमें ऊर्जा की खपत ज़्यादा होती है—जैसे कि फर्टिलाइजर, केमिकल, सिरेमिक, पेंट, कांच और टायर, जिन्हें LPG/LNG की भारी कमी, प्लांट बंद होने और इनपुट लागत में अचानक हुई बढ़ोतरी के कारण मार्जिन पर भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है. ऑटो और एविएशन सेक्टर भी इसी तरह उत्पादन में रुकावटों और ईंधन की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं, जिससे सीधे तौर पर मुनाफा कम हो रहा है और ग्राहकों की मांग घट रही है. IT सेवाओं के लिए उम्मीद है कि वित्त वर्ष का अंत धीमा रहेगा, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता के कारण ऑडर्स के पूरे होने में देरी हो रही है. इनके अलावा, तेल विपणन कंपनियां, लॉजिस्टिक्स और रत्न व आभूषण जैसे निर्यात-प्रधान सेक्टर भी व्यापक मंदी का सामना कर रहे हैं. इसके विपरीत, अपस्ट्रीम और रक्षा क्षेत्र अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं. ये भी पढ़ें: पहले तेल और अब पानी... क्यों ईरान में जंग के बीच भारत में बढ़ी Bisleri की कीमत?
Iran-Israel War: कच्चे तेल की कीमत का 110 डॉलर प्रति बैरल के पार जाना और ईरान में बढ़ता तनाव भारतीय इकोनॉमी के साथ-साथ India Inc. के लिए भी किसी अलर्ट से कम नहीं है. इससे कारोबारी साल 2026-27 के लिए कॉर्पोरेट कमाई में डबल-डिजिट (Double digit) ग्रोथ का सपना सिंगल डिजिट में सिमट सकता है. FY26 की चौथी तिमाही के लिए कंपनियों ने अपने नतीजे का ऐलान करना शुरू कर दिया है.
कमाई में जबरदस्त कटौती की आशंका
IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) भी 9 अप्रैल को अपने नतीजे घोषित करेगी. जिस तिमाही से India Inc. की रिकवरी की राह पक्की होने की उम्मीद थी, उसी दौरान सभी सेक्टरों में मुनाफे की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है.
Geojit Investments Limited के चीफ़ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट डॉ. V K Vijayakumar चेतावनी देते हुए कहते हैं, "अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और गैस की उपलब्धता पर पाबंदियां जारी रहती हैं, तो कमाई में कटौती का एक और दौर आना तय है." "कमाई में कटौती उन सेक्टरों में होगी, जो ज्यादा आयात पर निर्भर हैं और कच्चे तेल से जुड़े हैं."
क्या है India Inc.?
India Inc. देश के कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला टर्म है. इसमें सरकारी के साथ रिलायंस, अडानी और टाटा जैसे बड़े बिजनेस घरानों के अलावा शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियां भी आती है. इनका देश की नॉमिनल जीडीपी में लगभग 60 परसेंट का योगदान होता है. इसमें मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग, बिजनेस सर्विसेज और कंस्ट्रक्शन से जुड़े सेक्टर्स आते हैं.
India Inc. के लिए खतरे की घंटी
- कच्चे तेल की कीमत बढ़ेगी, तो इसका पेंट, लुब्रिकेंट्स, प्लास्टिक और केमिकल इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ेगा. क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ने से इन पर बेस्ड इन प्रोडक्ट्स के प्रोडक्शन का कॉस्ट बढ़ेगा. इससे कंपनियों का ऑपरेटिंग मार्जिन घटेगा क्योंकि बढ़े हुए इनपुट कॉस्ट का बोझ तुरंत ग्राहकों पर नहीं डाला जाता है.
- तेल महंगा होगा, तो ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स पर खर्च बढ़ेगा. इससे चौतरफा महंगाई बढ़ेगी. महंगाई बढ़ेगी, तो लोगों के खर्च करने की क्षमता कम हो जाएगी. इससे FMCG और ऑटो जैसे सेक्टरों में डिमांड कम होगी.
- एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक 110 डॉलर पर बनी रहती है, तो इससे भारत की GDP 6 परसेंट के नीचे गिर सकती है, जिसके पहले 7 परसेंट के ऊपर बने रहने का अनुमान लगाया गया था.
- जंग ज्यादा लंबे समय तक खींचने पर Nifty-50 में शामिल कंपनियों की कमाई 4 परसेंट तक गिर सकती है.
किन सेक्टर्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर उन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा पड़ेगा, जो मूल रूप से एनर्जी-बेस्ड हैं. विजयकुमार बताते हैं, "पेंट्स, एडहेसिव और टायर्स जैसे पेट्रोलियम इनपुट का इस्तेमाल करने वाले उद्योगों पर इसका असर पड़ेगा. विट्रिफाइड टाइल्स जैसे उत्पादों के निर्माण में LNG को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करने वाले निर्माताओं को तो भारी नुकसान हुआ है."
वह आगे कहते हैं कि इस असर की सबसे ज्यादा तीव्रता Q4 के बजाय FY27 की पहली तिमाही (Q1) में महसूस की जाएगी. Swastika Investmart में रिसर्च हेड संतोष मीना कहते हैं, ''सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टर वे हैं जिनमें ऊर्जा की खपत ज़्यादा होती है—जैसे कि फर्टिलाइजर, केमिकल, सिरेमिक, पेंट, कांच और टायर, जिन्हें LPG/LNG की भारी कमी, प्लांट बंद होने और इनपुट लागत में अचानक हुई बढ़ोतरी के कारण मार्जिन पर भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है. ऑटो और एविएशन सेक्टर भी इसी तरह उत्पादन में रुकावटों और ईंधन की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं, जिससे सीधे तौर पर मुनाफा कम हो रहा है और ग्राहकों की मांग घट रही है.
IT सेवाओं के लिए उम्मीद है कि वित्त वर्ष का अंत धीमा रहेगा, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता के कारण ऑडर्स के पूरे होने में देरी हो रही है. इनके अलावा, तेल विपणन कंपनियां, लॉजिस्टिक्स और रत्न व आभूषण जैसे निर्यात-प्रधान सेक्टर भी व्यापक मंदी का सामना कर रहे हैं. इसके विपरीत, अपस्ट्रीम और रक्षा क्षेत्र अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं.
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