इंडिया ईयू एफटीए पर उद्योग ने कहा- यूरोप के उच्च क्षमता वाले बाजार में व्यापार, निवेश के खोलेगा रास्ते

India EU Free Trade Agreement: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को उद्योग जगत ने भारत के लिए एक ऐतिहासिक और दूरगामी कदम बताया है. यह समझौता 27 देशों वाले यूरोपीय संघ जैसे बड़े और समृद्ध बाजार में भारत के लिए नए व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के अवसर खोलेगा. उद्योग संगठनों का मानना है कि इससे न केवल भारत के निर्यात को मजबूती मिलेगी, बल्कि भारतीय कंपनियों की वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भागीदारी भी बढ़ेगी. भारत और ईयू ने मंगलवार को इस एफटीए पर बातचीत के समापन की घोषणा की, जिसे वैश्विक व्यापार परिदृश्य में भारत की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. एफटीए साबित होगा गेमचेंजर सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने इसे भारत के वैश्विक व्यापार के लिए “गेम चेंजर” करार देते हुए कहा कि यह समझौता दो बड़े लोकतंत्रों और अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझेदारी को और मजबूत करता है, जो मिलकर वैश्विक जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत योगदान देते हैं. उन्होंने कहा कि भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात को यूरोपीय संघ में प्राथमिक और रियायती पहुंच मिलना भारतीय उद्योग के लिए बेहद अहम है. इससे वस्त्र, परिधान, चमड़ा, जूते, रत्न एवं आभूषण, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, वाहन, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के साथ-साथ आईटी और पेशेवर सेवाओं के निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलेगा. फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने भी कहा कि यूरोपीय संघ भारत के हालिया मुक्त व्यापार समझौतों में सबसे बड़ा और संभावनाओं से भरा बाजार है. भारत-ईयू एफटीए से अब तक अप्रयुक्त रहे व्यापार और निवेश के बड़े अवसर खुलेंगे, जिससे बाजार तक पहुंच आसान होगी, उद्योगों के बीच तालमेल मजबूत होगा और उच्च मूल्य वाले विनिर्माण क्षेत्रों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी. यह समझौता “विकसित भारत” के लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है. मेडिकल सेक्टर में नया अध्याय स्वास्थ्य क्षेत्र के संदर्भ में मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन पवन चौधरी ने कहा कि यह समझौता स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग का एक नया अध्याय शुरू कर सकता है. यदि इसे घोषित नियमों के अनुसार लागू किया गया, तो भारत मेडिकल टेक्सटाइल, सर्जिकल उपकरण और डिस्पोजेबल उत्पादों के निर्यात को बढ़ा सकेगा. इससे न केवल भारतीय कंपनियों को लाभ होगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान एक भरोसेमंद और नवाचार-आधारित साझेदार के रूप में मजबूत होगी. वाहन उद्योग की ओर से सियाम के अध्यक्ष और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के एमडी एवं सीईओ शैलेश चंद्रा ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए घरेलू उत्पादन और बाजार तक पहुंच के बीच संतुलन बनाते हुए वाहन क्षेत्र में निवेश, रोजगार और वैश्विक भागीदारी को बढ़ावा देगा. इससे उपभोक्ताओं को भी दोनों क्षेत्रों में अधिक विकल्प मिलेंगे. वहीं, भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील मित्तल ने भरोसा जताया कि यह समझौता डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर खोलेगा और यूरोपीय निवेशकों को भारत के साथ मिलकर वैश्विक बाजारों में विस्तार का मौका देगा. केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने इस समझौते में अपने संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा है. आंकड़ों के मुताबिक, भारत और ईयू के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में 136.53 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 75.85 अरब डॉलर और आयात 60.68 अरब डॉलर था. कुल मिलाकर, यह एफटीए भारत के लिए व्यापार, निवेश, रोजगार और तकनीकी सहयोग के नए द्वार खोलने वाला एक निर्णायक समझौता माना जा रहा है.

Jan 28, 2026 - 00:30
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इंडिया ईयू एफटीए पर उद्योग ने कहा- यूरोप के उच्च क्षमता वाले बाजार में व्यापार, निवेश के खोलेगा रास्ते

India EU Free Trade Agreement: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को उद्योग जगत ने भारत के लिए एक ऐतिहासिक और दूरगामी कदम बताया है. यह समझौता 27 देशों वाले यूरोपीय संघ जैसे बड़े और समृद्ध बाजार में भारत के लिए नए व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के अवसर खोलेगा. उद्योग संगठनों का मानना है कि इससे न केवल भारत के निर्यात को मजबूती मिलेगी, बल्कि भारतीय कंपनियों की वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भागीदारी भी बढ़ेगी. भारत और ईयू ने मंगलवार को इस एफटीए पर बातचीत के समापन की घोषणा की, जिसे वैश्विक व्यापार परिदृश्य में भारत की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

एफटीए साबित होगा गेमचेंजर

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने इसे भारत के वैश्विक व्यापार के लिए “गेम चेंजर” करार देते हुए कहा कि यह समझौता दो बड़े लोकतंत्रों और अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझेदारी को और मजबूत करता है, जो मिलकर वैश्विक जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत योगदान देते हैं. उन्होंने कहा कि भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात को यूरोपीय संघ में प्राथमिक और रियायती पहुंच मिलना भारतीय उद्योग के लिए बेहद अहम है. इससे वस्त्र, परिधान, चमड़ा, जूते, रत्न एवं आभूषण, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, वाहन, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के साथ-साथ आईटी और पेशेवर सेवाओं के निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलेगा.

फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने भी कहा कि यूरोपीय संघ भारत के हालिया मुक्त व्यापार समझौतों में सबसे बड़ा और संभावनाओं से भरा बाजार है. भारत-ईयू एफटीए से अब तक अप्रयुक्त रहे व्यापार और निवेश के बड़े अवसर खुलेंगे, जिससे बाजार तक पहुंच आसान होगी, उद्योगों के बीच तालमेल मजबूत होगा और उच्च मूल्य वाले विनिर्माण क्षेत्रों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी. यह समझौता “विकसित भारत” के लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है.

मेडिकल सेक्टर में नया अध्याय

स्वास्थ्य क्षेत्र के संदर्भ में मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन पवन चौधरी ने कहा कि यह समझौता स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग का एक नया अध्याय शुरू कर सकता है. यदि इसे घोषित नियमों के अनुसार लागू किया गया, तो भारत मेडिकल टेक्सटाइल, सर्जिकल उपकरण और डिस्पोजेबल उत्पादों के निर्यात को बढ़ा सकेगा. इससे न केवल भारतीय कंपनियों को लाभ होगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान एक भरोसेमंद और नवाचार-आधारित साझेदार के रूप में मजबूत होगी.

वाहन उद्योग की ओर से सियाम के अध्यक्ष और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के एमडी एवं सीईओ शैलेश चंद्रा ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए घरेलू उत्पादन और बाजार तक पहुंच के बीच संतुलन बनाते हुए वाहन क्षेत्र में निवेश, रोजगार और वैश्विक भागीदारी को बढ़ावा देगा. इससे उपभोक्ताओं को भी दोनों क्षेत्रों में अधिक विकल्प मिलेंगे. वहीं, भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील मित्तल ने भरोसा जताया कि यह समझौता डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर खोलेगा और यूरोपीय निवेशकों को भारत के साथ मिलकर वैश्विक बाजारों में विस्तार का मौका देगा.

केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने इस समझौते में अपने संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा है. आंकड़ों के मुताबिक, भारत और ईयू के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में 136.53 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 75.85 अरब डॉलर और आयात 60.68 अरब डॉलर था. कुल मिलाकर, यह एफटीए भारत के लिए व्यापार, निवेश, रोजगार और तकनीकी सहयोग के नए द्वार खोलने वाला एक निर्णायक समझौता माना जा रहा है.

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